यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 11, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न की बिक्री पर लगे प्रतिबंध
बुलेट मोटरसाइकिल से लेकर अन्य दो पहिया वाहनों में कानफोड़ू आवाज निकालने वाले विभिन्न प्रकार के साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न के ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : बुलेट मोटरसाइकिल से लेकर अन्य दोपहिया वाहनों में कानफोड़ू आवाज निकालने वाले विभिन्न प्रकार के साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न के साथ चार पहिया वाहनों में लगने वाले वूफर समेत अन्य ध्वनि उपकरणों के उत्पादन व बिक्री का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। जस्टिस फॉर राइट फाउंडेशन और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के एक छात्र की तरफ से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर ऐसे उत्पादों के उत्पादन व बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा है।
गैर सरकारी संगठन के संस्थापक व याचिकाकर्ता सत्यम सिंह राजपूत और डीयू के छात्र प्रतीक शर्मा ने अधिवक्ता हरप्रीत सिंह होरा के माध्यम से जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में विशेष तौर पर मॉडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न, मल्टी टोंड हॉर्न, ध्वनि उपकरण और वूफर के उत्पादन व बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिका के अनुसार, ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल पर तो प्रतिबंध है, लेकिन उत्पादन व बिक्री पर रोक नहीं है। कार में लगे वूफर की आवाज को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन दो पहिया वाहन में लगे प्रेशर हॉर्न या मॉडिफाइड साइलेंसर के इस्तेमाल पर चालक का नियंत्रण नहीं होता।
उन्होंने कहा कि पुलिस मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 190 के तहत चालान तो कर देती है, लेकिन ऐसे उपकरणों को नहीं हटाती। याचिका में मांग की गई कि दिल्ली पुलिस को वाहनों में ऐसे उपकरण हटाने के निर्देश दिए जाएं। वाहनों के शोर से जीना मुहाल
याचिका में कहा गया कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव प्रचार के दौरान सुबह से देर रात तक दर्जनों मोटर साइकिल व वाहन प्रेशर हॉर्न, मॉडिफाइड साइलेंसर व वूफर से ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं। सड़कों पर बड़ी संख्या में एक साथ वाहनों के निकलने के कारण लोग परेशान हो रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
