मुनाफाखोरों की शिकायत करना होगा आसान

जीएसटी में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को न देने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई के लिए बने एंटी प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी के तंत्र के शुरुआती निराशाजनक प्रदर्शन को देखकर सरकार अब इसमें सुधार करने में जुट गयी है

By Shubham ShankdharEdited By: Publish:Fri, 02 Mar 2018 04:23 PM (IST) Updated:Fri, 02 Mar 2018 05:23 PM (IST)
मुनाफाखोरों की शिकायत करना होगा आसान
मुनाफाखोरों की शिकायत करना होगा आसान

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। जीएसटी में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को न देने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई के लिए बने एंटी प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी के तंत्र के शुरुआती निराशाजनक प्रदर्शन को देखकर सरकार अब इसमें सुधार करने में जुट गयी है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए एंटी प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी जल्द ही उस फार्म को सरल बनाने जा रही है जिसे भरकर विक्रेता के विरुद्ध शिकायत की जाती है। माना जा रहा है कि अथॉरिटी में शिकायत करने का सरल फार्म जल्द ही आ जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक अथॉरिटी यह कदम इसलिए उठा रही है क्योंकि मुनाफाखोरी रोकने के लिए बनाए गए इस तंत्र का शुरुआती प्रदर्शन अपेक्षानुरूप नहीं रहा है। मसलन इसके तहत अब देशभर में करीब 150 शिकायतें ही आई हैं। ये शिकायतें भी मात्र छह राज्यों से मिली हैं जबकि दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से अब तक एक भी शिकायत नहीं आई है।

सूत्रों का कहना है कि अथॉरिटी के अध्यक्ष बी. एन. शर्मा ने स्थाई समिति को शिकायत फार्म का सरल स्वरूप सुझाने को कहा है। यह फार्म सरल रूप में जल्द ही आ जाएगा। यह इतना सरल होगा कि पांचवीं पास बच्चा भी इसे भरकर मुनाफाखोरी करने वालों की शिकायत कर सकेगा। फार्म के कॉलम भी घटा दिये गये हैं। नए फार्म में शिकायतकर्ता को मात्र उत्पाद का नाम और विक्रेता का जीएसटी नंबर ही देना होगा। इसके बाद पूरे मामले की जांच करने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस तरह आम आदमी भी शिकायत कर सकेगा।

दरअसल इस फार्म में बदलाव की आवश्यकता इसलिए पड़ी है क्योंकि पहले जो फार्म जारी किया गया था उसमें शिकायतकर्ता को बिक्री मूल्य से लेकर जीएसटी तक का पूरा ब्यौरा देना होता था। इसके चलते लोग शिकायत करने से कतराते थे। यही वजह है कि अथॉरिटी अब इसमें बदलाव करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र की स्थाई समिति के पास 63 शिकायतें आयीं हैं जबकि राज्यों के पास सिर्फ 23 शिकायतें आईं हैं। जिन राज्यों में शिकायतें आईं हैं उनमें आंध्र प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। 

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