यहां दाखिल होते ही आप एक ऐसे इलाके में कदम रखते हैं जहां नीलगिरी की पहाडि़यों की ऊंचाई कम होने लगती हैं। इन पर रस्सी के समान लिपटी सड़कों के घुमावदार मोड़ों पर चलते ही आपको प्रकृति नए रूप में नजर आने लगती हे। प्रकृति का यह अलग रंग आपको अपनी मोहपाश में यूं बांधता है जैसे कोई अदृश्य जादू चल रहा हो। आप इन सड़कों के आसपास खुले खेत देखते हैं। मैदानी इलाकों की तरह आम के बाग दिखने लगते हैं। उन सर्पिल रस्तों से नीचे उतरते हुए नारियल और केले के बड़े-बड़े खेतों का सौन्दर्य अपने सभी रूपों के साथ प्रकट होता है।

इस हरीतिमा का कोई जोड़ नहीं

यूं तो नीलगिरी के वातावरण में हरियाली बहुत है लेकिन इस हरे पन का यह अनुभव अलहदा है! तमिलनाडू के इस कृषि प्रधान जिले की यही खूबसूरती है। यकीनन यह एक सुंदर कल्पनालोक है, जहां हर तरह के पर्यटकों को अपने लिए कुछ न कुछ खास जरूर मिल जाता है। जैसे, ट्रेकिंग के शौकीन यहां की पहाडि़यों पर अपने रोमांच को जी सकते हैं तो मंदिर आदि में रुचि रखने वालों के लिए द्रविड़ शैली के अद्भुत पूजा स्थल खड़े हैं। दरअसल, तेनी भक्ति के रंग में रंगे यात्रियों को भी निराश नहीं करता है। यहां उनके लिए भी बहुत से मंदिर हैं जो अपनी ऐतिहासिकता के साथ साथ स्थानीय संस्कृति को सदियों से सहेज कर रखने के लिए जानी जाते हैं। इन मंदिरों में कामाची अम्मान मंदिर, वेल्लापर मंदिर आदि में दर्शन-पूजन करने वालों की आमद रहती है। यही स्थिति दूसरे धर्म से जुड़े पूजा स्थलों की भी है। चर्च और मस्जिदों की संख्या इसे उन विशिष्ट स्थानों में शुमार कराती है जो भारतीय बहुलतावादी संस्कृति की पहचान के रूप में विख्यात हैं ।

कोलुकामलाई टी एस्टेट

तेनी में जंगल के छोटे-बड़े 27 हिस्से हैं। शहर की भागमभाग से दूर जो लोग शांति की तलाश में आते हैं उनके लिए यहां के चाय बागान किसी स्वर्ग की तरह हैं। यहीं पर कोलुकामलाई टी एस्टेट है जिसके बारे में इतना ही जान लेना पर्याप्त होगा कि यह विश्र्व में सर्वाधिक ऊंचाई पर बसा हुआ ओर्गेनिक चाय का बागान है। अकेले इस स्थल की यात्रा ही आपका मन मोह लेने के लिए पर्याप्त है। यहां के स्थानीय निवासियों से चाय के बागान में आने वाले हथियों के किस्से सुनिए तो आपको यहां की वन्य जीव संबंधी समृद्धि का एहसास हो जाएगा।

बड़ी मोहक हैं ये नदियां

तेनी एक बड़ा जिला है और यहां बहुत सी नदियां बहती हैं। मूलत: ये नदियां सिंचाई के काम आती हैं। बोंडीनायकानूर जैसी बस्तियों के पास जाने वाली सड़क जिस कोट्टागुड़ी नदी के तट पर ले जाती है वह एक अलग ही दुनिया में प्रवेश करता है, जिसकी कल्पना केवल साहित्य में हो सकती है या फिर जिन्हें चित्रों में ही देखा गया हो। आड़े-तिरछे चट्टानों पर बहती पहाडि़यों से घिरी नदी की सतह पर ठीक बीचोबीच सूरज डूबता है। मंथर गति से बहती नदी के बीच में पानी पर पड़ती शाम की छाया मन में संतरी रंगत भर देता है। नदी के दोनों ओर पहाड़ों पर फैली हरियाली की छाया नदी में पड़ती है ठीक उसी समय कोई नाव मछली पकड़ने के लिए निकल पड़ती है। यहां की शामें जितनी खूबसूरत होती है सुबह उतनी ही शांत। नदी के ऊपर पड़ा कुहरा और उसके बीच से निकलते दिन का खिलता हुआ रंग बहुत आकर्षक होता है।

कैसे जाएं कहां ठहरें

तेनी जाने के लिए रेल, हवाई जहाज और सड़क मार्ग तीनों तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं। तेनी का अपना रेलवे स्टेशन है जो बोंडी और मदुरै के बीच में पड़ता है। नजदीकी हवाई अड्डा मदुरै है। यहां की सड़कें बहुत अच्छी हैं। सरकारी और निजी बसों की बहुतायत है यहां।

 

Posted By: Priyanka Singh

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