ग्वालियर, जागरण ऑनलाइन डेस्क। Amavasya Sarvartha Siddhi Yoga सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष की आखिरी तारीख होती है। इस दिन विधि पूर्वक पितरों का श्राद्ध, तर्पण, दान, ब्राह्मण भोजन इत्यादि कराने से पितृ प्रसन्न होते हैं। पितृपक्ष का अंतिम दिन बेहद ही खास होता है और इसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। इस बार सर्वपितृ अमावस्या तिथि पर ग्रह, वार नक्षत्रों से मिलकर कुल सात शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इन शुभ योगों में किया गया। श्राद्ध, तर्पण, पूजापाठ से मिलने वाला पूर्ण फल पितरों को प्राप्त होगाजिससे यह महापर्व बनेगा।  

मालूम हो कि इस शुभ योग में स्नान, दान, श्राद्ध करने से पितर साल भर के लिए संतुष्ट होकर पित्तर लोक में विदा होंगे। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र से मित्र नाम का शुभ योग पूरे दिन रहेगा। इसके अलावा शुभ और शुक्ल नाम के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग, वही सूर्य बुध की युति से बुध आदित्य योग और बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग बनेगा।

इन शुभ योगों में किया गया। श्राद्ध, तर्पण, पूजापाठ से मिलने वाला पूर्ण फल पितरों को प्राप्त होगा। सर्व पितृ अमावस्या पर लक्ष्मीबाई कालोनी स्थित सामुदायिक भवन में सामूहित तर्पण के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पितृपक्ष का अंतिम दिन बेहद ही खास होता है और इसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। इस बार सर्वपितृ अमावस्या तिथि पर ग्रह, वार नक्षत्रों से मिलकर कुल सात शुभ योग का निर्माण हो रहा है। जिससे यह महापर्व बनेगा।

जानकारी हो कि इस वर्ष भी लक्ष्मीबाई सामुदायिक भवन में सामूहिक तर्पण का आयोजन सुबह साढ़े सात बजे से किया विधि-विदान के साथ किया जाएगा। तर्पण के लिए एक परात, लौटा व एक चम्मच व एक अगौछा साथ लेकर आना है।

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Edited By: PRITI JHA

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