उत्तर भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश में खास मौकों के अलावा आमतौर पर भी परोसे जाने वाले बालूशाही की यहां अलग ही शान है। देसी घी की खुशबू और चाशनी का मीठापन ओढ़े बालूशाही का स्वाद किसी को पसंद न आए ऐसा कम ही देखने को मिलता है। अलग-अलग जगहों पर इसका अलग-अलग रंग-रूप देखने को मिलता है। कहीं लाल तो कहीं नारंगी रंग लिए यह मिठाई खासतौर से भारत की ही देन है। देखने में तो यह डोनट की तरह होता है लेकिन इसे जो अलग बनाता है वह है इसका बेमिसाल स्वाद।

स्वाद एक नाम अनेक 

दिल्ली की बालूशाही भारत के नक्शे में नीचे उतरते ही मक्खन बड़ा बन जाती है। आज भी जयपुर व उज्जैन जैसे शहरों में सालों पुरानी दुकानें मक्खन बड़े को अपने अनोखे अंदाज़ में पेश करती आ रही हैं। इन्हीं मक्खन बड़ों में हल्का सा बेकिंग सोडा मिलाकर इसे बाडुशा का रूप दिया जाता है जिसका स्वाद आपको दक्षिण भारत में ही चखने को मिलेगा। और तो और गोवा में भी आप इसकी शानों-शौकत देख सकते हैं। वहां के मेन्यू में इसका भक्कम पेड़ा नाम दर्ज है।

बाज़ारों की शान 

वैसे आमतौर पर बालूशाही मैदे के मिश्रण, घी और चाशनी से तैयार की जाती है। मैदे की लोइयां जब घी और चाशनी में गोता लगाती हैं तो यक़ीन मानिए मिठाई बाज़ार मीठी सुगंध से महक उठते हैं। वहीं बिहार के भागलपुर में मिलने वाली बालूशाही इतनी नर्म और मुलायम रहती है कि मुंह में रखते ही घुल जाती है। पारम्परिक बालूशाही के अलावा पनीर बालूशाही और मावा बालूशाही भी अपने अनूठे स्वाद के लिए मशहूर हैं। खानपान में लगातार हो रहे एक्सपेरिमेंट्स में अब इसे रबड़ी डालकर भी परोसा जा रहा है।

शादियों में खास होती है बालूशाही

बिहार और यूपी की कई जगहों पर शादियों में मिठाई के तौर पर तो इसे खिलाने का रिवाज है ही इसके अलावा दुल्हन के साथ भेजी जाने वाली मिठाईयों में भी इसकी उपस्थिति बहुत मायने रखती है। यहां कि दुकानों पर तो जलेबी, इमरती से ज्यादा बालूशाही को बनते हुए देखा जा सकता है। इसे खाने के तरीकों में भी भिन्नता देखने को मिल सकती है। जहां कई जगहों पर इसे चाशनी में डुबोकर खाना पसंद किया जाता है वहीं कुछ जगहों पर इसका सूखा रूप लोगों को भाता है। हां, अगर आप इसे पैक कराकर ले जाना चाहते हैं तो सूखे का ऑप्शन बेहतर रहेगा। तो इन जगहों पर आकर एक बार तो बालूशाही का शाही स्वाद चखना बनता है। 

Posted By: Priyanka Singh

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