जलकुंभी हटी तो भगहर झील में लौट आए मेहमान परिदे

2008-09 में बाढ़ आने के बाद जलकुंभी से ढक गई झील साइबेरियन पक्षियों ने कर लिया था किनारा

JagranPublish:Mon, 22 Feb 2021 12:21 AM (IST) Updated:Mon, 22 Feb 2021 12:21 AM (IST)
जलकुंभी हटी तो भगहर झील में लौट आए मेहमान परिदे
जलकुंभी हटी तो भगहर झील में लौट आए मेहमान परिदे

बाराबंकी:करीब एक दशक बाद भगहर झील साइबेरियन पक्षियों के कलरव से गूंज रही है। तहसील प्रशासन के प्रयास से हुए श्रमदान से झील में जमा जलकुंभी की सफाई के बाद ऐसा संभव हो सका है। अमूमन सर्द मौसम की दस्तक के साथ ये पक्षी हजारों किमी दूर से झील में आते थे। माना जा रहा है कि अगले वर्ष इन पक्षियों की संख्या में और इजाफा हो सकती है।

वन विभाग के मुताबिक, प्रवासी पक्षियों के इस झुंड में पांच प्रजातियों के करीब 150 विदेशी पक्षी देखे गए। इनमें अधिकांश सिल्ही पक्षी शामिल हैं। इसके अलावा सफेद आंख वाले बतख, लालसर, नीलसर, जलकाक पक्षी भी यहां पहुंचे हैं। फतेहपुर रेंज के क्षेत्रीय वन दारोगा जावेद अंसारी बताते हैं कि विदेशी पक्षियों की गणना की जा रही है।

2008 में रूठ गए थे विदेशी मेहमान : करीब 87 बीघे में फैली भगहर झील का वातावरण साल 2008 तक साइबेरियन पक्षियों के अनुकूल रहा। लेकिन, 2008-09 में आई बाढ़ के साथ नदी नालों की जलकुंभी झील में एकत्र हो गई थी। बाढ़ का पानी खत्म होने के बाद भी झील की सफाई नहीं कराई गई। जलकुंभी का फैलाव बढ़ने के साथ ही साइबेरियन रुठते गए। इसका स्थानीय वन्य जीवों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। एसडीएम राजीव शुक्ला ने कार्यभार संभालने के कुछ दिन बाद निरीक्षण किया और झील की बदहाली को देखते हुए श्रमदान से सफाई कराई।

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'पक्षियों की गिनती का प्रस्ताव बनाया रहा है। संख्या में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। टीले का निर्माण होगा ताकि विदेशी पक्षी पानी से निकलकर स्वच्छ वातावरण में धूप का आनंद ले सके। सुंदरीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। ''

नावेद सिद्दीकी, वन क्षेत्राधिकारी, फतेहपुर।