उज्जैन, जेएनएन। 4 दिसंबर शनिवार के दिन अगहन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या है। शनिवार के दिन अमावस्‍या होने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं। पंचांगीय गणना के अनुसार अगहन मास में 30 साल बाद ग्रह गोचर की विशिष्ट स्थिति में शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है। ऐसी राशियां जिन पर शनि की ढैया, साढ़ेसाती, महादशा, प्रत्यांतर दशा चल रही है, उन राशि के जातकों को इस खास दिना शनिदेव की पूजा, तेल से अभिषेक व शनि की वस्‍तुओं का दान करना चाहिए। इससे शनि देव की कृपा मिलेगी और संकट दूर होंगे। इस खास योग में तीर्थ स्‍नान व दान करने से शुभ फल मिलता है।

जाने कैसे प्रसन्‍न होंगे शनि देव

यदि आपकी जन्म कुंडली में शनि की ढैया, साढ़े साती, महादशा चल रही है तो इस अमावस्या पर शनि देव की विशेष साधना करनी होगी। शनिवार के दिन वैदिक अनुष्ठान, शनिदेव का तेल से अभिषेक, लोहे के पात्र, काला कपड़ा, काले तिल, काली उड़द, कंबल आदि का दान करना फलदायी माना जाता है। इस दिन शनि स्तोत्र, महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र, शनि अष्टक का पाठ करें इससे विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। शनि मंत्र का जाप करने से भी अरिष्ट और अनिष्ट का निवारण होता है।

त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालु करेंगे पर्व स्नान

4 दिसंबर को इंदौर रोड पर स्थित त्रिवेणी संगम पर शनिश्चरी अमावस्या का पर्व स्नान होगा। इस दिन श्रद्धालु स्नान करने के बाद शनि की शांति के लिए घाट पर कपड़े व जूते- चप्पल के रूप में पनौती छोड़ेंगे। ऐसी मान्यता है कि जिस व्‍यक्ति को शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है उसके समस्त दुःखों का नाश होता है। पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालु घाट के पास स्थित प्राचीन श्री नवग्रह शनि मंदिर में शनिदेव के दर्शन व पूजा करेंगे।

Edited By: Babita Kashyap