मुंबई में राज ठाकरे की गुंडागर्दी, मनसे कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीयों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

राज ठाकरे के पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर उत्तर भारतीयों के साथ मारपीट की है।

By Kishor JoshiEdited By: Publish:Wed, 11 Oct 2017 10:09 AM (IST) Updated:Wed, 11 Oct 2017 07:23 PM (IST)
मुंबई में राज ठाकरे की गुंडागर्दी, मनसे कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीयों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
मुंबई में राज ठाकरे की गुंडागर्दी, मनसे कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीयों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

मुंबई (जेएनएन)। महाराष्ट्र उत्तर भारतीयों के साथ मारपीट कर अपनी सियासत की जमीन तैयार करने वाली राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एक बार फिर उत्तर भारतीयों के साथ गुंडागर्दी की है। महाराष्ट्र के सांगली में मनसे के कार्यकर्ताओं का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो लोगों की सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पिटाई कर रहे हैं।

#WATCH MNS workers beat up non-Maharashtrians in Sangli's
MIDC Kupwad demanding preference to local youth for jobs in the area's industries pic.twitter.com/xtMRAHWbSD

— ANI (@ANI) October 11, 2017

मंगलवार को एमएनएस के कार्यकर्ता हाथ में लाठी लेकर सड़कों पर उतरे और सामने जो भी उत्तर भारतीय दिखा उसकी बेरहमी से पिटाई करने लगे। यहां तक कि लोगों की डंडे और लात-घूसों से पिटाई की गई। दरअसल राज ठाकरे की पार्टी ने सांगली में 'लाठी चलाओ भैय्या हटाओ' नाम से पर-प्रांतीय हटाओ मुहिम शुरू की है। मनसे का आरोप है कि सांगली स्थित एमआईडीसी में पर-प्रांतीयों को नौकरी दी जा रही है। यहां 80 फीसदी नौकरी सिर्फ और सिर्फ मराठी लोगों को दी जाए।

मराठी मानुष के मुद्दे पर अांदोलन 

आपको बता दें कि फरवरी 2008 में राज ठाकरे ने कथित उत्तर भारतीयों के खिलाफ एक आंदोलन का नेतृत्व किया। 2009 में एग्जाम देने मुंबई आए हिंदी भाषी उम्मीदवारों की पिटाई कर मनसे सुर्खियों में आई थी। ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने हाल ही में गुजराती भाषियों के खिलाफ भी आंदोलन छेड़ा था। इसके तहत मनसे कार्यकर्ताओं ने दादर और माहिम इलाके में कई दुकानों के गुजराती भाषा में लगे बोर्ड जबरदस्ती हटा दिए। पुलिस ने बोर्ड हटाने वाले मनसे के सात कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया।

2008 में महाराष्ट्र सरकार को SC का नोटिस
उत्तर भारतीयों पर हो रहे हमलों के मद्देनज़र सर्वोच्च न्यायालय ने 2008 में महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस प्रदेश में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा गैर मराठियों और उत्तर भारतीयों के खिलाफ चलाए जा रही मुहिम पर रोक लगाने में सरकार की कथित नाकामी के चलते दिया गया था। उक्त नोटिस तत्कालिक मुख्य न्यायाधीश के.जी.बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली न्यायपीठ के द्वारा जारी किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में याचिकाकर्ता सलेक चंद जैन के वकील सुग्रीव दुबे ने कहा था कि मनसे नेता राज ठाकरे के बयानों से भड़की भीड़ ने जब दो उत्तर भारतीय डॉक्टरों अजय और विजय दुबे की हत्या कर दी तब भी राज्य सरकार ने जरूरी कदम नहीं उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि मनसे द्वारा किये गए हमलों पर देशभर में तीव्र प्रतिक्रियाएं हुईं, जिससे देश की अखंडता और एकता पर खतरा पैदा हो गया है।

केंद्र सरकार पर भी लगा था अारोप

याचिका में उन्होंने केंद्र सरकार पर भी आरोप लगाया कि वो भी इन घटनाओं की मूक दर्शक बनी रही और संविधान की धारा 355 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग कर राज्य सरकार को इंस संवैधानिक संकट से निपटने के लिए जरूरी दिशा निर्देश नहीं दिये।

कोर्ट से फटकार के बाद राज ठाकरे को मिली थी सशर्त जमानत

उत्तर भारतीयों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद राज ठाकरे को गिरफ्तार कर सशर्त जमानत मिली थी। विक्रोली मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के जमानत के आदेश के मुताबिक "राज कभी भी सामाजिक द्वेष फैलाने वाला न तो भाषण देंगे और न ही लेख लिखेंगे। एक बॉन्ड पेपर भर कर ये आश्वस्त करना होगा कि वो कभी भी प्रांतवाद को लेकर जहर बुझी भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे और न ही भीड़ या एक से अधिक संगठित दल को उकसाने की कोशिश करेंगे।"

खुद राज ठाकरे के वकील ने इस आदेश की तस्दीक की थी। राज ठाकरे के वकील अखिलेश चौबे ने कहा था कि विक्रोली कोर्ट ने राज को ये एहतीयात बरतने को कहा था कि वो पुलिस को मदद करें और सामाजिक द्वेष ना फैलाएं।

2008 में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा
फरवरी 2008 में राज ठाकरे ने यूपी और बिहारी के लोगों के साथ मनसे के आंदोलन का नेतृत्व किया था। शिवाजी पार्क की एक रैली में राज ने चेतावनी दी, अगर मुंबई और महाराष्ट्र में इन लोगों की दादागिरी जारी रही तो उन्हें महानगर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा। आश्चर्यजनक रूप से देश की दोनों राष्ट्रीय पार्टियों ने कांग्रेस और भाजपा उसकी इस गुंडागर्दी पर मूक बनी रहीं। 

किनी हत्या के मामले से बरी
जुलाई 1996 में पुणे के एक सिनेमा थिएटर में रमेश किनी मरा पाया गया था। किनी मध्य मुंबई में लक्ष्मीकांत शाह के एक खस्ताहाल मकान में किरायेदार था, मकान मालिक उसे घर से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था। यह शाह राज ठाकरे के बचपन का दोस्त हुआ करता था। आरोप है राज और उनके आदमियों ने रमेश का कत्ल घर खाली करवाने के लिए किया था। बाद में इस मामले की जांच सीबीआई से कराई गयी थी, लेकिन सीबीआई ने इस मामले को आत्महत्या बता कर खारिज कर दिया।

कोहिनूर मिल विवाद
21 जुलाई 2005 को एक पांच एकड़ के जमीन पर कोहिनूर मिल नंबर 3 मुंबई के दादर में शिवसेना के पार्टी मुख्यालय, सेना भवन, के करीब सड़क के पार स्थित है, इसे राज और उन्मेष जोशी (महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी के बेटे) ने 421 करोड़ रुपये में खरीदा था। राकांपा नेता सचिन अहीर ने कोहिनूर मिल की जमीन की बिक्री को लेकर यह कह कर आपत्ति की कि इसके लिए चालीस कंपनियों ने बोली लगाईं थी, लेकिन उनमें से अभी तक केवल तीन को सूचीबद्ध किया गया। पारदर्शिता का अभाव होने की बात कह कर उन्होंने फिर से बोली की मांग की थी।

अमिताभ बच्चन के साथ टकराव

राज ठाकरे ने फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन को महाराष्ट्र में उनकी फिल्मों के रिलीज पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी।

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