पंजाब के गुरुदासपुर जिला मुख्यालय से 40 किमी की दूरी पर स्थित डेरा बाबा नानक को करतारपुर साहिब की दर्शनी ड्योढी कहा जाता है। गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती का हर तरफ उल्लास है। प्रकाश पर्व मनाने के लिए डेरा बाबा नानक में 40 एकड़ में टेंट सिटी बसाई गई है। जहां श्रद्धालुओं, सैलानियों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। तो गुरु पुरब के इस पावन मौके पर यहां ऐसी कई जगहें हैं जहां जाकर आप उनसे जुड़ी चीज़ों के बारे में जान सकते हैं।

सुल्तानपुर लोधी: उत्सव का केंद्र श्री गुरुनानक देव जी ने अपनी जिंदगी के लगभग 15 साल कपूरथला जिले में स्थित पावन नगरी सुल्तानपुर लोधी में बिताए थे, जो डेरा बाबा नानक से करीब 115 किमी. की दूरी पर है। यहीं से गुरु जी की बारात बटाला के लिए रवाना हुई और शादी के बाद भी वह सुल्तानपुर लोधी में ही रहे। माना जाता है कि गुरु जी को यहीं दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और उन्होंने मूलमंत्र 'इक ओंकार' का उच्चारण किया। इसी ऐतिहासिक शहर से ही गुरु नानक देव जी ने विश्र्व कल्याण के लिए 1499 ईस्वी में चार उदासियों (यात्राओं) की शुरुआत की। आइए नजर डालते हैं सुल्तानपुर लोधी के प्रमुख गुरुद्वारों पर, जिनका गुरुनानक देव के साथ गहरा नाता रहा है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाते समय या वहां से आते समय आप इन स्थानों के दर्शन के लिए भी जा सकते हैं। 

गुरुद्वारा श्री बेर साहिब

सुल्तानपुर लोधी स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में श्री गुरु नानक जी रोजाना सुबह बेई नदी में स्नान कर प्रभु-भक्ति में लीन हो जाते थे। इस स्थान पर आज श्री भौरा साहिब बना है, जहां गुरु जी ने 14 साल 9 महीने 13 दिन तक भक्ति की। मान्यता है कि गुरु जी ने अपने भक्त खरबूजे शाह के निवेदन पर बेर के इस पौधे को यहां लगाया था। 550 साल बाद भी यह हरा-भरा है और विशाल क्षेत्र में फैला है। गुरुद्वारा संत घाट श्री बेर साहिब से तीन किलोमीटर की दूरी पर है गुरुद्वारा संत घाट। गुरु जी यहां भी स्नान करने आते थे। एक दिन डुबकी लगाकर 72 घंटे के लिए गायब हो गए। कहा जाता है कि इसी दौरान उन्हें दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और उन्होंने 'एक ओंकार सतनाम करतापुरख' के मंत्र का उच्चारण किया। 

श्री हट्ट साहिब

सुल्तानपुर लोधी में रहने के दौरान गुरु जी ने नवाब दौलत खान लोधी के मोदीखाने में नौकरी की। किले के दक्षिण में इस मोदीखाने में गुरु जी लोगों को राशन बेचते समय जरूरतमंदों को खुले मन से राशन बांटते थे। इसी स्थान पर उन्होंने 'तेरा-तेरा' का उच्चारण किया था। उनके समय के 14 पवित्र बट्टे, जिनसे गुरुजी अनाज तोलते थे, आज भी यहां सुशोभित हैं। 

श्री अंतरयाम्ता साहिब

यह वह स्थान है, जहां ईदगाह में श्री गुरु नानक देव जी ने नवाब दौलत खान व उनके मौलवी को नमाज की असलियत बताई थी। उन्होंने उनसे कहा था कि अगर नमाज अदा करनी है तो मन को भी शरीर के साथ प्रभु के आगे सच्चे मन से अर्पित किया जाए। इस मौके पर गुरु जी ने यह संदेश दिया कि बेशक नवाब का शरीर ईदगाह में है, लेकिन उसका मन तो कहीं दूर घूम रहा है।

श्री अचलेश्वर धाम और गुरुद्वारा

डेरा बाबा नानक से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित श्री अचलेश्र्वर धाम का इतिहास काफी पुराना हैं। यह स्थान हिंदू-सिख एकता का प्रतीक है। यहां श्री अचलेश्वर मंदिर और गुरुद्वारा अचल साहिब का दर्शन कर सकते हैं। यहीं श्री गुरु नानक देव जी ने जाति प्रथा के खिलाफ उपदेश दिया था। उस दौरान महंतों का काफी बोलबाला था। यहां पर एक बेर का वृक्ष लगा है, जिसके बेर हमेशा हरे-भरे रहते हैं। 

कैसे जाएं

डेरा बाबा नानक आप दिल्ली से हवाई मार्ग से अमृतसर आ सकते हैं। अन्य स्थानों से भी अमृतसर के लिए सीधी उड़ानें हैं। 120 अमृतसर से डेरा बाबा नानक के लिए कई पैसेंजर ट्रेन चलती हैं। बस और अन्य वाहनों से भी आप डेरा बाबा नानक जा सकते हैं। इसके अलावा, आप दिल्ली से ट्रेन के जरिये गुरदासपुर पहुंच सकते हैं। वहां से टैक्सी से डेरा बाबा नानक और अन्य स्थलों का भ्रमण कर सकते हैं। 

Posted By: Priyanka Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप