Rajasthan: अशोक गहलोत ने भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रतिनियुक्ति नियमों में संशोधन का किया विरोध

Rajasthan राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (संवर्ग) नियम1954 के नियम छह में (संवर्ग अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति) में प्रस्तावित संशोधनों को रोके जाने का आग्रह किया है।

By Sachin Kumar MishraEdited By: Publish:Fri, 21 Jan 2022 10:44 PM (IST) Updated:Fri, 21 Jan 2022 10:44 PM (IST)
Rajasthan: अशोक गहलोत ने भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रतिनियुक्ति नियमों में संशोधन का किया विरोध
अशोक गहलोत ने भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रतिनियुक्ति नियमों में संशोधन का किया विरोध। फाइल फोटो

जागरण संवााददाता, जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (संवर्ग) नियम,1954 के नियम छह में (संवर्ग अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति) में प्रस्तावित संशोधनों को रोके जाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन हमारे संविधान की सहकारी संघवाद की भावना को प्रभावित करने वाले हैं। इससे केंद्र और राज्य सरकारों के लिए निर्धारित संवैधानिक क्षेत्राधिकार का उल्लंघन होगा। राज्य में पदस्थापित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में निर्भय होकर निष्ठापूर्वक काम करने की भावना में कमी आएगी। गहलोत ने पत्र में कहा कि इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार संबंधित अधिकारी और राज्य सरकार की सहमति के बिना ही केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर बुला सकेगी। संशोधन के कारण संविधान द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति और जन कल्याण के काम करने के राज्य सरकार के प्रयासों को निश्चित तौर पर ठेस पहुंचेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा नियमों में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार ने 20 दिसंबर, 2021 को पत्र भेजकर राज्यों से सलाह मांगी गई थी। इस प्रस्ताव पर सलाह प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान ही केंद्र सरकार द्वारा एक तरफा संशोधन प्रस्तावित कर 12 जनवरी, 2022 को दोबारा सलाह आमंत्रित कर ली है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से राज्यों को अधिकारियों की कमी का सामना करना पड़ेगा। 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में गुरुवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश में तनाव और हिंसा का माहौल है। दरअसल, मोदी ने ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय संस्थान में 'आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर' कार्यक्रम का जब वर्चुअल शुभारंभ किया तो उसमें गहलोत भी आनलाइन जुड़े थे। इस दौरान गहलोत ने कहा कि हमारा देश हमेशा से 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना वाला रहा है, विनोबा भावे ने 'जय जगत' का नारा दिया, लेकिन अब देश में तनाव और हिंसा का माहौल है। इससे छुटकारा मिले, यह हब सबकी इच्छा है। उन्होंने कहा कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही समाज और देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। शांति, सत्य, अंहिसा और भाईचारा यह हमारे मूलमंत्र हैं। इनको मजबूत करने का काम हम सबको मिलकर करना होगा। हमारी धारणा हमेशा से रही है कि जहां शांति होगी, वहां विकास होगा । गहलोत ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल को याद करते हुए कहा कि इन्होंने हमें आजादी दिलाई थी। आज आजादी के 75साल में हम देश को कहां से कहां ले गए। यही वजह है कि पीएम मोदी जब अन्य देशों में जाते हैं, तब उन्हें मान-सम्मान मिलता है। देश ने 75 साल में जो तरक्की की है, उसका लोहा पूरी दुनिया मानती है। उधर, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने गहलोत के संबोधन की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भूल जाते हैं कि कांग्रेस ने 50 साल तक देश को धर्म, जाति, मजहब और पंथ में बांटने काम किया। उन्होंने कहा कि मोदी ने वर्चुअल संबोधन में भारत की ताकत, लोकतंत्र, एकता और देश की प्रगति की कामना की। दूसरी तरफ, गहलोत ने आदतन अपने ही देश के खिलाफ सवाल खड़े किए। पीएम की निंदा की आड़ में वह भूल जाते हैं कि वह देश पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पूनिया ने कहा कि जब कांग्रेस के नेता विश्व मंच पर देश की आलोचना करते हैं तो ऐसा लगाता है कि राहुल गांधी से लेकर गहलोत तक एक ही भाषा बोलते हैं।

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इससे केंद्र एवं राज्य सरकारों के लिए निर्धारित संवैधानिक क्षेत्राधिकार का उल्लंघन होगा और राज्य में पदस्थापित अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों में निर्भय होकर एवं निष्ठापूर्वक कार्य करने की भावना में कमी आएगी। पत्र में कहा है कि इस संशोधन के बाद केन्द्र सरकार संबंधित अधिकारी और राज्य सरकार की सहमति के बिना ही अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर बुला सकेगी। 2/n
- Ashok Gehlot (@gehlotashok) 21 Jan 2022

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हमारे देश के संविधान निर्माताओं ने अखिल भारतीय सेवाओं की संकल्पना जन कल्याण तथा संघवाद की भावना को ध्यान में रखकर की थी। इस संशोधन से लौहपुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा ‘स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया’ बताई गई सेवाएं भविष्य में कमजोर होंगी। संशोधन के कारण संविधान द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति तथा जन कल्याण के लक्ष्यों को अर्जित करने के राज्यों के प्रयासों को निश्चित रूप से ठेस पहुँचेगी। 3/n
- Ashok Gehlot (@gehlotashok) 21 Jan 2022

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