प्रयागराज- गंगा, सरस्वती और यमुना का पवित्र संगम। जहां स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं ऐसा लोगों का मानना है। प्रयागराज का कुंभ मेला दूसरी जगहों के कुंभ से काफी अलग और खास होता है। इस ऐतिहासिक पावन स्थली पर 55 दिनों तक चलने वाले आस्था के महापर्व के दौरान एक अस्थायी शहर बसा दिया जाता है। प्रयागराज का कुंभ मेला 50 दिनों तक संगम क्षेत्र के आस-पास हजारों हेक्टेअर भूमि पर चलने की वजह से विश्व के सबसे बड़े शहर का रूप ले लेता है। देश-दुनिया को यहां की भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था चकित करती रही है। कहते हैं संगम में स्नान करके 10 पीढ़ियों के पुनर्जन्म के च्रक से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष प्राप्त होता है। प्रयागराज में लगे छोटे-बड़े टेंट्स और उनसे सुनाई देता मंत्रोच्चार, चारों ओर गूंजता भक्तिगीत सिर्फ इस जगह को ही पावन नहीं बनाता बल्कि दूर-दूर से स्नान करने आए भक्तों में भी उत्साहवर्धक का काम करता है।

प्रयागराज कई मायनों में अलग है। संगम तट पर रहकर वेदाध्ययन और ध्यान करने की परंपरा सिर्फ प्रयाग में ही देखने को मिलती है। तीर्थों का तीर्थ कहे जाने वाले प्रयागराज में ही ब्रम्हा ने सृष्टि-सृजन के लिए यज्ञ किया था। कुंभ का आगाज हमेशा ही अखाड़ों की पेशवाई के साथ होता है। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में नागा साधुओं का शाही स्नान होता है। विशाल धार्मिक आयोजन में महाशिवरात्रि तक साधु संतों के शिविरों और तंबुओं में हवन पूजन होता है।

कुंभ की मान्यता

कुम्भ का अर्थ होता है कलश। देवताओं और असुरों की लड़ाई के बाद जब समुद्र मंथन हुआ तो मंथन से कुल चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई जिन्हें आपस में बांट लिया गया लेकिन अमृत कलश को लेकर विवाद होने लगा। तब भगवान विष्णु ने स्वयं मोहिनी रूप धारण कर सबको अमृत-पान कराने की बात कही और अमृत कलश का दायित्व इंद्र-पुत्र जयंत को सौंपा। जब जयंत दानवों से अमृत की रक्षा करने के लिए भाग रहे थे, तभी अमृत की बूंदे पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरीं। हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज।

क्योंकि विष्णु भगवान की आज्ञा से सूर्य, चंद्र, शनि एवं बृहस्पति भी अमृत कलश की रक्षा कर रहे थे और विभिन्न राशियों (सिंह, कुम्भ एवं मेष) में विचरण के कारण ये सभी कुंभ पर्व के द्योतक बन गए। जयंत को अमृत कलश को स्वर्ग ले जाने में 12 दिन लग गया। देवताओं का एक दिन पृथ्वी के एक वर्ष के बराबर माना गया है। इसी से वर्णित स्थानों पर ही 12 वर्षों में कुंभ मेले का आयोजन होता है।

कुंभ में होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी

14 जनवरी से शुरु होगा शाही स्नान

10 से 12 भाषाओं में होगा प्रोग्राम

11-12 प्रदेशों के कलाकार लेंगे भाग

कुंभ के खास आकर्षण

कुम्भ-2019 के कलाग्राम में दर्शकों को भारतीय कला एवं संस्कृति की अनूठी झलक दिखने को मिलेगी। खास डिजाइन्स वाले इस ग्राम में 13 पॅवेलियनस बनाए गए हैं। 17 सांस्कृतिक केन्द्रों के पॅवेलियन के अलावा 8 दूसरे पॅवेलियन भी हैं जिसमें कला एवं शिल्प से जुड़ी हर एक चीज़ मौजूद रहेगी। हर एक पॅवेलियन में 15 दूकानें होंगी जहां से हैंडीक्राफ्ट चीज़ें खरीद सकते हैं।

कुम्भ के आयोजनों में पेशवाई का महत्वपूर्ण स्थान है। एक ऐसी शोभायात्रा जो विश्व भर से आने वाले भक्तों और पर्यटकों को सूचित करने का माध्यम होती है। पेशवाई में साधु-सन्त अपनी टोलियों के साथ कुम्भ में पहुँचते हैं। हाथी, घोड़ों, बग्घी, बैण्ड आदि के साथ निकलने वाली अखाड़ों की पेशवाई पूरे माहौल को रोमांच से भर देती है।

कुम्भ मेला को और आकर्षक बनाने के साथ ही तीर्थयात्रियों, धार्मिक गुरूओं और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लेजर शो की भी व्यवस्था है।

कुंभ मेला क्षेत्र में खास जगहों पर 10 स्टाल विशेष रूप से बनाए गए हैं। इन स्टॉलों पर तीर्थयात्री और दर्शक कुंभ 2019 के वीडिओज़ देख पाएंगे।

प्रयागराज में आसपास घूमने वाली जगहें

संकटमोचन हनुमान मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, श्री वेणी माधव, शंकर विमान मंडपम, विक्टोरिया मेमोरियल, पब्लिक लाइब्रेरी, गंगा गैलरी, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, दशाश्वमेघ मंदिर। प्रयागराज आएं तो इन जगहों की देखना न भूलें। 

Posted By: Priyanka Singh

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