सिद्धू मूसेवाला के भोग पर पिता का दर्द, बेटे की बचपन से अब तक की कहानी की बयां, सुनने वालों के भी छलके आंसू

Sidhu Moosewalas Bhog सिद्धू मूसेवाला के भोग पर पिता बलकौर सिंह ने भी लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उनका दर्द छलका। उन्होंने कहा कि कैसे उन्होंने बेटे सिद्धू मूसेवाला को बचपन में संघर्षों के बीच पाला ।

By Kamlesh BhattEdited By: Publish:Wed, 08 Jun 2022 02:29 PM (IST) Updated:Wed, 08 Jun 2022 03:11 PM (IST)
सिद्धू मूसेवाला के भोग पर पिता का दर्द, बेटे की बचपन से अब तक की कहानी की बयां, सुनने वालों के भी छलके आंसू
सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह की फाइल फोटो।

जागरण संवाददाता, बठिंडा। मानसा की दाना मंडी में पंजाब के चर्चित गायक सिद्धू मूसेवाला का भोग डाला गया। समागम के बाद उनके पिता बलकाैर सिंह ने 10 मिनट तक लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने दिल का दर्द लोगों के सामने रखा। उन्होंने सिद्धू मूसेवाला के बचपन से लेकर जवानी तक के संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने जिस दिन सिद्धू मूसेवाला का कत्ल हुआ, उस 29 मई को मनहूस दिन भी बताया।

बलकौर सिंह ने कहा कि उनको बेटे के जाने के बाद दुख तो बहुत हुआ। मगर लोगों के प्यार ने उनका दुख कम कर दिया है, लेकिन वह अपने बेटे के जाने का दुख सहन नहीं कर पा रहे हैं। कहने को तो बहुत बातें हैं, लेकिन यह सिर्फ परिवार ही समझ सकता है।

उन्होंने गुरु से जोड़ते हुए कहा कि वह अब गुरु के बताए मार्ग पर चलकर अपनी जिंदगी जीने की कोशिश करेंगे,  लेकिन गुरु तो बहुत शक्तिशाली थे। मगर वह उनके जैसे तो नहीं है, पर फिर भी जिंदगी को धीरे-धीरे जरूर चलाएंगे।

उन्होंने कहा कि जब सिद्धू मूसेवाला मानसा के विद्या भारती स्कूल में नर्सरी में दाखिल हुआ था तो वहां पर कोई बस भी नहीं जाती थी। वही उसको स्कूटर पर स्कूल छोड़ने के लिए जाते थे। वह फायर विभाग में नौकरी करते थे। जब सिद्धू दूसरी क्लास में हो गया तो एक दिन कहीं पर आग लग गई और वह अपने बेटे को स्कूल छोड़ने नहीं जा पाए। इसके बाद उन्होंने कहा कि या तो बेटा पढ़ाई करेगा या फिर वह नौकरी कर पाएंगे।

पिता ने कहा कि इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को साइकिल लेकर दिया, जिसके बाद वह 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए हर रोज साइकिल से ही स्कूल जाता। वह तब रोज 24 किलोमीटर साइकिल चलाता था। वह बहुत ही छोटे परिवार के थे। कई बार तो सिद्धू का जेब खर्च भी पूरा नहीं हो पाता था, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाया और लुधियाना के एक कालेज से बेटे ने ग्रेजुएशन की। इसके बाद आईलेट्स कर बाहर चला गया।

पिता बलकौर सिंह ने कहा कि वह अपने जेब के खर्चों को पूरा करने के लिए गाने लिखने लगा। उनके बेटे ने कभी जेब में पर्स नहीं रखा। जब भी पैसों की जरूरत होती थी वह उनसे ही मांगता था। वह घर से निकलने से पहले हर बार अपने माता-पिता के पांव छूता था। गाड़ी में बैठने से पहले भी जब तक उसकी माता उसके कान के नीचे टीका नहीं लगाती थी तो वह घर से नहीं निकलता, जबकि हादसे वाले दिन वह खेत से लौटे थे और उसकी माता गांव में किसी का निधन होने पर शोक के लिए गई थी।

उन्होंने अपने बेटे को साथ चलने के लिए भी बोला, लेकिन सिर्फ 2 मिनट मैं वापस आने का बोलकर वह चला गया। अंत समय में भी वह अपने बेटे के पास नहीं थे।

उन्होंने सरकारों को भी कहा कि वह पंजाब को इस आग से निकाल लें, क्योंकि वह नहीं चाहते कि उनके बेटे की तरह किसी दूसरे का बेटा भी ऐसे ही चला जाए। उनको तो आज तक यह समझ नहीं आया कि उनके बेटे का कसूर क्या है। अगर उनके बेटे की कोई गलती भी थी तो वह पहले हम से बात करता।

उन्होंने अपने बेटे को एक दिन अपने माता-पिता की सौगंध भी दिलाई कि अगर कोई बात है तो वह बता दे। जिस पर उसने कहा कि कोई बात नहीं है। उसका किसी के साथ कोई संबंध नहीं है तो फिर उन्होंने कहा कि अगर कोई बात नहीं है तो हमारे साथ कोई गलत भी नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि अगर उनका बेटा गलत होता तो वह गनमैन भी साथ रखता और प्राइवेट सिक्योरिटी भी रखता। उन्होंने कहा कि बेशक उसके गानों में काफी कंट्रोवर्सी थी, जिससे वह परेशान भी थे, लेकिन कभी किसी के साथ मनमुटाव नहीं था।

उन्होंने कहा कि सिद्धू ने चुनाव लड़ने का भी मन अपने आप ही बनाया था, इसके लिए उसको रोका भी था। मगर अब उनकी जिंदगी में अंधेरा हो गया है। उनका बचपन तो पहले और अब बुढ़ापा बुरे दौर से ही गुजरेगा। यह ऐसा हो रहा है, क्योंकि कभी उनसे कोई पाप हुआ होगा, जिसका परमात्मा उनसे बदला ले रहा है।

अंत में उन्होंने यह कहा कि अगर उनसे कुछ गलत बोला गया हो तो उनको माफ कर दिया जाए। इसके अलावा वह जब तक जी पाएंगे कोशिश करेंगे कि अपने बेटे को लोगों के दिलों में जिंदा रखें। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वह इंटरनेट मीडिया पर उनके बेटे की चिता की जगह को गलत ढंग से न पेश करें।

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