भोपाल, जेएनएन। मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की रात हुए यूनियन कार्बाइड गैस कांड में प्रभावित हुए लोगों को आज 37 साल बाद भी न्याय नहीं मिला है। ये लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस गैस त्रासदी का दंश झेलते आ रहे हैं। इसे लेकर पीड़ितों के सवालों के केंद्र और राज्य सरकारों के पास भी जवाब नहीं हैं। बीते 37 सालों से पीड़ित लगातार सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन कोई उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। पीड़ितों के ये सवाल आर्थिक, सामाजिक विकास, स्वास्थ्य सुविधा, मुआवजा, जहरीले कचरे के निपटान, मृतकों व प्रभावितों की वास्तविक संख्या और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुआवजा राशि के प्रकरण से जुड़े हुए हैं। गैस कांड प्रभावितों ने इस बार की बरसी पर भी अनदेखी के आरोप लगाए हैं।

भोपाल गैस कांड की एक पीड़िता और स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी का कहना है कि आज इतने सालों के बाद भी प्रभावितों में मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया है। प्रभावितों की तीसरी पीढ़ी तक बीमारियों से जूझ रही है, लेकिन उन्‍हें किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। इस भीषण कांड के लिए जिम्मेदार एक भी आरोपित को आज तक सजा नहीं हुई है।

इस मामले में भोपाल ग्रुप फार इंफार्मेशन एंड एक्शन की सदस्य रचना ढींगरा का कहना है ने बताया कि जहरीली गैस की वजह से पीड़ितों के फेफड़े, हृदय, गुर्दे, अंत:स्त्रावी तंत्र, तंत्रिका तंत्र और रोग प्रतिरोधक तंत्र की पुरानी बीमारियों के लिए इलाज की कोई प्रामाणिक विधि आज तक विकसित नहीं की गई है। सरकार ने इस हादसे के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सभी शोध बंद कर दिए हैं।

महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा की शहजादी बी का भी यही कहना है कि 37 साल के बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है। दोषी यूनियन कार्बाइड कंपनी के पास स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारी है, लेकिन उसने इसे आज तक साझा नहीं किया है। पीड़ित आज भी सम्मान की जिंदगी नहीं जी पा रहे हैं। वहीं गैस पीड़ित संगठन के नवाज खां ने बताया कि हादसे के बाद कारखाना परिसर में रखे जहरीले कचरे का निपटान नहीं होने की वजह से प्रदूषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

जाने कब हुई ये गैस त्रासदी

2 व 3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात को भोपाल गैस कांडहुआ था। गैस पीड़ित संगठन की रचना ढींगरा ने बताया सरकारी आंकड़ों के अनुसार गैस कांड में 5.74 लाख नागरिक प्रभावित हुए थे। वहीं इसकी वजह से 15 हजार नागरिकों की मौत हुई थी। लेकिन कोर्ट में कहा गया कि पांच हजार मौतें हुई थीं। इस मामले में संगठनों का दावा है कि मैदानी हकीकत के आगे यह आंकड़े कुछ भी नहीं हैं।

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दुनिया की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस कांड में असमय जान गंवाने वाले नागरिकों की दिवंगत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। आज का दिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम सभी के लिए यह संकल्प लेने का दिन है कि अब कभी भी ऐसी मानवनिर्मित त्रासदी दोबारा न हो। सजग और संवेदनशील रहकर हम ऐसी मानवीय भूलों को रोक सकते हैं। #BhopalGasTragedy #BhopalGasTragedy1984 - Dr.Narottam Mishra (@drnarottammisra) 3 Dec 2021

Edited By: Babita Kashyap