क्लर्क भर्ती रद करने की मांग खारिज, चयनित उम्मीदवारों का स्पीकर के हलके से होना रद करने का आधार नहीं

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा विधानसभा में सात साल पहले भर्ती किए गए दर्जनों लिपिकों की भर्ती को रद करने की मांग को खारिज कर दिया है।

By Kamlesh BhattEdited By: Publish:Tue, 02 Jun 2020 10:22 AM (IST) Updated:Tue, 02 Jun 2020 10:22 AM (IST)
क्लर्क भर्ती रद करने की मांग खारिज, चयनित उम्मीदवारों का स्पीकर के हलके से होना रद करने का आधार नहीं
क्लर्क भर्ती रद करने की मांग खारिज, चयनित उम्मीदवारों का स्पीकर के हलके से होना रद करने का आधार नहीं

जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा विधानसभा में सात साल पहले भर्ती किए गए दर्जनों लिपिकों की भर्ती को रद करने की मांग को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट की जस्टिस रितू बाहरी ने अपने आदेश में साफ कहा कि चयनित उम्मीदवारों का विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्र का होना भर्ती रद करने का आधार नहीं हो सकता। मामले में पूजा सचदेवा व अन्य ने अलग-अलग याचिका दायर कर विधानसभा में क्लर्क की भर्ती के लिए जारी 20 मई 2014 के परिणाम को रद करने की मांग की थी।

याचिका में बेंच को बताया गया कि हरियाणा विधानसभा में क्लर्क के 12 पद के लिए 16 अप्रैल 2013 को विज्ञापन जारी किया गया था। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से पता चला कि साक्षात्कार के लिए 2636 उम्मीदवारों ने भाग लिया था। जब फाइनल परिणाम घोषित किया गया तो 12 पदों की जगह 27 उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया। इसमें से 22 चयनित उम्मीदवार वे है जो विधानसभा में पहले ही 89 दिन के तहत काम कर रहे हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि अधिकतर चयनित उम्मीदवार तत्कालीन विधानसभा या उनसे पूर्व के विधानसभा अध्यक्ष के हलकों से हैं। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार चयनित 17 उम्मीदवार तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा के हलके गन्नौर से हैं, जबकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रघुबीर सिंह कादयान के हलके बेरी से पांच उम्मीदवार, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एचएस चट्ठा के हलके पिहोवा से तीन लोगों का चयन किया गया। एक उम्मीदवार स्पीकर के निजी सचिव का रिश्तेदार है, जबकि एक अन्य करनाल से है जहां पर स्पीकर का स्थाई निवास है।

मामले की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने विधानसभा से जवाब व रिकार्ड मांगा तो कोर्ट को बताया गया कि इस भर्ती में कुल 19 नियमित पदों के लिए भर्ती की गई थी, जबकि आठ पद अस्थाई थे जिनकी बाद में सेवा समाप्त कर दी गई। वर्तमान में केवल पंद्रह लिपिक काम कर रहे है। भर्ती में यह साफ था कि पदों की संख्या घटाई व बढ़ाई जा सकती है।

हाई कोर्ट ने जब भर्ती का रिकार्ड देखा तो पाया कि साक्षात्कार के लिए कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी सदस्यों के खिलाफ कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, जिससे साबित होता है कि चयन कमेटी ने दुर्भावना से काम नहीं किया है। हर पेज में साक्षात्कार कमेटी के सदस्य व उम्मीदवार के हस्ताक्षर है। कोर्ट को कहीं भी यह नजर नहीं आ रहा है कि साक्षात्कार कमेटी ने कहीं पक्षपात किया है। इस तरह की परिस्थितियों में रंजन कुमार के मामले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है। इस लिए हाई कोर्ट इस भर्ती को रद नहीं कर सकता और याचिका को खारिज करता है।

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