भोपाल, जेएनएन। मध्य प्रदेश में एक युवक ने अपना मांगलिक दोष दूर करने के अंधविश्वास में शादी कर ली। वह प्रेमिका से शादी करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता था। इस दोष के कथित रूप से दूर होने के बाद युवक ने पत्नी से तलाक के लिए आवेदन दे दिया। जबकि उसकी पत्नी तलाक नहीं देना चाहती है। यह मामला कुटुंब न्यायालय पहुंचा है। युवक सरकारी नौकरी करता है। कुटुंब न्यायालय के काउंसलर के सामने युवक ने स्वीकार किया कि उसने पहले से ही यह तय कर रखा था कि पूरा जीवन पत्नी के साथ नहीं रहना है और प्रेमिका से ही शादी करनी है। उसने सिर्फ मांगलिक दोष उतारने के लिए शादी की थी। इस मामले में कानून विशेषज्ञों का कहना है कि युवक का मंगल दोष दूर करने का तरीका गलत है। कानूनी रूप से अंधविश्वास किसी रिश्ते के टूटने का आधार नहीं हो सकता। इसी तरह का एक और मामला सामने आया है, जिसमें पेशे से इंजीनियर ने मंगल दोष के दृष्टिगत मांगलिक युवती से विवाह किया और अब तलाक का आवेदन दिया है। कानून के जानकारों ने दोनों प्रकरणों को गैरकानूनी बताया है।

धोखाधड़ी या दहेज प्रताड़ना का दर्ज हो सकता है केस
वरिष्ठ काउंसलर व कानूनी सलाहकार रिता तुली ने कहा कि कोर्ट को मंगल दोष से कोई मतलब नहीं है। दोनों युवकों पर उनकी पत्नियां चाहे तो धोखाधड़ी या दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करा सकती हैं।

घरेलू हिंसा का भी हो सकता है केस

वकील गुंजन चौकसे ने कहा कि यह अपराध की श्रेणी में आएगा। इन दोनों मामलों में धोखाधड़ी, घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का केस पत्नियां दर्ज करा सकती हैं।

गौरतलब है कि भोपाल में एक महिला ने ससुराल में शौचालय नहीं होने पर पति के खिलाफ तलाक का केस कर दिया था। इसके बाद जब पति ने घर में शौचालय बनवा दिया, तब पत्नी साथ रहने के लिए तैयार हुई और उसने तलाक का केस भी वापस ले लिया। इस दंपती की शादी करीब पांच साल पहले हुई। भोपाल से शादी के बाद जब दुल्हन अपनी ससुराल विदिशा पत्नी तो वहां शौचालय नहीं मिला। उसने इस समस्या के संबंध में अपने पति और ससुराल वालों से बात की, मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद वह रूठकर मायके चली गई। उसने सोचा कि ससुराल वाले उसकी बात मान जाएंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ, तब वह कोर्ट पहुंची थी। 

Edited By: Sachin Kumar Mishra