पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय अपने पास रखा था

भारत रत्न अटल जी देश के किसानों से बहुत प्यार करते थे। वह किसानों के सच्चे हितैषी थे। वह देश के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 13 महीने की अपनी सरकार में कृषि मंत्रालय अपने पास रखा था। कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। जिससे किसानों की हालत बेहतर हुई। वह मानते थे कि देश का विकास तभी होगा जब किसान समृद्ध होंगे। वह किसान को देश की असली ताकत समझते थे। उनका जाना किसानों के सच्चे हितैषी का भी जाना है।

By JagranEdited By: Publish:Sat, 18 Aug 2018 06:54 PM (IST) Updated:Sat, 18 Aug 2018 06:54 PM (IST)
पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय अपने पास रखा था
पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय अपने पास रखा था

आदित्य राज, गुरुग्राम

भारत रत्न अटल जी देश के किसानों से बहुत प्यार करते थे। वह किसानों के सच्चे हितैषी थे। वह देश के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 13 महीने की अपनी सरकार में कृषि मंत्रालय अपने पास रखा था। कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। जिससे किसानों की हालत बेहतर हुई। वह मानते थे कि देश का विकास तभी होगा जब किसान समृद्ध होंगे। वह किसान को देश की असली ताकत समझते थे। उनका जाना किसानों के सच्चे हितैषी का भी जाना है।

ये संस्मरण अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में दूसरी बार केंद्र में बनी सरकार के दौरान कृषि एवं जल संसाधन राज्यमंत्री रहे सोमपाल शास्त्री ने दैनिक जागरण से बातचीत में सुनाए। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से लेकर अब तक किसी भी प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय अपने पास नहीं रखा। अटल जी ने 13 महीने की अपनी सरकार के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इनमें से सबसे ऊपर फसलों के न्यूनतम मूल्य में अधिकतम बढ़ोत्तरी का था। उनसे पहले किसी सरकार ने लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी नहीं की थी। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के बारे में निर्णय लिया था। चीनी मीलों को लाइसेंसी प्रणाली से मुक्त करने के बारे में प्रयास शुरू किए थे। किसानों को क्रेडिट कार्ड देने के बारे में प्रयास शुरू किए थे। इनके अलावा भी कई विषयों पर अटल ली ने कार्य किया था। सौभाग्य है कि उन्हें अटल जी के नीचे काम करने का मौका मिला।

किसी को कम नहीं आंकते थे अटल जी

पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री कहते हैं कि अटल जी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी को कम नहीं आंकते थे। हर किसी की पूरी बात सुनते थे। यही वजह रही कि उनका विपक्षी भी सम्मान करते थे। उन्होंने कभी भी किसी का अपमान नहीं किया। वह कहा करते थे कि यदि कोई किसी को अपमानित करता है, इससे साफ है कि अपमानित करने वाला व्यक्ति सम्मानित नहीं हो सकता। गठबंधन की सरकार सफलतापूर्वक चलाया। वह अपनी सरकार में मंत्रियों के ऊपर दबाव नहीं बनाते थे। सभी को खुलकर काम करने की इजाजत थी। जहां उन्हें लगता था कि दिशा-निर्देश की आवश्यकता है, वहीं टोकते थे। सही मायने में वह आदर्श पुरुष थे। उनकी कमी देश को हमेशा खलती रहेगी।

चुनाव हारने के बाद योजना आयोग का सदस्य बनाया

सोमपाल शास्त्री कहते हैं कि चुनाव हारने के बाद वह दिल्ली से गुरुग्राम चले आए थे। अटल जी ने एक महीने बाद ही उन्हें बुलाया और योजना आयोग का सदस्य बना दिया। जब धन्यवाद करने के लिए गया तो उन्होंने कहा कि परिवार में धन्यवाद नहीं चलता है। इस शब्द का इस्तेमाल कहीं और कर लेना। ऐसा विराट व्यक्तित्व था अटल जी का। वह महान विभूति थे। वैसी शख्सियत धरती पर कभी-कभी पैदा होते हैं।

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