लखनऊ में पकड़ी गई दस करोड़ से ज्यादा की जीएसटी चोरी, नया तरीका देख प्रवर्तन दल हैरान

मैन पावर उपलब्ध कराने वाली एक सेवा प्रदाता कंपनी ने फर्जी फर्म बनाकर लगातार तीन वर्ष तक सरकार को करोड़ों का चूना लगाया। कंपनी ने फर्जी फर्म बनाकर सरकार से आईटीसी क्लेम का करीब 10.66 करोड़ रुपये वसूला। जांच में इतनी बड़ी जीएसटी चोरी देख अफसरों के होश उड़़ गए।

By Vikas MishraEdited By: Publish:Sat, 22 Jan 2022 02:28 PM (IST) Updated:Sat, 22 Jan 2022 04:47 PM (IST)
लखनऊ में पकड़ी गई दस करोड़ से ज्यादा की जीएसटी चोरी, नया तरीका देख प्रवर्तन दल हैरान
टैक्स चोरी का नया तरीका देख प्रवर्तन दल हैरान रह गया

लखनऊ, जागरण संवाददाता। मैन पावर उपलब्ध कराने वाली एक सेवा प्रदाता कंपनी ने फर्जी फर्म बनाकर लगातार तीन वर्ष तक सरकार को करोड़ों का चूना लगाया। कंपनी ने फर्जी फर्म बनाकर सरकार से आईटीसी क्लेम का करीब 10.66 करोड़ रुपये वसूला। जांच में इतनी बड़ी जीएसटी चोरी देख अफसरों के होश उड़़ गए। विभाग ने तत्काल करीब 50 लाख रुपये जमा करा लिए हैं। नया तरीका देख जांच के बाद महकमे में हड़कंप मच गया। 

एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 भूपेंद्र शुक्ला के निर्देश पर ज्वाइंट कमिश्नर अजय वर्मा के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर पूजा तिवारी, असिस्टेंट कमिश्नर संदीप वर्मा, अखिलेश दुबे, प्रशांत सिंह एवं कपिलदेव तिवारी की विशेष अनुसंधान शाखा ने गोमतीनगर स्थित एक सेवा प्रदाता कंपनी की फर्म और कार्यालय की गुरुवार जांच शुरू की। लगातार चली जांच में करोड़ों के आईटीसी क्लेम देख गहन पड़ताल शुरू की तो करोड़ों का हेरफेर सामने आया।

टैक्स चोरी के लिए अपनाया ये तरीकाः लगातार तीन साल तक नए तरीके अपना आईटीसी क्लेम सरकार से लिया गया। वर्ष 2017-18 में फर्जी दो फर्में बनाई गईं। बिना खरीद बिक्री के एक दूसरे को टैक्स इनवाइस जारी कर आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का 2.37 करोड़ का लाभ सरकार से लिया गया।साल 2018 से 2020 में कोई खरीद बिक्री न होते हुए भी गलत तरीकों से रिटर्न में दिखाकर करीब सात करोड़ का क्लेम वसूला गया। वर्ष 2021-22 में व्यापारी ने अपने भाई के नाम से दूसरे शहर में अलग फर्म खोली। इस फर्म में माल की खरीद दिखाकर सेवा क्षेत्र वाली इस कंपनी ने सरकार से तकरीबन 59 लाख का क्लेम वसूल लिया।

यानी चार वर्षों तक जो इनवाइस जारी की गई उसमें फर्जी फर्मों के माध्यम से आईटसी दिखाई गई लेकिन बिना कर जमा किए ही सरकार से वसूल लिया गया। फर्म द्वारा कोई टैक्स जमा नहीं किया गया। जबकि नियमानुसार कर की देयता 10.66 बनती थी। जांच में राजफास होते ही प्रवर्तन दल अवाक रह गया और उच्चाधिकारियों एडिशनल कमिश्नर को जानकारी दी। अपने को फंसता देख व्यापारी ने 50 लाख रुपया तत्काल जमा किया। साथ ही जल्द ही करीब दस करोड़ जमा कराने का आश्वासन दिया।

सेवा प्रदाता कंपनियां कर रही हैं बडे़ पैमाने पर कर रही हैं टैक्स चोरी: एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-दो भूपेंद्र शुक्ला ने बताया कि ज्वाइंट कमिश्नर के नेतृत्व में बड़ी कर चोरी का राजफास हुआ है। फर्जी तरीके से फर्म बनाकर आईटीसी क्लेम लिया जा रहा है। इस बड़ी कर चोरी से विभाग ने अब सेवा प्रदाता कंपनियों की जांच कराए जाने का फैसला लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।

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