शिवरात्रि के त्योहार को लेकर शिव भक्तों में उत्साह दिखाई दे रहा है. इस बार शिवरात्रि दो दिन मनाई जा रही है. बनारस में भी महाशिवरात्रि इस बार दो दिन मनाई जाएगी. यहां फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी मंगलवार 13 फरवरी और बुधवार चतुर्दशी 14 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी. शिवरात्रि के लिए शिव की नगरी बनारस में चकाचौंध देखने को मिल रही है. आइए, जानते हैं क्या है बनारस यानि वाराणसी में खास. 

वाराणसी को बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है. यह शहर, दुनिया में सबसे प्राचीन और निरंतर आगे बढ़ने वाला शहर है. इस शहर को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है. भगवान शिव, हिंदुओं के प्रमुख देवता है जिन्हें  सृजन और विनाश का प्रतीक माना जाता है. साथ ही माना जाता है कि यहां मोक्ष की प्राप्ति होती है यानि उस व्यरक्ति को जन्मह और मृत्युय के चक्र से मुक्ति मिल जाती है इसीलिए, इस जगह को मुक्ति स्थमल भी कहा जाता है.
 
गंगा आरती
बनारस के घाट पर शाम को होने वाली गंगा आरती का नजारा बेहद खूबसूरत होता है. शाम को बड़ी संख्या में लोग इस आरती को देखने के लिए इकट्ठा होते हैं. हर रोज करीब 45 मिनट की आरती देखकर आपको बनारस और भी ज्यादा खूबसूरत लगेगा. 
घाट की सैर 
बनारस के घाट तो बनारस की शान हैं, जिसका अहसास आपको वहां जाकर ही होगा. यहां घाट की सीढ़ियों पर बैठकर गंगा को खूबसूरती को निहारना आपको जितना सुकून देता है. आप यहां पर नाव से भी सैर कर सकते हैं.
 
बनारस की लोकल मार्केट 
आप बनारस जा रहे हैं और यहां विश्वनाथ गली, गौदोलिया और ठठेरी बाजार से सामान की खरीदारी जरूर करें. 
 
बनारस की चाट और मिठाईयां 
चटपटी चाट के लिए जहां काशी चाट भंडार, अस्सी के भौकाल चाट, दीना चाट भंडार और मोंगा आदि काफी लोकप्रिय है. वहीं, ठठेरी बाजार की ताजी और रसभरी मिठाइयों को दुनियाभर में पसंद किया जाता है. अगर आपको दूध, दही और मलाई रास आती है तो बनारस जाकर 'पहलवान की लस्सी' जरूर पिएं. 
ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन 
बाबा भोलेनाथ की नगरी बनारस, घाट और मंदिरों के लिए जाना जाता है इसलिए अगर आप बनारस गए और वहां के प्रमुख मंदिरों में दर्शन करने नहीं गए तो आप की यात्रा अधूरी रह ही जाएगी. बनारस का सबसे प्रमुख मंदिर है काशी विश्वनाथ मंदिर, काल भैरव बाबा मंदिर के दर्शन जरूर करें. 
 
कैसे पहुंचे
आप वाराणसी ट्रेन से आसानी से जा सकते हैं. 
घूमने के लिए बेस्ट टाइम
वाराणसी घूमने का सबसे अच्छा समय दिसम्बर से फरवरी तक होता है.
कहां ठहरें
आपको अपने बजट के हिसाब से कई गेस्ट हाउस और होटल मिल जाएंगे. आप चाहें तो यहां धर्मशाला में भी ठहर सकते हैं. 
 

By Pratima Jaiswal