'बागी सिपाहियों को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने रियासतों पर बनाया था दबाव', मोड़ी लिपि के पत्र में 1857 की क्रांति का बड़ा खुलासा
ज्ञान भारतम मिशन के तहत मिली मोड़ी लिपि की पांडुलिपि से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का नया खुलासा हुआ है। ...और पढ़ें
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1857 में अंग्रेजों ने रियासतों पर बनाया था दबाव (यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।)
HighLights
मोड़ी लिपि में 1857 क्रांति का महत्वपूर्ण दस्तावेज मिला।
अंग्रेजों ने रियासतों पर बागी सिपाहियों को पकड़ने का दबाव बनाया।
होलकर रियासत ने 75 बागी सिपाहियों की सूची जारी की।
शशिकांत तिवारी, भोपाल। ''ज्ञान भारतम मिशन'' के अंतर्गत पांडुलिपियों के संकलन और संरक्षण के लिए चलाए गए अभियान में मराठी भाषा और मोड़ी लिपि में दो पेज का दस्तावेज मिला है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के समय एक अंग्रेज अधिकारी द्वारा रियासतों को भेजा गया यह पत्र भारतीय सिपाहियों के देश प्रेम और अंग्रेजी शासन द्वारा प्रताड़ना की कहानी बताता है।
इसके अनुसार, ''छठवीं पलटन कंटन्जेंटी शिंदे'' के 75 सैनिकों ने अंग्रेजों के हित में काम करने की जगह नौकरी छोड़ कर बगावत कर दी। इसके बाद एक अंग्रेज अधिकारी ने रियासतों को पत्र भेजा कि इन सैनिकों को आश्रय नहीं दिया जाए। कोई भी रियासत इन्हें भर्ती नहीं करे। उनके साथ मारपीट नहीं की जाए बल्कि पकड़कर अंग्रेजों को सौंपा जाए।

ऐसा ही एक पत्र इंदौर की होलकर रियासत को मिला था। इसके आधार पर रियायत की ओर से 27 नवंबर 1857 को एक सूचना (विज्ञप्ति फौजदारी) जारी की गई थी। होलकर सरकार के समस्त दरबारियों और प्रजा को संबोधित करती इस सूचना में कहा गया था,
'' हुकुम दफ्तर कचहरी सेंट्रल इंडिया के हुजूर से अंग्रेजी पत्र में साहब सीकसार (अंग्रेज अधिकारी का नाम) बहादुर गवर्नमेंट हिन्दुस्तान द्वारा 19 अक्टूबर 1857 को लिखा गया पत्र हमारी कचहरी को प्राप्त हुआ है। कोई आदमी गैर मुल्क (दूसरी रियासत) और खासकर रियासत फिरंगी की नौकरी पाने के इरादे से नहीं आने पाए। फिरंगियों के आदमी ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।''
होलकर रियासत की ओर से लिखित सूचना के साथ उन 75 सिपाहियों की सूची भी जारी की गई थी जिन्होंने बगावत की थी। सूची में प्रत्येक सिपाही का नाम, जाति, निवास स्थल का उल्लेख था, जिससे उनकी पहचान आसानी से की जा सके। इसमें अधिकतर उत्तर प्रदेश और कुछ मध्य प्रदेश के थे।
इस पत्र का अनुवाद करने करने वाले भाषा विशेषज्ञ सैयद नइमुद्दीन कहते हैं अन्य रियासतों ने भी उस समय इसी तरह की विज्ञप्ति जारी की होगी
ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों को डिजिटाइज किया जा रहा है। इसी कड़ी में मराठी भाषा, मोड़ी लिपि में यह पत्र मिला है। इसमें होलकर राजवंश की मुहर भी है। डा. मनीषा शर्मा संयुक्त संचालक, पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार
