नई दिल्‍ली, कायनात काजी। राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में बसा बूंदी एक ऐतिहासिक दुर्गनगर के रूप में भी है। देश की रंग-बिरंगी विरासतों को समेटे हुए बूंदी आकर आप आराम में अपनी छुटिट्यों को एन्जॉय कर सकते हैं। नगर में लगभग 71 छोटी-बड़ी बावड़ियां हैं और अगर आसपास के गांवों को जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा 300 के पार चला जाता है। तो आइए जानते हैं शहर में आसपास घूमने वाली कुछ खास जगहों के बारे में...

ग्रांड केनियन ऑफ इंडिया

ग्रांड केनियन.. वह भी भारत में, सुनकर आश्चर्य हुआ न। दरअसल, राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा को पार करती हुई चंबल नदी मुकुंदरा हिल्स की पहाड़‍ियों को कुछ इस तरह क्रॉस करती है, जैसे किसी रूपसी के गले में पहना नेकलेस हो। इन घाटियों का नजारा अद्भुत है। कोटा से 20 किलोमीटर दूर मुकुंदरा हिल्स में स्थित गरडिया महादेव मंदिर के सामने ही है यह खुबसूरत नजारा। कोटा-चित्तौड़ हाईवे पर कोटा से मात्र बीस किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद जंगल में ऐसा शानदार नजारा देखने को मिलेगा, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। बारिश में इस जगह की खूबसूरती मंत्रमुग्ध कर देने वाली होती है। इसलिए इस मौसम में यह नजारा देखना नहीं भूलना चाहिए।

गरडिया महादेव मंदिर

बूंदी से 43 किलोमीटर दूर मुकुंदरा हिल्स में स्थित गरडि़या महादेव मशहूर पिकनिक स्पॉट है। इस मंदिर के सामने से चंबल नदी पहाड़ों के बीच से निकलकर मैदानों में मिलती है, जिससे शानदार नजारा देखने को मिलता है। कुल मिलाकर, यह जगह धार्मिक भी है, शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर भी है।

भीमलत वाटरफॉल

यह उत्तर भारत के प्रमुख झरनों में से एक है, जो बूंदी जिले में बिजौलिया मार्ग पर स्थित है। यह वाटरफॉल बारिश में अपने पूरे वेग के साथ बहता है। यह जगह इको टूरिज्म के रूप में विकसित हो रही है।

रामगढ़ विषधारी वाइल्डलाइफ सेंक्चुअरी 

यह सेंक्चुअरी बूंदी से मात्र 44 किलोमीटर दूर बूंदी-नेनवा मार्ग पर स्थित है। इस अभयारण्य में कई दुर्लभ वन्य जीवों की प्रजातियां पाई जाती हैं। जैसे- सियार, तेंदुआ, सांभर, जंगली सुअर, चिंकारा, स्लॉथ भालू, भारतीय भेडिय़ा, लकड़बग्घा, लोमड़ी आदि इस अभयारण्य में देखे जा सकते है। इस अभयारण्य को 1982 में बनाया गया था, जो 252.79 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।

बूंदी उत्सव की उमंग

हर साल नवंबर माह में बूंदी में स्थानीय प्रशासन और राजस्थान टूरिज्म द्वारा बूंदी उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव के माध्यम से बूंदी की संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिलता है। इसमें कई प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है, जैसे ऊंट दौड़, घोड़ा दौड़, पणिहारी दौड़, चम्मच दौड़, मूंछ प्रतियोगिता आदि। इन सबके साथ विदेशी सैलानियों व शहरवासियों के बीच रस्साकशी स्पर्धा का आयोजन भी किया जाता है। यहां राजस्थान के लोक संगीत से सजी शाम भी देखने लायक होती है।

 

Posted By: Priyanka Singh

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