महाराष्ट्र के फलटण सिर्फ बाहरी खूबसूरती ही नहीं खानपान के लिए भी सैलानियों की पसंदीदा जगह है। अनार के बड़े-बड़े बागान और गन्ने के खेत देखकर किसानों की कर्मठता का अंदाजा लगाया जा सकता है। और तो और इस जगह आपको एक भी भिखारी देखने को नहीं मिलेंगे।

मटकी और भरल वांगी

सादा जीवन बिताने वाले भोजन भी सादा ही पसंद करते हैं, पर मिर्च का भरपूर प्रयोग होता है फलटण के खाने में। दिन के भोजन में चपाती और रात को ज्वार-बाजरे की भाकरी खायी जाती है। वरण-भात, आमटी, थालीपीठ, सोलकढ़ी, पूरनपोली, मटकी, भरल वांगी आदि इन्हें विशेष रूप से प्रिय हैं। खाने के साथ लहसुन चटनी व ठेचा भी पसंद किया जाता है। वड़ा पाव तो यहां स्ट्रीट फूड के रूप में बहुत ज्यादा पसंद किया जाता है। दस रुपए में एक वड़ा पाव से आपका मन तो नहीं भरता, पर हां हल्की-फ़ुल्की भूख जरूर मिटा देता है। पांच रुपये में सोडा शॉपी के ठंडे पेय थकान मिटा देते हैं। 10 रुपये में नींबू-पानी से भरा गिलास मिल जाता है। पांच रुपये की एक इडली चटनी के साथ। 10 रुपये में गिन कर छह नहीं, कभी-कभी सात गोलगप्पे भी खिला देता है चाट वाला अवधेश। फलटण में चिकन-मटन खाने के शौकीन लोगों की संख्या भी बहुतायत में है। स्थानीय मटण च सुखा, पांढरा रसा- ताम्बरा रसा,मटण-चिकण च लोणचे स्वाद से खाया जाता है।

खानपान के खास ठिकाने

फलटण तालुका के विंडनी गांव के बैंगन तो खासे पसंद किये जाते हैं यहां। महाराजा होटल का मराठी टच लिया वेज-नॉन वेज फूड आपको जरूर पसंद आएगा। जैक्सन होटल में आपको उत्तर भारतीय व्यंजन मिल जाएंगे। यहां का केन जूस खासा लोकप्रिय है। गोविंद डेयरी के सामने बने लक्ष्मी होटल में मिसल पाव खूब बिकता है। खंडेलवाल की कचौड़ी मटर की चटनी के साथ मिलती है खाऊ गली में। ठेले पर बिकता दालच्या राइस भी खूब खाया जाता है। सुबह दस बजे से रात दस बजे तक फलटण की हवाओं में वड़ा पाव की क्रिस्प-करारी महक घुली रहती है फ्राइड हरी मिर्च की तीखी गंध के साथ। दिन भर ताजे पाव से सुगंधित रहते हैं बेकर्स के हाथ। केक पेस्ट्री बिस्किट के साथ-साथ यहां क्रीम रोल शौक से खाया जाता है। मिसल के ऊपर डालने वाला फरसाण खूब खरीदा जाता है। लोग अपने साथ यहां से फरसाण, लहसुन चटनी, ठेचा, कोकम शरबत, चकली और भाखरवाड़ी खरीदकर ले जाते हैं। फलों के मौसम में अनार और अंजीर भी ले जाते हैं। 

Posted By: Priyanka Singh