वैश्य समाज के उपवर्गो ने मांगा ओबीसी का दर्जा

Publish:Thu, 17 Nov 2011 06:57 PM (IST) Updated:Thu, 17 Nov 2011 06:59 PM (IST)
वैश्य समाज के उपवर्गो ने मांगा ओबीसी का दर्जा
वैश्य समाज के उपवर्गो ने मांगा ओबीसी का दर्जा

इटावा, हमारे प्रतिनिधि : अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप कर वैश्य समाज के उपवर्गो को जो पिछड़ी जाति में आते हैं उनके प्रमाणपत्र ओबीसी के जारी कराने की मांग की है।

परिषद के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण स्वरूप अग्रवाल, युवा प्रदेश महामंत्री रामशरण गुप्ता, कृष्ण मुरारी गुप्ता, मनीष पोरवाल, अनन्त प्रताप अग्रवाल, सर्वेश गुप्ता सहित अनेक लोगों ने उल्लेख किया कि वैश्य समाज के उपवर्ग कलाल, कलार, कलवार, शिवहरे, गुलहरे, पोरवाल, जायसवाल को प्रदेश सरकार ने वर्ष 2000 में पिछड़ी जाति का दर्जा दिया था।

उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग की अनुमन्य सूची में क्रम संख्या 1 से 78 तक उप्र में जितनी भी छोटी बड़ी जातियां पिछड़ी जाति में आती है उन सभी जातियों का विस्तृत उल्लेख जैसे अहीर, काछी, कहार, नाई, तेली, कुर्मी, गुर्जर आदि किया गया है। प्रविष्ठ 79 में वैश्य समाज के उपवर्ग गुप्ता (शिवहरे, गुलहरे, पोरवाल, जायसवाल) लिखते हैं, इनको कलाल, कलार, कलवार के अंतर्गत शामिल किया गया है। वर्ष 2000 से इसी आधार पर वैश्य समाज के उक्त उपवर्गो को पिछड़ी जाति का मानकर पूरे प्रदेश में पिछड़ी जाति के जाति प्रमाणपत्र जारी किये जा रहे हैं।

वर्ष 2010-11 में पंचायत चुनाव में कुछ लोगों ने जो चुनाव हार गये गलत तथ्य प्रस्तुत कर वैश्य समाज के उक्त उपवर्गो को पिछड़ा वर्ग में न मानते हुए झूठी शिकायत की, ताकि पिछड़ी जाति के अंतर्गत जीते वैश्य उपवर्ग के लोगों के चुनाव रद हो जायें और दोबारा चुनाव हों।

इसी के चलते इटावा जनपद के दो प्रधानों कामेत के प्रधान राम कुमार गुप्ता तथा गुहानी के प्रधान राजेश कुमार गुप्ता के खिलाफ चुनाव हारे प्रत्याशियों ने झूठी शिकायत दर्ज करायी और इसकी जांच प्रक्रिया अमल में लायी गयी। उक्त प्रधानों ने पिछड़ी जाति का होने के लिए कई साक्ष्य प्रस्तुत किए जैसे तहसील द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र, अपने रिश्तेदारों के जो विभिन्न जनपदों-प्रदेशों में रहते हैं, के पिछड़ी जाति के जाति प्रमाणपत्र, गांव क्षेत्र के लोगों के शपथ पत्र, अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद, इटावा के संरक्षक एवं संस्थापक सदस्य का प्रमाणपत्र आदि प्रस्तुत किये हैं। उन्होंने उक्त जातियों को ओबीसी प्रमाणपत्र जारी कराने की मांग की है।

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