अवैध निर्माण गिराने में रुकावट बननेवालों पर होगी कानूनी कार्रवाई Jalandhar News

हाई कोर्ट के आदेश हैं कि अवैध निर्माण गिराने के दौरान अगर कोई व्यक्ति रुकावट पैदा करता है तो उसके खिलाफ सिविल या क्रिमिनल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए।

By Edited By: Publish:Wed, 01 Jan 2020 10:42 PM (IST) Updated:Thu, 02 Jan 2020 11:11 AM (IST)
अवैध निर्माण गिराने में रुकावट बननेवालों पर होगी कानूनी कार्रवाई Jalandhar News
अवैध निर्माण गिराने में रुकावट बननेवालों पर होगी कानूनी कार्रवाई Jalandhar News

जालंधर, जेएनएन। अवैध कालोनियों और अवैध निर्माण के खिलाफ हाई कोर्ट में दायर आरटीआइ कार्यकर्ता सिमरनजीत सिंह की जनहित याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट की डायरेक्शन के नए तथ्य सामने आए हैं। हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि निगम की टीम जब भी अवैध निर्माण और कब्जे हटाने जाती है तो उन्हें पुलिस प्रोटेक्शन दी जाए और पूरी प्रक्रिया के दौरान पुलिस अफसर और प्रशासनिक अफसर भी साथ रहें।

हाई कोर्ट के यह भी आदेश हैं कि अवैध निर्माण गिराने के दौरान अगर कोई व्यक्ति रुकावट पैदा करता है तो उसके खिलाफ सिविल या क्रिमिनल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। इस दौरान निगम अपनी सुविधा के हिसाब से पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी करवा सकती है। जनहित याचिका पर हाई कोर्ट सख्त है और अवैध निर्माण के लिए तय समय में कार्रवाई के आदेश हैं।

हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 16 जनवरी को होनी है। इससे पहले शहर में अवैध निर्माण पर और भी एक्शन हो सकते हैं। कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट में दायर याचिकाएं खारिज जनहित याचिका के आधार पर जिन अवैध निर्माण पर कार्रवाई होनी है उन जगहों में से कुछ के मालिकों ने भी हाई कोर्ट से कार्रवाई रोकने की अपील की थी। हाई कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की अपील थी कि उनका निर्माण कंपाउंडेबल है और वह जुर्माना देकर अपनी बिल्डिंग मंजूर करवाना चाहते हैं।

हाई कोर्ट ने ये याचिकाएं इस आधार पर खारिज कर दी कि अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। गांव निज्जर में अवैध कालोनी ध्वस्त की जालंधर डवलपमेंट अथॉरिटी की नई चीफ एडमिनिस्ट्रेटर शेना अग्रवाल के आदेश पर जेडीए की टीम ने बिना मंजूरी गांव निज्जर में डवलप की जा रही कालोनी को ध्वस्त कर दिया। सोमवार को तीन कालोनियों पर कार्रवाई की गई थी। इस समय ज्यादातर कालोनियां शहर से बाहर विकसित की जा रही हैं। इन्हें विकसित करने के लिए जेडीए से मंजूरी लेनी होती है लेकिन फीस ज्यादा और शर्तें सख्त होने के कारण कालोनाइजर बिना मंजूरी के ही काम करते हैं।

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