पुण्यतिथि: मरने के बाद 'दुल्हन' की तरह सजायी गयीं स्मिता पाटिल!

राजबब्बर के साथ रिश्ता भी कुछ बहुत सहज नहीं रह गया था। स्मिता अपने आखिरी दिनों में बहुत अकेला महसूस करती थीं।

By Hirendra JEdited By: Publish:Tue, 13 Dec 2016 01:43 PM (IST) Updated:Tue, 13 Dec 2016 02:49 PM (IST)
पुण्यतिथि: मरने के बाद 'दुल्हन' की तरह सजायी गयीं स्मिता पाटिल!

मुंबई। आज स्मिता पाटिल की पुण्य तिथि है। आज भी जब कभी भारतीय फ़िल्मों के संवेदनशील कलाकारों का ज़िक्र होता है तो उनमें स्मिता पाटिल का नाम ज़रूर शुमार होता है। सिनेमा के आकाश पर स्मिता एक ऐसे तारे की तरह हैं जिन्होंने अपने सशक्त अभिनय से मनोरंजन सिनेमा के साथ-साथ व्यावसायिक सिनेमा में भी दर्शको के बीच अपनी खास पहचान बनायीं।

7 अक्टूबर 1955 को पुणे शहर में जन्मीं स्मिता ने अपनी स्कूल की पढ़ाई महाराष्ट्र में की। पिता शिवाजी राय पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मिनिस्टर थे जबकि उनकी मां समाज सेविका थी। लगभग दो दशक तक अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाने वाली इस अभिनेत्री ने महज 31 वर्ष की उम्र में 13 दिसंबर 1986 को इस दुनिया को अलविदा कहा। स्मिता जब सिर्फ 16 साल की थीं तभी न्यूज रीडर की नौकरी करने लगी थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात जाने माने निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल से हुई और बेनेगल ने स्मिता की प्रतिभा को पहचान कर अपनी फ़िल्म 'चरण दास चोर' में एक छोटी सी भूमिका निभाने का अवसर दिया। आपको बता दें, ख़बर पढने के लिए स्मिता दूरदर्शन में जींस पहन कर जाया करती थीं लेकिन जब उन्हें न्यूज पढ़ना होता तो वो जींस के ऊपर से ही साड़ी लपेट लेतीं। महज दस साल के अपने करियर में स्मिता ने वो मुकाम बना लिया है कि जब तक सिनेमा पर बात होगी उनका जिक्र ज़रूर आएगा।

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अस्सी के दशक में स्मिता ने व्यावसायिक सिनेमा की ओर भी अपना रूख कर लिया। इस दौरान उन्हें सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ 'नमक हलाल' और 'शक्ति' में काम करने का अवसर मिला जिसकी सफलता के बाद स्मिता पाटिल को व्यावसायिक सिनेमा में भी स्थापित कर दिया। 1985 में स्मिता पाटिल की फ़िल्म 'मिर्च मसाला' प्रदर्शित हुई। इसी साल भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुये स्मिता पदमश्री से सम्मानित की गयी। स्मिता पाटिल की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उनकी बढ़ती शोहरत के साथ-साथ विवादों में भी उनका नाम दूर तक फैला था। स्मिता पाटिल पर घर तोड़ने का भी आरोप लगाया जाता रहा है।

गौरतलब है कि जब राज बब्बर के साथ उनकी नजदीकियां कुछ ज्यादा बढ़ गई थीं तब मीडिया ने उनकी आलोचना करना शुरू कर दिया था। क्योंकि राज की शादी नादिरा से हो चुकी थी और वो स्मिता के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चला रहे थे। ऐसे में लोगों को नादिरा से सहानुभूति हो गई थी और स्मिता को काफी भला-बुरा कहा जा रहा था। राज बब्बर के दो बेटे हैं। उनकी पहली पत्नी नादिरा से आर्य बब्बर और स्मिता से प्रतीक बब्बर।

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स्मिता की जीवनी लिखने वाली लेखिका मैथिलि राव अपनी किताब में कहती हैं, "स्मिता पाटिल की मां स्मिता और राज बब्बर के रिश्ते के ख़िलाफ़ थीं। वो कहती थीं कि महिलाओं के अधिकार के लिए लड़ने वाली स्मिता किसी और का घर कैसे तोड़ सकती है। लेकिन, राज बब्बर से अपने रिश्ते को लेकर स्मिता ने मां की भी नहीं सुनी।" आपको बता दें, प्रतीक के जन्म के कुछ घंटों बाद ही 13 दिसंबर 1986 को स्मिता का निधन हो गया।

मैथिलि राव कहती हैं, "स्मिता को वायरल इन्फेक्शन की वजह से ब्रेन इन्फेक्शन हुआ था। प्रतीक के पैदा होने के बाद वो घर आ गई थीं। वो बहुत जल्द हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार नहीं होती थीं, कहती थीं कि मैं अपने बेटे को छोड़कर हॉस्पिटल नही जाऊंगी। लेकिन जब ये इन्फेक्शन बहुत बढ़ गया तो उन्हें जसलोक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। स्मिता के अंग एक के बाद एक फ़ेल होते चले गए।" हालांकि राजबब्बर के साथ रिश्ता भी कुछ बहुत सहज नहीं रह गया था। स्मिता अपने आखिरी दिनों में बहुत अकेला महसूस करती थीं।

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स्मिता पाटिल की एक आखिरी इच्छा थी। उनके मेक अप आर्टिस्ट दीपक सावंत के मुताबिक, "स्मिता कहा करती थीं कि दीपक जब मैं मर जाउंगी तो मुझे सुहागन की तरह तैयार करना।" मरने के बाद उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक़, स्मिता के शव का सुहागन की तरह मेकअप किया गया।

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