शहर की भीड़भाड़ से अलग एक सुकून भरी जगह तलाश करना बहुत मुश्किल होता है. वहीं जब बात अपने पार्टनर के साथ कहीं रूकने की हो, तो हर कपल एंकात तलाश करना चाहता है. अगर आप भी उन सुकूनभरी जगहों की तलाश में हैं, तो हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही कुछ जगहों के बारे में. लेकिन इन जगहों पर जाने से पहले एक बार इन कहानियों पर भी नजर दौड़ा लीजिए, क्योंकि कई लोग इन जगहों को भूतिया जगह भी कहते हैं, इसलिए इन जगहों पर जाएं, तो अपने रिस्क पर. 

संजय वन
 
संजय वन साउथ दिल्ली के बीचों-बीच बसा है और ये करीब 10 किलोमीटर के इलाके में फैला है. यहां कई सूफी संतों की दरगाह हैं, लेकिन बहुत से लोगों का कहना है कि यहां उन्होंने भूतों और चुड़ैलों को देखने के अलावा कई बार बच्चों के रोने की आवाजें सुनी हैं. अब इस बात में कितनी सच्चाई है, वो तो आपको यहां जाने के बाद ही पता चलेगा. तो, देर किस बात की अपने पार्टनर के साथ पहुंच जाएं. 
भूली भटियारी
भूली भटियारी सेंट्रल दिल्ली में झंडेवाला के पास है. कहते हैं इस महल की देखभाल एक महिला करती थी और उसी के नाम पर इसका नाम भूली भटियारी पड़ा. साथ ही यह महल तुगलकवंश का शिकारगाह भी हुआ करता था. शाम ढलने के बाद लोग यहां कम ही जाना पसंद करते हैं. लोगों का मानना है कि यहां अक्सर अजीबो गरीब अवाजें सुनाई देती हैं. हालांकि, काफी लोगों ने इसे अफवाह भी बताया है. 
दिल्ली कैंट
बहुते से लोगों का कहना है कि दिल्ली के सबसे शांत और हरे-भरे इलाकों में से एक दिल्ली कैंट भी भूत-प्रेत के किस्सों से भरा हुआ है. यहां से गुजरने या फिर यहां रहने वाले कई लोगों का कहना है कि यहां उन लोगों ने कई बार एक महिला को सफेद रंग के कपड़ों में देखा है जो लोगों से लिफ्ट मांगती है. अगर आप निडर हैं, तो आप अपने पार्टनर के साथ वहां जा सकते हैं. 
खूनी दरवाजा
इस जगह का नाम खूनी दरवाजा तब पड़ा जब यहां मुगल सल्तनत के बादशाह बहादुर शाह जफर के तीन बेटों की ब्रिटिश जनरल विलियम हॉडसन ने गोली मार कर हत्या कर दी थी. साथ ही औरंगजेब ने अपने भाई दाराशिकोह को मारकर उसका गला यहां लटका दिया था. हालांकि, अब ये जगह पुरानी दिल्ली का टूरिस्ट स्पोर्ट बन चुका है. 
उग्रसेन की बावली 
उग्रसेन की बावली को कई लोग अग्रसेन की बावली भी कहते हैं. ये जगह भी बिल्कुल सुनसान पड़ी रहती है. हालांकि, ‘पीके’ फिल्म के बाद इस जगह पर कुछ लोग आने लगे हैं, लेकिन शांति तलाश रहे लोगों को यहां आकर अच्छा लगेगा. 
 

By Pratima Jaiswal