MP में आयुष्मान योजना से बाहर होंगे 70 निजी अस्पताल, NABH प्रमाणपत्र न होने पर बड़ी कार्रवाई
भोपाल सहित मध्य प्रदेश के बड़े शहरों के लगभग 70 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से बाहर हो सकते हैं। ...और पढ़ें

मानक पूरा न करने पर आयुष्मान योजना से बाहर होंगे निजी अस्पताल (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, भोपाल। भोपाल सहित प्रदेश के बड़े शहरों इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के करीब 70 निजी अस्पताल जल्द ही आयुष्मान भारत योजना से बाहर हो सकते हैं। वजह साफ है- इन अस्पतालों के पास नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स का अनिवार्य इंट्री लेवल प्रमाणपत्र नहीं है। 31 मार्च के बाद इनकी संबद्धता समाप्त कर दी जाएगी।
कई मौके मिले, फिर भी नहीं पूरा किया मानक
स्टेट हेल्थ एजेंसी के मुताबिक, इन अस्पतालों को कई बार मौका दिया गया, लेकिन वे तय मानकों को पूरा नहीं कर सके। कुछ अस्पतालों ने तो NABH प्रमाणन के लिए आवेदन तक नहीं किया। फिलहाल प्रदेश में 720 निजी और 1118 सरकारी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं।
छोटे जिलों को फिलहाल राहत
जहां बड़े शहरों में यह नियम सख्ती से लागू किया जा रहा है, वहीं छोटे जिलों में अस्पतालों की संख्या कम होने के कारण अभी इसे अनिवार्य नहीं किया गया है।
दो साल में फाइनल NABH जरूरी
एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन अस्पतालों के पास इंट्री लेवल प्रमाणपत्र है, उन्हें भी दो साल के भीतर फाइनल NABH हासिल करना होगा। यह प्रक्रिया जटिल मानी जाती है, जिससे कई अस्पताल संचालक आशंकित हैं कि वे इसे पूरा नहीं कर पाएंगे।
हाईकोर्ट ने भी नहीं दी राहत
NABH को अनिवार्य करने के फैसले के खिलाफ अस्पताल संचालकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि अदालत ने हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए कहा कि अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह कदम जरूरी है।
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अतिरिक्त प्रोत्साहन के बावजूद उदासीनता
दिलचस्प बात यह है कि फाइनल NABH हासिल करने वाले अस्पतालों को पैकेज राशि में 10% अतिरिक्त भुगतान का लाभ मिलता है, इसके बावजूद कई अस्पताल इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
क्या है NABH और क्यों जरूरी
क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के तहत दिए जाने वाले NABH प्रमाणपत्र के तीन स्तर होते हैं— इंट्री, प्रोग्रेसिव और फाइनल। यह अस्पतालों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का मानक है, जिसमें संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, ऑपरेशन थिएटर के मानक, स्टाफ प्रशिक्षण, मरीज सुविधाएं और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया जाता है।
