एफएटीएफ की काली सूची में डालने के लिए पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने पाक की करतूतों को किया उजागर

पाकिस्तान को एफएटीएफ की काली सूची में डालने के लिए पेरिस में संगठन की बिल्डिंग के सामने जोरदार प्रदर्शन किया गया। आतंकी फंडिंग और आतंकवादियों के खिलाफ वास्तविक रूप से कार्रवाई न होने पर पाकिस्तान को काली सूची में डाले जाने की मांग कर रहे हैं।

By Bhupendra SinghEdited By: Publish:Tue, 23 Feb 2021 07:52 PM (IST) Updated:Tue, 23 Feb 2021 07:52 PM (IST)
एफएटीएफ की काली सूची में डालने के लिए पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने पाक की करतूतों को किया उजागर
पाक एफएटीएफ की चिंता करे बगैर आतंकी कारवाईयों में लिप्त।

नई दिल्ली, एएनआइ। पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) की काली सूची में डालने के लिए पेरिस में संगठन की बिल्डिंग के सामने जोरदार प्रदर्शन किया गया। पाकिस्तान का एफएटीएफ ने ग्रे लिस्ट में नाम डाल रखा है। आतंकी फंडिंग और आतंकवादियों के खिलाफ वास्तविक रूप से कार्रवाई न होने पर उसे काली सूची में डाले जाने की मांग की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा- पाक एफएटीएफ की चिंता करे बगैर आतंकी कारवाईयों में लिप्त

पेरिस में यह प्रदर्शन पाकिस्तान के निर्वासित पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और उइगरों ने किया। यहां प्रदर्शन करने वालों का कहना था कि पाकिस्तान एफएटीएफ की चिंता करे बगैर आतंकी कारवाईयों में लिप्त है। प्रदर्शन करने वालों में मूल रूप से पाक के बलूचिस्तान, पख्तून के साथ ही तिब्बत, हांगकांग क्षेत्र के रहने वालों के साथ ही उइगर मुस्लिम भी थे।

एफएटीएफ के सदस्य चीन और पाकिस्तान के प्रभाव में आए बिना करें कार्रवाई 

इन सभी ने अब चीन और पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करने के लिए एक मोर्चा बनाया है। इन सभी ने मांग की है कि पाकिस्तान को अब उसके सभी काले कारनामों के लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम यह प्रदर्शन इसलिये कर रहे हैं कि एफएटीएफ के सदस्य चीन और पाकिस्तान के प्रभाव में आए बिना कार्रवाई करें।

पाकिस्तान के एफएटीएफ की 'ग्रे लिस्ट' से बाहर निकलने की उम्मीद नहीं

पाकिस्तान के एफएटीएफ की 'ग्रे लिस्ट' से बाहर निकलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि कुछ यूरोपीय देशों ने यह रुख अपनाया है कि इस्लामाबाद ने इसके द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के सभी बिंदुओं को पूरी तरह से लागू नहीं किया है। एफएटीएफ की धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगरानी के लिए पूर्ण बैठक 22 फरवरी से पेरिस में हो रही है। पेरिस स्थित वित्तीय कार्यबल (एफएटीएफ) ने जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए कार्ययोजना को लागू करने के लिए कहा था, लेकिन बाद में कोविड-19 महामारी के कारण यह समयसीमा बढ़ा दी गई थी।

एफएटीएफ की 25 फरवरी तक चलेगी पेरिस में बैठक

एफएटीएफ का पूर्ण सत्र 22 फरवरी से 25 फरवरी तक पेरिस में आयोजित हो रहा है जिसमें पाकिस्तान सहित ‘ग्रे सूची’ के विभिन्न देशों के मामलों पर विचार किया जा रहा हैै और बैठक के समापन पर इस पर निर्णय लिया जाएगा। अक्टूबर 2020 में आयोजित अंतिम पूर्णसत्र में, एफएटीएफ ने निष्कर्ष निकाला था कि पाकिस्तान  फरवरी 2021 तक अपनी 'ग्रे लिस्ट' में जारी रहेगा क्योंकि यह वैश्विक धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण निगरानी के 27 में से छह दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा है। उसके अनुसार इसमें भारत के दो सबसे वांछित आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है।

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