जिस World Map को बचपन से देखा, उसकी कहानी 450 साल पुरानी! पर ट्रैवलर्स के लिए क्यों खास है नया नक्शा?
दुनिया के नक्शे की वो कहानी जो कभी भूगोल पढ़ते वक्त भी नहीं बताई गई....!

वर्ल्ड मैप का 450 साल पुराना इतिहास (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लोगों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिस दुनिया के नक्शे को बचपन से देखकर और किताबों में पढ़कर वो बड़े हुए हैं, वह असल में वैसा दिखता ही नहीं है। हैरान कर देने वाली बात यह भी है कि एआई के इस जमाने में भी अभी तक स्कूलों में 450 साल पुराना नक्शा भूगोल का आधार बना हुआ था। किसी ने उसे बदलने की कोशिश ही नहीं की, पर अब यह बदलाव हो चुका है।
ऐसे में आइए जानते हैं 450 साल पुराने नक्शे का इतिहास और साथ में यह भी कि अब ट्रैवलर्स के लिए क्या-क्या बदलेगा?
वर्ल्ड मैप का 450 साल पुराना इतिहास
पुराने दुनिया के नक्शे को साल 1569 में गेरार्डस मर्केटर नाम के एक फ्लेमिश नक्शानवीस ने बनाया था। उस समय इस मैप को बनाने का मकसद दुनिया को भूगोल की जानकारी देना या इसे खूबसूरत दिखाना बिल्कुल भी नहीं था।
दरअसल, यह वो दौर था जब यूरोपीय लोग समुद्री यात्रा कर दुनिया की खोज में लगे हुए थे, ऐसे में बड़ी चुनौती थी समुद्री रास्तों का पता लगाना।
दिशा और कोण को ज्यादा महत्व
इस वजह से इस नक्शे में दिशा और कोण कुछ इस तरह डिजाइन किए गए थे, जो नाविकों के लिए नेविगेशन का काम करते थे। अब क्योंकि उस दौर में समुद्री कप्तानों के लिए दिशा सही होना ज्यादा मायने रखता था, तो इसमें देशों के छोटे और बड़े आकार को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया।
तभी तो अफ्रीका जैसे महाद्वीप का आकार ग्रीनलैंड जैसे छोटे द्वीप जितना ही दिखता था, पर अब यह ऐतिहासिक क्रांति हो चुकी है। अफ्रीकी देशों की पहल पर UN जनरल असेंबली ने नए नक्शे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
ट्रैवलर्स के लिए क्या-क्या बदलेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नक्शा बदल जाने पर यात्रा करने वालों के लिए क्या-क्या बदलेगा? तो आइए जानते हैं:
दुनिया को देखने का नजरिया
घूमने-फिरने वालों के मन में मैप की जो पुरानी छवि बनी थी, वह पूरी तरह से बदल जाएगी। इसकी मदद से देशों और महाद्वीपों के असली आकार का पता चल पाएगा।
भूगोल की सही जानकारी
बचपन से जिस मैप को हमने देखा है उसमें अमेरिका और यूरोप के देश बड़े दिखाई देते थे, यह कहीं न कहीं पश्चिमी देशों के ज्यादा ताकतवर होने का संकेत करते थे। पर अब यह मानसिकता ठीक होने लगेगी और समझ में आएगा कि विकासशील देश भले ही विकसित न हो, पर उनका आकार विकसित देशों से बड़ा है।
समय और दूरी वैसी की वैसी
हां, मैप बदल गया हो पर किसी देश में जाने की दूरी और समय जस का तस रहने वाला है। इसे आसान भाषा में समझें तो यह केवल हमारे दूरी को समझने की सोच में बदलाव करेगा।
