अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सीमा से सटे किशनगंज जिले के चेकपोस्ट पर नहीं होती जांच, तस्करी के लिए बना है सेफजोन

किशनगंज के चेकपोस्‍ट पर जांच नहीं होती है। इससे तस्‍करी के सामान को इस रास्‍ते आसानी से ले जाया जा रहा है। यह तस्‍करों के लिए सेफ जोन बना हुआ है। लेकिन इस पर ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है।

Abhishek KumarPublish:Fri, 18 Jun 2021 03:29 PM (IST) Updated:Fri, 18 Jun 2021 03:29 PM (IST)
अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सीमा से सटे किशनगंज जिले के चेकपोस्ट पर नहीं होती जांच, तस्करी के लिए बना है सेफजोन
अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सीमा से सटे किशनगंज जिले के चेकपोस्ट पर नहीं होती जांच, तस्करी के लिए बना है सेफजोन

किशनगंज [शैलेश]। बिहार सहित देश के मानचित्र पर सीमांचल का किशनगंज जिला काफी संवेदनशील माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सीमा से सटा यह जिला तस्करी और घुसपैठ के लिहाज से तस्करों और घुसपैठियों का मुख्य मार्ग बना हुआ है। अक्सर तस्करी और घुसपैठ जैसे मामला सामने आते रहता है। तस्करी और घुसपैठ पर अंकुश लगाकर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने में स्थानीय पुलिस की अहम भूमिका होती है। आलम है कि यहां की सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र पर बनाए गए चेकपोस्ट पर सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति होती है। पुलिस चेकपोस्ट देख लोग कुछ पल के लिए घबरा जरूर जाते हैं लेकिन वहां उसे रोकने-टोकने वाला कोई नहीं होता है।

यह स्थिति दालकोला की ओर से जिला में प्रवेश पर बहादुरगंज मोड़ स्थित पुलिस चेकपोस्ट सहित सिलीगुड़ी की ओर से जिला में प्रवेश पर फरींगगोड़ा स्थित चेकपोस्ट की है। वहीं शहर के बीचों-बीच गुजरने वाली महत्वपूर्ण सड़क जो सीधे बंगाल के दिनाजपुर सीमा तक जाती है उस सड़क में भी सिर्फ दिखावे के लिए मेडिकल कॉलेज के पास चेकपोस्ट बना है। सीमा पर हर गाड़ी और आवाजाही पर नजर बनाए रखने के बजाय चेकपोस्ट के पुलिसकर्मी आसपास भटककर समय व्यतीत करते हैं। शहर से सटे सीमावर्ती क्षेत्र का जायजा लेने पर पता चला कि यहां जांच के लिए चेकपोस्ट तो है लेकिन पुलिस वाले सड़क पर जांच में लगे दिखते नहीं है। दिखावे के लिए बैरिकेङ्क्षटग लगा रहता है और पुलिस वाले बगल में बने चेकपोस्ट के कमरे में बैठे रहते हैं या सड़क किनारे मोबाइल में गेम खेलते हैं अन्यथा फोन पर आसपास में घूम-घूमकर बातचीत कर अपना ड्यूटी बजाते दिखते हैं। इससे यहां के लचर सुरक्षा व्यवस्था का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिसके कंधे पर सख्ती से जांच पड़ताल कर तस्करी या अपराध पर रोकथाम की जिम्मेदारी है वह वहां पहुंचकर अपने शिफ्ट का समय पूरा होने का इंतजार करते हैं। अगर इस रूट की समुचित निगरानी की जाए तो जिला में आपराधिक वारदात पर लगाम लगने के साथ-साथ इस्ट-वेस्ट कॉरिडोर एनएच 31 के माध्यम से होने वाली तस्करी पर आसानी से रोक लग सकता है और जांच में जिला पुलिस की झोली में कई उपलब्धियां भी आएगी।

शहर में अपराध कर बंगाल हो जाता फरार

शहर में आपराधिक वारदात में अक्सर देखा जाता है कि बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र के अपराधी स्थानीय अपराधियों से सांठगांठ कर आते हैं और लूट, छिनतई, डकैती जैसी घटना को अंजाम देते हैं। ऐसे अपराधी घटना को अंजाम देने के तुरंत बाद भागकर बंगाल चले जाते हैं। घटना की सूचना पर पुलिस जब तक सक्रिय होकर सीमावर्ती चेकपोस्ट पर जांच शुरू करती तब तक अपराधी बंगाल सीमा में प्रवेश कर जाता है और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठकर तमाशा देखती रह जाती है। फिर शुरू होता है अनुसंधान, जांच और गिरफ्तारी के लिए बंगाल में छापेमारी की कार्रवाई। अगर पुलिस सीमावर्ती चेकपोस्ट पर सजग होकर जांच में जुटी रहे तो भय से अपराधियों की आवाजाही कम होगी और क्राइम कंट्रोल के सार्थक होगा।

बहादुरगंज चेकपोस्ट

दालकोला से बंगाल के कानकी होते हुए किशनगंज में प्रवेश पर बहादुरगंज मोड़ स्थित पुलिस चेकपोस्ट बना है। जहां बैरिकेङ्क्षटग किया हुआ है लेकिन सड़क पर जांच करने वाले कोई नहीं होता है। पुलिसकर्मी बगल में बैठे रहते हैं। आसपास के लोगों से पूछने पर बताया कि ऐसे लगा हुआ है पुलिसकर्मी बैठकर टाइम पास करते हैं असलियत यह थी कि वहां का वास्तविक नजारा भी वही था।

दिनाजपुर रोड:-

शहर के केलटैक्स चौक से मेडिकल कॉलेज होते हुए दिनाजपुर जाने वाली सड़क में मेडिकल कॉलेज के पास एक चेकपोस्ट बना हुआ है। सड़क पर बैरिकेङ्क्षटग की हुई रहती है लेकिन वहां कोई दिखता नहीं है। कभी-कभी होमगार्ड के जवान वहां बने चेकपोस्ट के कमरा से बाहर निकलते और अंदर जाते दिखते हैं। वहीं दिनजापुर सीमा के पास भी कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। चुनाव के समय पुलिस के पास बनाया गया एक चेकपोस्ट ध्वस्त हो गया है। लोग बेरोकटोक आवाजाही करते रहते हैं।

फङ्क्षरगगोड़ा चेकपोस्ट::

सिलीगुड़ी से किशनगंज में प्रवेश के दौरान जांच के लिए फङ्क्षरगगोड़ा में पुलिस चेकपोस्ट है। जहां पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है। लेकिन मौजूद पुलिसकर्मी अपने काम के बजाय सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। बताया जाता है कि जब कोई सूचना होती है तब पुलिस सक्रिय होकर चेकपोस्ट पर जांच-पड़ताल शुरू करती है।

सीमावर्ती क्षेत्र के चेकपोस्ट पर होमगार्ड की तैनाती रहती है। जरूरत पडऩे पर पुलिस पदाधिकारी भी चेकपोस्ट पर पहुंचते हैं। वहां उत्पाद विभाग के पुलिसकर्मियों के प्रतिनियुक्ति भी रहती है। समय-समय पर जांच पड़ताल किया जाता है। -कुमार आशिष, एसपी