अभी इटली की यात्रा शुरू ही हुई थी और हम रोम की सितंबर माह की तेज गर्मी में कोलोजियम देख कर लौटे थे कि वहां रहने वाले फैमिली फ्रेंड्स ने रात के खाने का ऑफर दे दिया। खाना भी उनके घर पर नहीं, बल्कि पुराने रोम और नए रोम के मध्य में ठहरे एक रेस्तरां में, जहां का अनुभव अनूठा था। यूरोप यात्रा का पहला दिन रोम में यूरोपियन संस्कृति, वास्तुकला को देखते हुए और बरसों पुरानी मेट्रो में यादगार सफर करते और वहां के लोकल पिज्जा का स्वाद चखने में बीता। अब दूसरा दिन था इटली के बहुत चौड़े नहीं, लेकिन सुंदर राजमार्गों से गुजरने का और प्रकृति के साथ रूबरू होने का। गाइड क्लाउडियो ने रात को ही होटल में जो प्रोग्राम लगाया उसमें इटली के टस्कनी क्षेत्र से गुजरते हुए पीसा जाने का कार्यक्रम तय था।

जीत लिया दिल टस्कनी की खूबसूरती ने

पीसा जाना और वहां स्थित कैथेड़्रल स्क्वायर की झुकी हुई मीनार को देखना निश्चित रूप से कौतूहल पैदा कर रहा था। देर रात में डिनर से लौटने के बाद भी नियत समय पर अंतरराष्ट्रीय सैलानियों का पूरा ग्रुप पीसा जाने वाली कोच में सवार था। अब शुरू हो गया था टूरिस्ट गाइड का अनवरत बोलना। वह बता रहे थे कि कैसे हम टस्कनी के खूबसूरत पहाड़ों, पेड़ों और वाइन यार्डस से गुजरेंगे और पीसा पहुंचेंगे। कुछ घंटों की यह यात्रा बहुत रोमांचक थी, क्योंकि हम यूरोप यात्रा में एक अलग से डेस्टिनेशन की ओर बढ़ रहे थे और वहां के खुले मौसम, नीले आसमान और स्वच्छ पर्यावरण के मुरीद होते जा रहे थे। वैसा चमकता आसमां यहां कभी देखा नहीं और देखा भी तो शायद कश्मीर की वादियों में जब बर्फबारी के बाद खुलकर धूप निकलती है। वास्तव में रोम से पीसा का रास्ता मनमोह लेने वाला था। कई वीडियो बनाए हरियाली और बलखाती साफ-सुथरी सड़कों के। आखिर में हम पहुंचे पीसा। लग रहा था कि कोई बहुत बड़ा कैंपस होगा, जिसे देखने के लिए हर कोई लालायित है।

झुकी है फिर भी खड़ी है

बंगलादेशी नागरिकों के लगाए विंडो मार्केट में बिकते भारतीय और चाइनीज सामान को देखते हुए गुजरे तो सीधे एक गेट पर पहुंचे, तो सामने से सीधे दिखी वह मीनार जो पीसा की झुकती मीनार के नाम से दुनिया भर में जानी जाती है। इसे देख कर प्रश्न कौंधना तो स्वाभाविक था कि इतना झुकने के बाद भी यह मीनार मजबूती से कैसे खड़ी है। इस लीनिंग टावर के चारों तरफ थी पर्यटकों की भीड़। हर कोई मीनार की ऊपरी मंजिल को छूने या उसे झुकने से बचाने का पोज बना रहा था। कुछ फोटोग्राफी करने में हम भी जुट गए। दुनिया के हर कोने से लोग इसे देखने आए थे और जानने की कोशिश कर रहे थे कि यह पहले कितनी झुकी थी और अब कितनी सीधी हुई है। कहा जाता है कि विश्र्वप्रसिद्ध पीसा की झुकती मीनार एक अमूल्य कृति है, जो अपने अक्ष से करीब 5 डिग्री झुकी हुई थी। आश्चर्य यह भी है कि झुकी होने पर भी यह मीनार आज लगभग 800 से ज्यादा सालों तक भी मजबूती से खड़ी है। आखिर यह गिरती क्यों नहीं? यह प्रश्न सबके मन में रहता है। गौरतलब है कि इटली में साल 1280 के बाद से कई तेज भूकंप आए, लेकिन इस मीनार का कुछ भी नहीं बिगड़ा। वैज्ञानिकों ने इस रहस्य का राज इसकी नींव में नरम मिट्टी का होना बताया है। इस मिट्टी की वजह से यह भूकंप के झटके सहन कर जाती है। 16 इंजीनियरों की एक टीम ने इस बात का पता लगाया है। दरअसल, इस टावर की लंबी ऊंचाई, उसका कड़ापन और उसके नींव की मुलायम मिट्टी मिलकर एक ऐसी स्थिति का निर्माण करते हैं, जिससे भूकंप के दौरान भी इस मीनार में कंपन नहीं होता।

