अक्सर ऐसा होता है कि ऑफिस की भागदौड़ से हमें ब्रेक चाहिए होता है लेकिन इसके लिए हमें ऑफिस से ज्यादा छुट्टियां नहीं मिल पाती। अगर आपके साथ भी ऐसा ही होता है, तो आप वीकेंड पर दो दिन की छुट्टियों में वृंदावन घूम सकते हैं। यहां खूबसूरत घाट देखकर आपको भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ राहत जरूर मिलेगी। उत्तरप्रदेश में बसा वृंदावन श्रीकृष्ण की लीलाओं के लिए जाना जाता है। वृंदावन नगरी इतनी कृष्णमय है कि आपको यहां एंट्री करते ही दिख जाएगा। हर कोई राधे-राधे पुकारता हुआ दिखाई देगा. वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालु प्रभु की कृपा पाने आते हैं। दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है। 

दाउजी का मंदिर 

वृंदावन में ही दाऊजी मंदिर है। इसमें श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलरामजी की प्रतिमा विशेष रूप से दर्शनीय है।

निधिवन 

जो भी वृंदावन आता है, वह निधिवन का दर्शन किए बगैर नहीं लौटता। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण आज भी रात के वक्त राधारानी के साथ रास रचाने यहां पधारते हैं। रात को निधिवन पूरी तरह से खाली हो जाता है। तब यहां कोई पशु-पक्षी भी नहीं रहते।

प्रेम मंदिर 

 

वृंदावन का प्रेम मंदिर अत्यंत भव्य है। रात के वक्त भी यहां श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं होती। प्रेम मंदिर की सजावट एकदम खास तरीके से की गई है। रात के वक्त इसका रंग हमेशा बदलता रहता है। 

इस्कॉन मंदिर 

वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में राधेकृष्ण की प्रतिमा एकदम मनोहारी है। यहां आपको कई सुंदर कलाकृति देखने को मिलेगी। 

इन घाटों पर जरूर घूमें 

श्रीवराहघाट

वृन्दावन के दक्षिण-पश्चिम दिशा में प्राचीन यमुनाजी के तट पर श्रीवराहघाट अवस्थित है। तट के ऊपर भी श्रीवराहदेव विराजमान हैं। पास ही श्रीगौतम मुनि का आश्रम है।

कालीयदमनघाट

इसका नामान्तर कालीयदह है। यह वराहघाट से लगभग आधे मील उत्तर में प्राचीन यमुना के तट पर अवस्थित है। कालीय को दमन कर तट भूमि में पहुंच ने पर श्रीकृष्ण को ब्रजराज नन्द और ब्रजेश्वरी श्री यशोदा ने अपने आसुंओं से भर दिया था। 

सूर्यघाट

इसका नामान्तर आदित्यघाट भी है। गोपालघाट के उत्तर में यह घाट अवस्थित है। घाट के ऊपर वाले टीले को आदित्य टीला कहते हैं। इसी टीले के ऊपर श्रीसनातन गोस्वामी के प्राणदेवता श्री मदन मोहन जी का मन्दिर है।

श्रृंगारघाट

इमलीतला घाट से कुछ पूर्व दिशा में यमुना तट पर श्रृंगारघाट अवस्थित है। यहीं बैठकर श्रीकृष्ण ने मानिनी श्रीराधिका का श्रृंगार किया था। वृन्दावन भ्रमण के समय श्रीनित्यानन्द प्रभुने इस घाट में स्नान किया था तथा कुछ दिनों तक इसी घाट के ऊपर श्रृंगारवट पर निवास किया था। 

चीरघाट

कौतु की श्रीकृष्ण स्नान करती हुई गोपियों के वस्त्रों को लेकर यही कदम्ब के पेड़ के ऊपर चढ़ गये थे। पास ही कृष्ण ने केशी दैत्य का वध करने के पश्चात यहीं पर बैठकर विश्राम किया था, इसलिए इस घाटका दूसरा नाम चैन या चयनघाट भी है। इसके निकट ही झाडूमण्डल स्थान भी है। 

कैसे पहुंचे 

आप मथुरा रेलवे स्टेशन पहुंचकर टैक्सी से यहां पहुंच सकते हैं। मथुरा से वृंदावन की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है। 

घूमने की बेस्ट जगह 

आप साल के किसी भी दिन यहां पहुंच सकते हैं। 

 

Posted By: Pratima Jaiswal