Startup Idea 2022: दो आइआइटियन ने रोबोटिक्स छोड़ बनाया सब्जी बेचने का स्टार्टअप, टर्नओवर करोड़ में

Startup Idea 2022 वर्ष 2018 में शुरुआत के बाद चार वर्ष में सब्जियों की खेती के व्यापार को बड़ा स्वरूप दे दिया है। इंजीनियर से किसान बने अभय और अमित का लक्ष्य देश में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को उदाहरण प्रस्तुत कर आगे बढ़ाना है।

By Sanjay PokhriyalEdited By: Publish:Thu, 26 May 2022 06:45 PM (IST) Updated:Thu, 26 May 2022 06:54 PM (IST)
Startup Idea 2022: दो आइआइटियन ने रोबोटिक्स छोड़ बनाया सब्जी बेचने का स्टार्टअप, टर्नओवर करोड़ में
Startup Idea 2022: छत पर सब्जी पैदा करने वाले दो दोस्त अभय सिंह और अमित कुमार । फोटो -जागरण

नरेन्द्र शर्मा, जयपुर: Startup Idea 2022 राजस्थान के दो युवाओं ने मल्टीनेशनल कंपनी में लाखों रुपये का पैकेज छोड़कर सब्जियां उगाने और बेचने का स्टार्टअप आरंभ किया और मात्र चार वर्ष में चार करोड़ के वार्षिक टर्नओवर वाली कंपनी बना दी। राजस्थान में चित्तौडग़ढ़ जिले के रावतभाटा निवासी अभय सिंह और श्रीगंगानगर के अमित कुमार आत्मनिर्भरता की मिसाल बने हैं। दोनों ने नौकरी छोड़ जब घर की छत पर बिना मिट्टी और कीटनाशक के सब्जियों की खेती शुरू की तो कोई विश्वास करने को तैयार नहीं था कि ऐसा हो सकता है, लेकिन अब उनसे तमाम युवा प्रेरित हो रहे हैं।

दोनों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) बांबे से पढ़ाई की और रोबोटिक्स के क्षेत्र में शोध कर रहे थे। तभी वर्ष 2015 में वार्षिक पैकेज 15-15 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज पर नौकरी आरंभ की, लेकिन मन तो कृषि में नवाचार पर लगा था। कुछ वर्ष बाद ही दोनों ने सब्जियां उगाने और बेचने का स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय किया और आज राजस्थान के तीन शहरों में 75 लोगों को रोजगार देने के साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल भी बने हैं।

ऐसे पैदा होती है सब्जियां ।

भ्रमण के दौरान आया विचार: वर्ष 2017 तक दोनों ने पुणे, मुंबई बेंगलुरु में अलग-अलग कंपनियों में नौकरी की। पैकेज भी बढ़कर 20 लाख रुपये वार्षिक हो गया। सब ठीक चल रहा था, लेकिन नौकरी और पढ़ाई के दौरान अभय और अमित अलग-अलग राज्यों में घूमे थे तो ग्रोइंग चैंबर्स और पालीहाउस से खेती का विचार प्रबल हुआ। पहले जैविक खेती को परखा, लेकिन फिर तकनीक के साथ ग्रोइंग चैंबर और पालीहाउस वाले माडल पर काम करने का निर्णय किया। सबसे पहले घर की छत पर पालक, भिंडी, टमाटर, लौकी उगाकर कोटा के बाजार में बेचीं। सफलता मिली तो दोनों ने स्टार्टअप 'इकी फूड्स' की शुरुआत कर दी। 

100 पालीहाउस बनाने का लक्ष्य: अभय का कहना है कि उनकी कंपनी ईकी फूड्स का सोच है कि लोगों को शुद्ध आर्गेनिक सब्जियां उपलब्ध करवाई जाए। वर्तमान में दोनों दोस्तों के कोटा, बूंदी और भीलवाड़ा में चार पालीहाउस हैं। इनसे प्रतिवर्ष वह चार करोड़ रुपये कमा लेते हैं। उन्होंने कहा कि घर में छत पर सब्जी उगाने का प्रयोग सफल रहने के बाद सबसे पहले कोटा में भूस्वामी से साझेदारी कर एक एकड़ में पालीहाउस तैयार किया, फिर इसके बाद अन्य जिलों में पालीहाउस बनाए। अब पानीपत, जयपुर और कोटा में पालीहाउस तैयार कर रहे हैं। इस साल के अंत तक 100 पालीहाउस तैयार करने का लक्ष्य है। इस तकनीक में उन्होंने सौर उर्जा व न्यूट्रिशनल वाटर का उपयोग कर पानी व बिजली की खपत को कम कर दिया है। जल्द ही दिल्ली व अन्य राज्यों का रुख करने का इरादा है।

पहले छत और अब खेतों में पाली हाउस बनाया गया है।

एमएनसी को बेचते सब्जियां: पालीहाउस में तैयार सब्जियां देश की कई मल्टीनेशनल कंपनियों को बेची जाती हैं। कुछ उपभोक्ता सीधे भी उनसे सब्जी लेते हैं। अमित ने कहा कि नौकरी छोड़ी तब तक हम दोनों का पैकेज अच्छा हो गया था, लेकिन हमारा मन कृषि व्यापार के क्षेत्र में कुछ नया करने का था। यह काम शुरू करने से पहले देश के कई राज्यों में छह महीने तक घूमे और वहां प्रयोग की जा रही तकनीक का गहनता से अध्ययन किया। इंटरनेट का भी सहारा लिया। अमित ने बताया कि कंपनी का कारोबार सालाना 100 करोड़ तक करने का लक्ष्य है।

पानी की भी होती बचत: इस तकनीक का लाभ यह है कि इसमें पारंपरिक कृषि की तुलना में 80 प्रतिशत तक कम पानी की आवश्यकता होती है। गर्मी हो या सर्दी, पौधों को कोई नुकसान नहीं होता है। आटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम से कार्यालय में बैठकर भी पौधों की देखभाल कर सकते हैं। बस एक बटन दबाना होता है और पौधों में पानी व मिनरल्स पहुंचाए जा सकते है। इसमें फलियां, बैंगन, टमाटर, करेला और मिर्च आदि सब्जियां उगाई जा सकती है।

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