सापूतारा का अर्थ होता है, सांपों का स्थान। यह गुजरात का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। अब जब घूमने का प्लान बनाएं और गुजरात जाएं, तो कुछ दिन गुजरात के सापूतारा में जरूर गुजारें...

गुजरात का सापूतारा एक ऐसा टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, जहां ट्रैकिंग,एडवेंचर के साथ वाटरफॉल और दूर-दूर तक हरियाली दिखाई देता है। यह गुजरात का एकमात्र हिल स्टेशन है। भीड़भाड़ से दूर एक ऐसी जगह, जहां गांव और शहर दोनों का मजा साथ-साथ है।

शहर की आपाधापी से दूर आदिवासियों के बीच एक दूसरी ही दुनिया है। ऐसी जगहों के बारे में सिर्फ किताबों में पढ़ा जाता है या फिर डिस्कवरी चैनल पर देखने को मिलता है।

फैमिली के साथ एंज्वॉय

जब भी घूमने का प्रोग्राम बनाते हैं, तो बच्चों की इच्छा होती है फन, एडवेंचर, मस्ती और बड़ों की इच्छा होती है आराम सुकून और शांति। छुट्टियों पर जाने का मकसद तो बस इतना ही होता है कि ज्यादा से ज्यादा एंज्वॉय कर सकें। जगह इतनी खूबसूरत हो कि सारी परेशानियां और पूरे साल की आपाधापी की थकावट दूर कर सकें। वादियां इतनी खूबसूरत हों कि सालों भर मन गुदगुदाता रहे। कुछ ऐसा ही है सापूतारा। यह हिल स्टेशन गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के पर्यटकों के लिए जन्नत बन जाता है। बारिश के मौसम में पहाड़ों पर उमड़ते-घुमड़ते

बादल कब आपको भिगो दें, पता ही नहीं चलता। थोड़ी-थोड़ी देर में होने वाली रिमझिम से पूरी वादी हरी-भरी, चंचल-सी लगने लगती है। जिधर नजर दौड़ाइए, वादियां, पहाडिय़ां, उमड़ते-घुमड़ते बादल, तपती गरमी में मन को शांति देते हैं, जबकि ठंड में पहाडिय़ों पर सफेद बर्फ की चादर हर किसी को लुभाती है।

एडवेंचर के साथ मस्ती भी

एक पर्यटक को चंद दिन गुजारने के लिए जो सुकून, मस्ती चाहिए सापूतारा में वह सब एक साथ मौजूद है। घने जंगलों के बीच से गुजरते इस छोटे से टूरिस्ट स्पॉट पर एडवेंचर पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए जिप राइडिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेन बाइकिंग के साथ साथ माउंटेनियरिंग की सुविधाएं भी मौजूद हैं। घने जंगलों से होकर इस गुजराती आदिवासी प्रदेश से गुजरना काफी रोमांचक है। पहाडिय़ों के बीच से जब आप गुजरेंगे, तो जगह- जगह छोटे-छोटे वाटरफॉल रोमांचित करते जाएंगे। झील, फॉल, ट्रैकिंग और एडवेंचर को एंज्वॉय करने का कंपलीट डेस्टिनेशन होने की वजह से युवाओं का फेवरेट टूरिस्ट स्पॉट भी है। एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए यहां टेबल टॉप और सनसेट प्वाइंट दो ऐसी पहाडिय़ां हैं, जहां गर्मियों में भी स्वेटर की जरूरत पड़ जाती है...यहां से डूबता और उगता सूरज ऊटी जैसा आनंद देता है।

आदिवासियों का जनजीवन

गुजरात पर्यटन सापूतारा को हॉट टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने और आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए खास तरह की तैयारी कर रहा है। आदिवासियों के घरों का चयन कर टूरिस्ट फ्रेंडली और उनके घरों में शौचालयों की व्यवस्था कर रही है। पर्यटक अधिक से अधिक आदिवासियों के जनजीवन को समझ सकें, इसके लिए आदिवासियों को भी खास तरह का प्रशिक्षण दिया गया है। आदिवासियों के साथ एक रात गुजारने की कीमत 2500 से तीन हजार रुपये है।

सापूतारा महाराष्ट्र और गुजरात के बॉर्डर पर है, इसलिए यह एक धार्मिक टूरिस्ट स्पॉट के रूप में भी पॉपुलर है।

सापूतारा नासिक और शिरडी से महज 70-75 किलोमीटर की दूरी पर है इसलिए यहां देशभर के पर्यटक आते हैं। दो-दो धार्मिक स्थल के बीच में होने की वजह से यह पूरा क्षेत्र शाकाहारी है। बहुत ढूंढऩे के बाद कहीं एक-आध

नानवेज की दुकान मिलती है। इसलिए इसे शाकाहारी शहर भी कहते हैं।

बारिशों का लुत्फ

रिमझिम बारिश के बारे में यहां के लोगों का कहना है कि यहां कभी-भी बारिश होती है और छतरी की जरूरत नहीं पड़ती है। ये बारिश आपको गुदगुदाती हैं। पहाडिय़ों पर उमड़ते-घुमड़ते बादल कभी भी पहाडिय़ों को अपने आगोश में ले लेते हैं। इन्हीं पहाडिय़ों के बीच जिप ट्रैकिंग भी है, जहां एक लोहे के तार के सहारे एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी पक्षी बन उडऩे का मजा मिलता है। एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी बिना किसी डर के जाने के लिए कमर पर चमड़े

की मजबूत बेल्ट बांधी जाती है और फिर छोड़ दिया जाता है। नीचे कलकल करती नदी, खुला आकाश आप...पहाडिय़ां..और वादियां। इच्छा खुले आकाश में उडऩे की है, तो पैराग्लाइडिंग से शौक पूरा करने का पूरा अवसर यहां मौजूद है।

अन्य आकर्षण

सापूतारा नाम के हिसाब से यहां सांप का झुंड या बसेरा होना चाहिए था। शायद वह घने जंगलों में हो। हां, यहां सांप का या यूं कहें नाग देवता का मंदिर जरूर है, जो पर्यटकों और बच्चों में खासा पॉपुलर है। यहां एक झील भी है, जो कपल्स के लिए मोस्ट रोमांटिक डेटिंग प्लेस की तरह दिखाई देता है। बोटिंग करते लोग और बारिश पू

रे वातावरण को रोमांचक बना देता है। यहां पर जगह-जगह छल्ली मिलता है-नमक, मिर्च और नींबू के साथ,चाय और उबली हुई मूंगफली। अलग ही मजा है उबली मूंगफली का भी। यहां से ही कुछ दूरी पर है गिरा फॉल, जिसे नियाग्रा फॉल के नाम से भी जाना जाता है। यहां पहुचने का रास्ता घने जंगलों से होकर गुजरता है। पहाडिय़ां और घना जंगल, बीच-बीच में पहाड़ों से रिसता पानी शहरी आपाधापी की सारी परेशानियों को अपने अंदर समा

लेता है। मध्यमवर्गीय परिवारों का भी यह फेवरेट टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, क्योंकि यहां 1100 रुपये से लेकर

5500 रुपये तक के कमरे मौजूद हैं।

कैसे पहुंचें

सापूतारा सूरत, नासिक या शिरडी से भी पहुंचा जा सकता है। नजदीकी हवाई अड्डा सूरत है, जो करीब 170 किमी. की दूरी पर है। छोटी लाइन की ट्रेन से बाघई फिर वहां से सापूतारा पहुंच सकते हैं।

Posted By: Preeti jha

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