शहरवासियों को 31 तक होल्डिग टैक्स जमा करने के निर्देश

राउरकेला महानगर निगम (आरएमसी) क्षेत्र के सभी मकान मालिकों को होल्डिग टैक्स आगामी-31 जनवरी तक जमा करना होगा।

By JagranEdited By: Publish:Thu, 21 Jan 2021 07:09 AM (IST) Updated:Thu, 21 Jan 2021 07:09 AM (IST)
शहरवासियों को 31 तक होल्डिग टैक्स जमा करने के निर्देश
शहरवासियों को 31 तक होल्डिग टैक्स जमा करने के निर्देश

जागरण संवाददाता, राउरकेला : राउरकेला महानगर निगम (आरएमसी) क्षेत्र के सभी मकान मालिकों को होल्डिग टैक्स आगामी-31 जनवरी तक जमा करना होगा। इस संदर्भ में आरएमसी की ओर से निर्देश जारी करने के साथ ही शहर में वाहन के जरिये इसका प्रचार किया जा रहा है। वर्ष 2019-20 तक का जिन लोगों का होल्डिग टैक्स बकाया है, वे लोग 31 जनवरी तक आरएमसी कार्यालय में आकर अपना बकाया टैक्स जमा करा सकते हैं। आरएमसी कार्यालय आने वाले कर दाताओं को पिछले साल की टैक्स रशीद साथ में लाना होगा। इसके अलावा इस साल 2020-21 का होल्डिग टैक्स भी शहरवासियों को जमा करने के लिए कहा जा रहा है। आरएमसी के होल्डिग टैक्स विभाग के अधिकारी भी विभिन्न वार्ड में घर-घर जाकर टैक्स वसूल रहे है। होल्डिग टैक्स नही जमा करने वाले लोगों के खिलाफ आरएमसी की ओर से कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। चिकित्सक ने रखा अपना पक्ष : अस्वाभाविक मौत पर शव का पोस्टमार्टम किए बगैर परिजनों को सौंपने के मामले में अनुमंडलीय चिकित्सा अधिकारी के कारण बताओ नोटिस पर डा. सरबजीत सिंह ने अपना पक्ष उच्चाधिकारियों के समक्ष रखा है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की की गई है।

शीतलपाड़ा निवासी 36 वर्षीय रंजीत चौधरी की एक जनवरी को संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। पति से झगड़े के बाद पत्नी उदितनगर थाना प्राथमिकी दर्ज कराने आई थी। जब वह घर लौटी तब रंजीत का शव फंदे पर लटका पाया। सूचना मिलने पर वहां पहुंची उदितनगर थाना की पुलिस ने शव जब्त कर पोस्टमार्टम के लिए राउरकेला सरकारी अस्पताल भेजा था। उस दिन ड्यूटी पर डा. सरबजीत सिंह थे। उन्होंने शव का पोस्टमार्टम किए बगैर प्लास्टिक में लपेट कर परिजनों को सौंप दिया। जब लोग शव लेकर घर गए एवं अंतिम संस्कार के लिए खोला तो इसका पता चला। हंगामा के बाद शव को फिर से पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इसकी जानकारी मिलने पर जिला चिकित्सा पदाधिकारी के निर्देश पर अनुमंडलीय चिकित्सा अधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। किस परिस्थिति में ऐसा हुआ है, इसकी सफाई डा. सिंह ने दी है।

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