कॉल और वाट्सएप मैसेज से मिलेगी डाक्टर से अप्वाइंटमेंट

एक्स सर्विसमेन कंट्रीब्यूट्री हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) में अब घर बैठे पूर्व सैनिक इलाज के लिए अपाइंटमेंट ले सकेंगे। वहीं मरीजों को जांचने की लिमिट भी रखी गई है।

By JagranEdited By: Publish:Fri, 24 Jul 2020 10:00 AM (IST) Updated:Fri, 24 Jul 2020 10:00 AM (IST)
कॉल और वाट्सएप मैसेज से मिलेगी डाक्टर से अप्वाइंटमेंट
कॉल और वाट्सएप मैसेज से मिलेगी डाक्टर से अप्वाइंटमेंट

जागरण संवाददाता, अंबाला : एक्स सर्विसमेन कंट्रीब्यूट्री हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) में अब घर बैठे पूर्व सैनिक इलाज के लिए अपाइंटमेंट ले सकेंगे। वहीं मरीजों को जांचने की लिमिट भी रखी गई है। हालांकि इमरजेंसी केस में मरीजों को तुरंत अटेंड किया जाएगा। ऐसा होने से पूर्व सैनिकों को लाइन में लगने से जहां निजात मिलेगी वहीं घर बैठे नंबर ले सकेंगे। नंबर लगाने के लिए मोबाइल नंबर जारी किया गया है। इस पर कॉल करके या फिर वाट्सएप मैसेज भेजकर डाक्टर से अपाइंटमेंट ले सकेंगे। अंबाला कैंट रेस कोर्स रोड पर स्थित ईसीएचएस से करीब 50 हजार पूर्व सैनिक व उनके आश्रित जुड़े हैं, जो अपना इलाज करवाने के लिए आते हैं।

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यह है व्यवस्था

ईसीएचएस में अब तक व्यवस्था थी कि सुबह ही नंबर अलाट किए जाते थे। इसके बाद उसी हिसाब से डाक्टरों से अपाइंटमेंट मौके पर मिलती और मरीज इलाज करवाकर घर चला जाता। इस सिस्टम में कुछ खामियां थीं, जिसे लेकर पूर्व सैनिक भी परेशान रहते थे। अब इलाज करवाने के लिए आने वाले पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को घर बैठे ही मोबाइल से अपाइंटमेंट मिल जाएगी। यह अपाइंटमेंट एक सप्ताह के भीतर पूरी की जाएगी। इसके लिए मोबाइल नंबर 9416221207 कॉल करनी होगी या फिर वाट्सएप मैसेज भेजना होगा।

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दवाइयों का भी है टोटा

ईसीएचएस से ही पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को दवाइयां भी दी जाती हैं, लेकिन यहां पर अक्सर मरीजों को दवाइयों के लिए भटकना पड़ता है। इसके लिए या तो मरीजों को सेना अस्पताल का रुख करना होता है या फिर बाजार से यह खरीदनी पड़ती हैं।

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फोटो 7 व्यवस्था को लेकर विरोध भी शुरू

इस व्यवस्था को लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। एक्स सर्विसमेन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान रिटायर्ड सूबेदार अतर सिंह मुलतानी का कहना है कि ईसीएचएस में नित नए नियम लागू किए जाते हैं। एक व्यवस्था को छोड़कर दूसरी व्यवस्था बना दी जाती है। नई व्यवस्था का भी कोई फायदा होने वाला नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण दवाओं की कमी है, जिसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नई व्यवस्था से पूर्व सैनिकों की परेशानी बढ़ेगी।

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