तीसरी मंजिल बनते-बनते झुक गई पीसा की मीनार

मीनार के बाहर तैनात वर्दीधारी सुरक्षाकर्मी हर वक्त अलर्ट रहते हैं। एक विदेशी पर्यटक ने उनके साथ फोटो खिंचवाने की कोशिश की तो उनके चेहरे के भाव सख्त हो गए और पर्यटक चुपके से खिसक गया। मतलब चाक चौबंद है यहां की सुरक्षा। कहते हैं कि पीसा और फ्लोरेंस के लोगों का छत्तीस का आंकड़ा था, दोनों ने कई युद्ध लड़े थे और फ्लोरेंस को नीचा दिखाने के लिए इस मीनार को बनाने की शुरुआत हुई। पूरी सावधानी बरतने के बाद भी जब तीसरी मंजिल का निर्माण हो रहा था, तभी वह झुक गई और लाखों प्रयासों के बावजूद उसका झुकना रोका नहीं जा सका। और मंजिलें बनाई तो गईं पर मीनार और अधिक झुकती चली गई। इस मीनार के झुकने के दो कारण माने जाते हैं। पहला, बाहरी दीवारों पर बढ़ता दबाव तथा दूसरा इसके नीचे की मिट्टी की नमी में परिवर्तन। यह रेत तथा चिकनी मिट्टी वाली जमीन पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मीनार की नींव बलुई जमीन पर है, जिसका एक भाग जमीन में धंस गया और इस वजह से यह झुक गई है। पीसा की मीनार का झुका होना शुरू से ही कौतूहल का विषय रहा है।

11 साल बंद रहा यह टावर

इस मीनार का महत्व और भी अधिक इसलिए है, क्योंकि विश्र्वविख्यात इटैलियन ज्योतिषी गैलीलियो ने सैंकड़ों साल पहले अपनी विद्या का प्रयोग किया था। गैलीलियो पीसा में प्रोफेसर थे। यह मीनार बहुत सुंदर भी है। इसका बाहरी भाग संगमरमर का बना हुआ है। यह बननी शुरू हुई वर्ष 1173 में, लेकिन इस मीनार को पूरा करने में 200 साल लग गए। इस मीनार का निर्माण कैथेड्रल के घंटाघर के रूप में हुआ था। मीनार में आठ मंजिलें हैं। इसमें ऊपर जाने के लिए 300 सीढि़यां हैं। झुकाव की तरफ की इसकी ऊंचाई 183.27 फीट है और दूसरी तरफ की 185.93 फीट है। इस मीनार को बोनानो पीसानो ने बनाया। इसके गिरने के खतरे को देखते हुऐ इस मीनार को 11 साल के लिए बंद कर दिया गया था और वर्ष 2001 में इसे फिर से खोला गया। जहां यह मीनार खड़ी है उसे कैथेड्रल स्क्वायर कहा जाता है, जिसे 1987 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था।

दुनिया के इस अचरज को देखना यादगार था और लौटते समय बंगलादेशी नागरिकों के बाजार से मोलभाव करते हुए की मीनार के एक मिनिएचर का दाम 1.5 यूरो तय करवाया और कई मूमेंटो खरीदे जिससे दोस्तों को उपहार में दे सकें।

1.5 इंच सीधी हो गई है अब यह मीनार

17 साल की मेहनत के बाद अब सालों से झुकी हुई पीसा की मीनार थोड़ी-सी सीधी हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 186 फीट के टावर को 4 सेंटीमीटर यानी 1.5 इंच तक सीधा कर दिया गया है। जब इस मीनार की हालत गिरने जैसी लगने लगी, तो 1990 में इसकी निगरानी के लिए एक ग्रुप बनाया गया था। उसने सालों तक इसके रेस्टोरेशन का काम किया और मीनार को थोड़ा सीधे करने में सफलता हासिल हुई। लगातार झुकाव से इस धरोहर को बचाना चुनौतीपूर्ण काम था। पीसा की इमारत की देखभाल करने वाली ओपीए के तकनीकी निदेशक सेला ने कहा था कि जिस तरफ से मीनार झुक रही है वहां हमने कई भूमिगत ट्यूब्स लगाई हैं। हमने सावधानीपूर्वक खुदाई करके मिट्टी हटाई। इस प्रणाली की वजह हमने आधे डिग्री तक झुकाव कम कर लिया। दरअसल पीसा यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग लेक्चरर नुनजियांते स्क्वेग्लिया पिछले 25 सालों से टावर का अध्ययन कर रहे हैं और उसका माप ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि साल 2001 तक मीनार को 41 सेंटीमीटर तक सीधा किया गया और उसके बाद अन्य चार सेंटीमीटर तक सीधा किया गया। इस बीच, सेला ने भविष्यवाणी की कि यह टावर पूरी तरह कभी भी सीधा नहीं होगा।

यशा माथुर 

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Posted By: Priyanka Singh

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