एमनेस्टी इंटरनेशनल की पाकिस्तान को फटकार, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रहे 'डिजिटल हमले'

अंतराराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान में मानवधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रहे डिजिटल हमलों को लेकर फटकार लगाई है।

By Vikas JangraEdited By: Publish:Wed, 16 May 2018 09:30 AM (IST) Updated:Wed, 16 May 2018 10:36 AM (IST)
एमनेस्टी इंटरनेशनल की पाकिस्तान को फटकार, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रहे 'डिजिटल हमले'
एमनेस्टी इंटरनेशनल की पाकिस्तान को फटकार, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रहे 'डिजिटल हमले'

इस्लामाबाद (एएफपी)। अंतराराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान में मानवधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रहे डिजिटल हमलों को लेकर फटकार लगाई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर उन पर जानबूझकर डिजिटल अटैक किए जा रहे हैं। मानवाधिकारों की प्रहरी संस्था का कहना है कि पाकिस्तानी कार्यकर्ताओं की डिवाइस पर स्पाइवेयर की मदद से जासूसी की जा रही है। एमनेस्टी ने इस बारे में एक स्टडी भी प्रकाशित की है। इसके सह लेखक शेरिफ अलसैयद अली ने बताया कि 'निगरानी के अधीन मानवाधिकार' नाम से प्रकाशित इस अध्ययन में चार कार्यकर्ताओं के अनुभव में आए दर्जनों ऐसे केस शामिल किए गए हैं।

ऐसी ही एक आंदोलनकारी दीप सइदा ने बताया कि मावधिकार कार्यकर्ता रजा खान के बारे में बात करने पर उसे भी लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। रजा खान की इस साथी ने बताया कि वह दिसबंर में अचानक लापता हो गए थे। दीप सइदा ने बताया कि जब उसने फेसबुक पर रजा खान को लेकर कैंपेन शुरू किया तो एक हैकर ने फेसबुक पर उनकी ईमेल आईडी सार्वजनिक कर दी। इसके बाद दीपा को पाकिस्तान की सरकारी विभागों के नाम से ऐसे मेल भेजे गए जिनमें स्पाइवेयर के लिंक शामिल थे, ताकि हैकर उनका डाटा और पासवर्ड चुरा सकें। 

'अब तो डर लगने लगा है'

सइदा ने एमनेस्टी को बताया कि अब वह जब भी मेल खोलती हैं तो उन्हें डर लग रहा होता है। यह इतना बुरा है कि अब वह अपना काम भी नहीं कर पा रही हैं। एमनेस्टी ने ऐसे हमलों के दस्तावेज तैयार करना शुरू कर दिया है, जिसमें कार्यकर्ताओं के कंप्यूटर और फोन्स को वायरस की मदद से खराब करने की कोशिश की जा रही है। इनमें से कुछ वायरस लिंक पाकिस्तान में बैठे कुछ हैकर्स के समूह ने तैयार किए थे। 

ऐसे हमलावरों की पहचान मुश्किल

एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक ऐसे सुनियोजित डिजिटल हमलावरों की पहचान करना मुश्किल है, लेकिन उन्होंने पाकिस्तानी सरकार से स्वतंत्र और प्रभावी जांच करवाने की मांग की है। अलसैयद अली का कहना है कि पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ता होने बहुत ही डरावना है, यह देखना और भी खतरनाक है कि किस तरह उनके काम पर हो रहे हमले अब डिजिटल मोड में बदल रहे हैं। 

गायब होते लोग, सेना पर उठते सवाल

वैसे भी पाकिस्तान भर में आए दिन ऐसे लोग गायब हो रहे हैं जो या तो सरकार की आलोचना करते हैं या फिर मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं। पाकिस्तानी सेना की आलोचना करने की हिम्मत तो देश में शायद ही कोई करता है। हालांकि अधिकारी इन घटनाओं के पीछे सेना का हाथ होने से इंकार करते हैं लेकिन फिर भी देश में बढ़ते मानवाधिकार आंदोलन और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान जरूर इस मामले पर सवाल खड़ा करते हैं। 

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