पाक से आने के बाद इकलाख के खिलाफ हो गया गांव

ललित विजय, नोएडा : बिसाहड़ा में इकलाख की हत्या एक साल से उसके खिलाफ पनप रहे गुस्से का कारण परिणाम थी।

By Edited By: Publish:Tue, 06 Oct 2015 01:08 AM (IST) Updated:Tue, 06 Oct 2015 01:08 AM (IST)
पाक से आने के बाद इकलाख के खिलाफ हो गया गांव

ललित विजय, नोएडा : बिसाहड़ा में इकलाख की हत्या एक साल से उसके खिलाफ पनप रहे गुस्से का कारण परिणाम थी। इकलाख की मौसी अखतरी पाकिस्तान में रहती हैं। उनसे मिलने के लिए इकलाख करीब सवा साल पहले पाकिस्तान गया था और वहां ढाई माह रहकर आया। वहां से आने के बाद इकलाख ने अल्टो कार खरीद ली थी। इससे गांव के लोग उसे शक भरी नजरों से देखने लगे थे। यही कारण था कि 28 सितंबर की रात जब विशाल और शिवम ने मंदिर से इकलाख पर गोहत्या का आरोप लगाया तो उसे गांव के अन्य लोगों ने सही मान लिया। वह इकलाख के घर पहुंचे और उसकी हत्या कर दी गई। इकलाख की बहन हाजरा का कहना है कि पाकिस्तान में रहने वाली मौसी अखतरी के पास परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं गया है। इकलाख ही ढाई माह रहकर आया था। हालांकि इसके पीछे सिर्फ मौसी से मिलने का मकसद था। उधर, एडीएम राजेश यादव का कहना है कि प्रशासन को इकलाख के पाकिस्तान जाने की जानकारी नहीं है। अभी तक यह मामला किसी के संज्ञान में नहीं आया। अब इसकी जांच होगी कि इकलाख क्यों और कैसे पाकिस्तान गया था।

'मस्जिद में करने लगा था सभा'

इकलाख के भाई जान मोहम्मद और भाजपा नेता संजय राणा के बीच बचपन की दोस्ती थी। संजय का बेटा विशाल इकलाख की हत्या में आरोपी है। संजय की शादी में जान मोहम्मद और इकलाख ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इकलाख की बेटी की शादी में संजय ने पूरा साथ दिया था। संजय राणा कहना है कि पाकिस्तान से आने के बाद इकलाख मस्जिद पर सभाएं करने लगा था। इससे उसके पास समय कम होता था। इस कारण मेलजोल कम हो गया था।

हज यात्रा कर मांगी थी बेटे और पोते की सलामती की दुआ

इकलाख की मां असगरी करीब दो साल पहले हज यात्रा पर गई थीं। यहां उन्होंने इकलाख और पोते दानिश के लिए दुआ मांगी थी। परिवार के लोगों का कहना है कि उनकी दुआ के कारण ही दानिश मौत के मुंह से निकल पा रहा है।

सीबीआइ से जांच हो : संजय रंाणा

संजय राणा का कहना है कि इकलाख की हत्या में जो युवक शामिल थे, उनका एफआइआर में नाम ही नहीं है। संजय ने बताया, '28 सितंबर की रात 10:20 बजे गोहत्या की घोषणा हुई। सबसे पहले मैंने 10:26 बजे सौ नंबर पर और फिर 10:28 बजे जारचा एसओ को फोन कर घटना की जानकारी दी और फोर्स मांगा। कॉल रिकार्ड से इसकी जांच की जा सकती है।' संजय के पिता राम पाल सिंह का कहना है कि संजय ने उनकी जेब से 15 हजार रुपये लेकर इकलाख के इलाज के लिए दिए थे। इसके बाद भी उनके पोते विशाल को आरोपी बनाया गया, जबकि वह घटना के वक्त दिल्ली में था। संजय राणा का कहना है कि पूरे मामले की सीबीआइ जांच होनी चाहिए।

अब गांव में लगता है डर

इकलाख के भतीजे और अफजाल अहमद के बेटे जफर का कहना है कि घटना के वक्त वह घर में सो रहा था। शोर सुनकर दो बच्चों, बहन और बीवी के साथ एक ¨हदू के घर में जाकर जान बचाई। हालांकि अब गांव में डर लगता है। पुलिस है, इसलिए सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, अन्यथा गली में निकलना खतरे से खाली नहीं है।

मुआवजे पर भी सवाल

गांव के लोगों ने इकलाख के परिवार को मिल रहे भारी मुआवजे पर भी सवाल उठाया है। गांव के रहने वाले उपेंद्र का कहना है कि आज तक किसी को सरकार की तरफ से 45 लाख मुआवजा की बात नहीं सुनी थी। बसपा ने भी 11 लाख दे दिए। पैसे की बारिश हो रही है। उपेंद्र का कहना है कि सरकार की एकतरफा मेहरबानी से गांव के लोगों में आक्रोश है।

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