Indian Railways ने छेड़ी स्टेशनों को पर्यावरण अनुकूल बनाने की मुहिम, सभी स्टेशनों को लिखा पत्र

इस संबंध में रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनों को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि एनजीटी ने रेलवे स्टेशनों से पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली में संबंधित आइएसओ

By Dhyanendra SinghEdited By: Publish:Sat, 22 Feb 2020 10:43 PM (IST) Updated:Sat, 22 Feb 2020 11:05 PM (IST)
Indian Railways ने छेड़ी स्टेशनों को पर्यावरण अनुकूल बनाने की मुहिम, सभी स्टेशनों को लिखा पत्र
Indian Railways ने छेड़ी स्टेशनों को पर्यावरण अनुकूल बनाने की मुहिम, सभी स्टेशनों को लिखा पत्र

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों पर पर्यावरण संरक्षण के आधे-अधूरे उपायों को लेकर एनजीटी की नाराजगी झेलने के बाद अब रेल मंत्रालय ने अपने सभी प्रमुख स्टेशनों को पर्यावरण प्रमाणित कराने की ठानी है। इसके लिए सभी जोनों को चुनिंदा स्टेशनों का पर्यावरणीय ऑडिट कराने तथा आइएसओ-14001 प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए कहा गया है।

इस संबंध में रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनों को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि एनजीटी ने रेलवे स्टेशनों से पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली में संबंधित आइएसओ 14001 प्रमाणपत्र हासिल करने का आदेश दिया है। इसके तहत शुरू में 37 स्टेशनों के प्रमाणत्र हासिल किए जाने हैं। जबकि उसके बाद सभी प्रमुख 720 स्टेशनों के प्रमाणपत्र हासिल करने की कवायद की जानी है।

कंसल्टिंग एजेंसियों की ले रहे सेवाएं

फिलहाल सभी जोन इस काम के लिए कंसल्टिंग एजेंसियों की सेवाएं लेने में जुटे हुए हैं। उन्हें बोर्ड को ये बताना चाहिए कि प्रत्येक स्टेशन के लिए आइएसओ प्रमाणपत्र हासिल करने में अनुमानत: औसतन कितनी धनराशि खर्च होगी। तथा खर्च होने वाली राशि स्टेशनों की श्रेणी के अनुसार है या इसे यूं ही तय कर लिया गया है। इस काम के लिए हायर की गई एजेंसियों से क्या क्या काम लिया जा रहा है इसका ब्यौरा भी बोर्ड को दिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि दिसंबर में हुई सुनवाई में एनजीटी ने कहा था कि चूंकि रेलवे स्टेशनों में अनेक प्रदूषणकारक गतिविधियां होती रहती हैं, लिहाजा स्टेशन भी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के दायरे में आते हैं और रेलवे को इन गतिविधियों के लिए संबंधित पर्यावरण एजेंसियों से अनुमति लेनी चाहिए।

एनजीटी ने रेलवे को दिए थे आदेश

इसी के साथ एनजीटी ने रेलवे को वायु स्टेशनों पर वायु (प्रदूषण से बचाव एवं नियंत्रण), अधिनियम, 1981 तथा जल (प्रदूषण से बचाव एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों को लागू करने के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझावों पर अमल करने तथा सभी प्रमुख स्टेशनों को स्वच्छ बनाने की कार्ययोजना लागू करने के निर्देश भी रेलवे को दिए थे। एनजीटी ने फैजाबाद स्टेशन का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां का रेलवे प्रशासन अभी तक कचरा उठाने और निपटाने की जगहें तक नहीं तलाश पाया है।

एनजीटी के अनुसार वायु एवं जल प्रदूषण से बचाव एवं संरक्षण से जुड़े उक्त कानूनों में ठोस कचरे, प्लास्टिक कचरे, खतरनाक कचरे, बायो-मेडिकल कचरे, भवन निर्माण से निकलने वाले कचरे के अलावा इलेक्ट्रानिक कचरे को एकत्र करने एवं निपटाए जाने के स्पष्ट प्रावधान हैं। रेलवे इनसे अछूती नहीं है। रेलवे में कचरा उत्पन्न करने वाली प्रत्येक यूनिट, विभाग तथा प्रतिष्ठान पर ये नियम लागू होते हैं।

chat bot
आपका साथी