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सिंधिया की सुरक्षा में मुस्तैद पुलिस, माता के भरोसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा; पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल

Published: Sun, 18 Oct 2026 07:08 PM (IST)

अशोकनगर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सुरक्षा में पुलिस बल मुस्तैद रहा, लेकिन नवरात्र में हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

 श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

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डिजिटल डेस्क, अशोकनगर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सुरक्षा में पुलिस बल और अधिकारी मुस्तैद रहे, लेकिन नवरात्र में माता के दर्शनों के लिए सड़कों पर उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा भगवान भरोसे नजर आई।

शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात संभालने वाले पुलिसकर्मियों की गैरमौजूदगी, सड़कों पर वाहन चालकों की मनमानी और गरबा स्थलों पर असामाजिक तत्वों की गतिविधियों ने पुलिस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। हालात ऐसे रहे कि माता के दर्शन करने निकली महिलाओं, बच्चों और परिवारों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए भी जिम्मेदार पुलिस अमला नजर नहीं आया।

सवाल यह है कि क्या वीआईपी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए आमजन की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इस तरह नजरअंदाज किया जा सकता है।

वीआईपी सुरक्षा में व्यस्तता

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दो दिवसीय अशोकनगर प्रवास के दौरान पुलिस बल और अधिकारी उनकी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे। दूसरी ओर, दिनभर की भागदौड़ के बाद रात के समय शहर की सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी बेहद कमजोर दिखाई दी। नतीजतन, नवरात्र के दौरान माता के दर्शनों के लिए निकलने वाले श्रद्धालु अव्यवस्थित यातायात के बीच आवागमन करने को मजबूर रहे।

शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस व्यवस्था नजर नहीं आने से लोगों में नाराजगी देखी गई।

शहर में जाम, बदहाल व्यवस्था

शनिवार रात करीब 9:45 बजे सुभाषगंज फाटक के पास यातायात व्यवस्था की पड़ताल में कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं मिला। यह वह स्थान है, जहां भीड़ बढ़ने पर जाम की स्थिति निर्मित होती है और यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की मौजूदगी बेहद जरूरी है। इसके बाद गांधी पार्क क्षेत्र में पड़ताल की गई, जहां एसएएफ के पुलिसकर्मी नजर आए। इसके बावजूद दोनों क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था अव्यवस्थित बनी रही।

सिटी कोतवाली पुलिस और यातायात पुलिस की प्रभावी मौजूदगी नहीं दिखने से वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।

देर रात तक आयोजन, पुलिस नदारद

शहर के मधुबन गार्डन में आयोजित रंगरात्रि गरबा महोत्सव में रात करीब 11:30 बजे गरबा नृत्य का समापन हुआ। निर्धारित समय के पालन और आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच वहां पुलिस बल की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही।

भीड़भाड़ वाली गली में एक काले रंग की फॉर्च्यूनर पहुंचने और उसके आसपास कुछ युवकों द्वारा लोगों से बदतमीजी किए जाने की बात सामने आई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन के बाहर लटका एक युवक भी लोगों के साथ अभद्रता करता दिखाई दिया। ऐसे हालात में सवाल उठता है कि भीड़भाड़ वाले गरबा स्थलों पर पुलिस की निगरानी और सुरक्षा इंतजाम आखिर कहां थे।

पहले दिखती थी मुस्तैदी, अब व्यवस्था पर सवाल

पूर्व के वर्षों में नवरात्र के दौरान प्रमुख चौराहों पर पुलिस अधिकारी और जवान तैनात रहते थे। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात सुचारु रखने और असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते थे। इस बार ऐसी मुस्तैदी नजर नहीं आने से लोगों में असंतोष है।

प्रशासन ने गरबा आयोजनों के समापन के लिए निर्धारित समय तय किया था, लेकिन मधुबन गार्डन में रात 11:30 बजे तक कार्यक्रम चलने से आदेशों के पालन और निगरानी पर सवाल उठे हैं।

जिम्मेदारों से सवाल

नवरात्रि के दौरान शहर में श्रद्धालुओं की भीड़ पहले से अनुमानित थी। ऐसे में प्रमुख चौराहों, गरबा स्थलों और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर पुलिस की पर्याप्त तैनाती तथा यातायात प्रबंधन जरूरी था। केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा भी पुलिस की उतनी ही बुनियादी जिम्मेदारी है।

सवाल यह है कि जब शहर की सड़कों पर हजारों लोग माता के दर्शन के लिए निकल रहे हों, तब यातायात संभालने और हुड़दंग रोकने के लिए जिम्मेदार अमला कहां था? क्या पुलिस प्रशासन इन अव्यवस्थाओं पर संज्ञान लेकर शेष नवरात्र में सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम करेगा, या श्रद्धालु इसी तरह अव्यवस्था के बीच आवागमन करने को मजबूर रहेंगे?

ग्वालियर जैसी दुर्घटना का खतरा

ग्वालियर जैसी गंभीर दुर्घटना की आशंका अशोकनगर में भी बनी हुई है। भीड़ को चीरता हुआ ट्रक शहर के अंदर सुभासगंज में घुस गया था। इस विषय में यातायात प्रभारी और कोतवाली टीआई को मामले की सूचना भी दी गई लेकिन अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

नवरात्र में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच भारी वाहनों का प्रवेश बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या पुलिस प्रशासन ग्वालियर जैसे किसी हादसे का इंतजार कर रहा है।