नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। ताजमहल की गिनती विश्व की प्रमुख धरोहरों की की जाती है। यह अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। ताजमहल का दीदार करने दुनियाभर से लोग आते हैं। प्यार के प्रतीक ताजमहल के निर्माण कार्य की शुरुआत सन 1632 में हुई थी। वहीं, सन 1656 में यह बनकर तैयार हो गया था। जबकि, साल 1983 में ताजमहल को युनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिला। इतिहासकारों की मानें तो शाहजहां के शासनकाल में वास्तुकला का पुनर्जागरण हुआ है। शाहजहां ने कई विश्व प्रसिद्ध धरोहरों का निर्माण करवाया था। इनमें लाल किला, जामा मस्जिद और ताजमहल प्रमुख हैं। हालांकि, ताजमहल के बारे में बहुत कम लोगों को सही जानकारी है। आइए, प्यार के प्रतीक ताजमहल से जुड़े कुछ रोचक तथ्य के बारे में जानते हैं-

-इतिहासकारों की मानें तो कुतुबमीनार की तुलना में ताजमहल की लंबाई अधिक है। ऐसा माना जाता है कि ताजमहल तकरीबन 5 फ़ीट अधिक ऊंचा है।

-ऐसा कहा जाता है कि ताजमहल के निर्माण के बाद कारीगर उस्ताद अहमद लौहारी के हाथ काट दिए गए थे। हालांकि, यह बिल्कुल गलत है। प्यार के प्रतीक ताजमहल के निर्माण के बाद उस्ताद लाहौरी ने रेड फोर्ड का भी निर्माण करवाया था।

-तत्कालीन समय में ताजमहल के निर्माण में 32 मिलियन की लागत आई थी। वर्तमान समय में उसकी कीमत 1 बिलियन डॉलर है।

-ताजमहल के निर्माण में संगमरमर के पत्थरों पर बारीक नक्काशी के लिए कुल 17 वर्ष लगे थे।

-विश्व प्रसिद्ध धरोहर ताजमहल के निर्माण कार्य में 22 हजार मजदूर लगे थे। इसके बाद ताजमहल का निर्माण हुआ था।

-ताजमहल के निर्माण कार्यों में हाथियों का बड़ा योगदान है। इतिहासकारों का कहना है कि 1000 हजार हाथियों ने माल ढुलाई में हाथ बटाएं थे।

-ताजमहल के दीवार पर हस्तलिपि के छंद कुरान शरीफ से लिया गया है। कुरान शरीफ इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रन्थ है।

-ऐसा कहा जाता है कि शाहजहां काले ताजमहल का निर्माण करवाना चाहते थे, लेकिन उनके बेटे ने मध्यस्थता कर सफेद संगमरमर से ताजमहज का निर्माण करवाया था।

-ताजमहल में जड़ी की गई पत्थरों को तिब्बत, चीन, श्रीलंका समेत भारत के अन्य हिस्सों से मंगवाया गया था।

 

Edited By: Pravin Kumar