आजमगढ़ 25 हजार का इनामी बदमाश देहरादून से गिरफ्तार Dehradun News

कई आपराधिक वारदात का आरोपित 25 हजार का इनामी बदमाश मनोज सिंह ठाकुर दून पुलिस के हत्थे चढ़ गया। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है।

By Sunil NegiEdited By: Publish:Fri, 21 Feb 2020 09:29 AM (IST) Updated:Fri, 21 Feb 2020 09:29 AM (IST)
आजमगढ़ 25 हजार का इनामी बदमाश देहरादून से गिरफ्तार Dehradun News
आजमगढ़ 25 हजार का इनामी बदमाश देहरादून से गिरफ्तार Dehradun News

देहरादून, जेएनएन। धोखाधड़ी, मारपीट समेत कई आपराधिक वारदात का आरोपित 25 हजार का इनामी बदमाश मनोज सिंह ठाकुर दून पुलिस के हत्थे चढ़ गया। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है और दून के मालसी में पत्नी व बच्चों के साथ पहचान बदलकर रह रहा था। बीती 11 फरवरी को वह वाराणसी से पेशी से लौटते वक्त मुंबई पुलिस को चकमा देकर भाग निकला था। तब से मुंबई पुलिस उसे तलाश कर रही थी। उप्र पुलिस ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया हुआ है। उस पर कुल 22 मुकदमे दर्ज हैं। राजनीतिक गलियारों में भी मनोज की खासी पैठ है। वह आजमगढ़ में ब्लॉक प्रमुख रहने के साथ महाराष्ट्र में राजद, सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों का पदाधिकारी रह चुका है। 

गुरुवार को एसपी सिटी श्वेता चौबे ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि मसूरी रोड स्थित मालसी निवासी सावित्री सिंह ने बीती दो जनवरी को राजपुर थाने में सुनील मल्होत्रा और अन्य के खिलाफ षड्यंत्र रचकर फ्लैट बेचने की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की विवेचना में सामने आया कि फ्लैट सावित्री के पति मनोज सिंह ठाकुर ने ही सुनील मल्होत्रा को 98 लाख रुपये में बेचा है। यह भी पता चला कि मनोज अधिकतर समय मुंबई में रहता है और पत्नी व बच्चों से मिलने अक्सर दून आता है।

इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए एसओजी गठित की गई। एसओजी ने मुंबई पुलिस से संपर्क किया तो जानकारी मिली कि वह 11 फरवरी को पुलिस अभिरक्षा से फरार हुआ है। मुंबई पुलिस ने उसके दून आने की आशंका से भी अवगत कराया। 

इस पर एसओजी ने मालसी स्थित उसके फ्लैट की निगरानी शुरू कर दी। इसी बीच 19 फरवरी को एसओजी को सूचना मिली कि मनोज को देहरादून में कचहरी के आसपास देखा गया है। इसके बाद एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल और राजपुर एसओ अशोक राठौर ने टीम के साथ मालसी में उसके फ्लैट के आसपास घेराबंदी कर दी। देर रात मनोज कार से मालसी पहुंचा। इसी दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास देसी तमंचा और दो कारतूस मिले। राजपुर थाने में आरोपित के खिलाफ आम्र्स एक्ट में भी मुकदमा दर्ज किया गया है।

राजनीति में भी आजमाए हाथ

पुलिस को पूछताछ में मनोज ने बताया कि उसके पिता मुंबई में रेलवे में अधिकारी थे। इस कारण उसका बचपन मुंबई में ही बीता। 2002 में मुंबई यूनिवर्सिटी से उसने ग्रेजुएशन और फिर जर्नलिज्म में डिप्लोमा किया। इसके बाद उसने राजनीतिक गलियारों का रुख कर लिया। 2008 से 2012 तक वह महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जनता दल का प्रदेश प्रवक्ता रहा। 2012 से 2014 तक महाराष्ट्र में ही समाजवादी पार्टी का प्रदेश महासचिव और फिर महाराष्ट्र कांग्रेस में समन्वय समिति का सदस्य भी रहा। वर्ष 2016 में वह आजमगढ़ पहुंचा और फिर सपा से जुड़ गया। वहां मार्टीगंज क्षेत्र से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीता। लेकिन, वर्ष 2018 में अविश्वास प्रस्ताव के चलते उसे पद छोड़ना पड़ा।

26 सितंबर को मुंबई पुलिस ने किया गया था गिरफ्तार 

ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी छिनने के बाद मनोज फिर मुंबई पहुंच गया। वहां मुंबई पुलिस ने उसे 26 सितंबर 2019 को ठाणे से गिरफ्तार कर लिया। बीती 10 फरवरी को मुंबई पुलिस उसे वाराणसी में दर्ज धोखाधड़ी के मुकदमे की पेशी के लिए वाराणसी ले गई थी। पेशी के बाद मनोज ने मां की बीमारी का बहाना बनाकर मुंबई पुलिस को आजमगढ़ चलने के लिए राजी कर लिया। 11 फरवरी को वह आजमगढ़ से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया और 14 फरवरी को दून आ गया।

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विभिन्न थानों में दर्ज हैं 22 मुकदमे

मनोज के खिलाफ दून समेत महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में धोखाधड़ी, मारपीट और आम्र्स एक्ट के 22 मुकदमे दर्ज हैं। उस पर आजमगढ़ व वाराणसी में रेलवे में नौकरी दिलाने और महाराष्ट्र में लोगों से मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। 

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