अप्रैल का महीना कई मायनों में खास होता है। खुशगवार मौसम मनुष्यों में ही नहीं पेड़-पौधों और जीवजन्तुओं में भी अलग ही उत्साह और उमंग भर देता है। नवरात्रि से लेकर ईस्टर तक ऐसे कई मौके होते हैं जब ऑफिस और कॉलेज की छुट्टियां होती हैं। ऐसे में घूमते-फिरते हुए इन रंगा-रंग त्यौहारों को देखने से बेहतरीन और क्या हो सकता है। जानते हैं इन फेस्टिवल्स के बारे में।

मोपिन फेस्टिवल

कब – 5 अप्रैल 2019

मोपिन फेस्टिवल अरुणाचल प्रदेश, भारत के गैलो जनजाति विशेष रूप से जनजातियों के गैलो समूह द्वारा मनाया जाने वाला एक कृषि त्योहार है जो पूर्वी सियांग और पश्चिम सियांग जिलों में रहता है। यह मार्च-अप्रैल और गालो जनजाति के लिए नए साल के अनुरूप "लुमी" और "लुकी" के गैलो महीनों में आयोजित कटाई के मौसम का उत्सव है। गालो जनजाति एक एनिमेटेड धर्म का पालन करती है जिसे डोनी-पोलो कहा जाता है। महिलाएं अपने सफ़ेद कपड़े पहने हुए धीमे और सुंदर नृत्य प्रस्तुत करती हैं।

मेवाड़ फेस्टिवल, उदयपुर

कब – 6 - 8 अप्रैल 2019

मेवाड़ फेस्टिवल हर साल उदयपुर, राजस्थान में जोश और उमंग के साथ मनाया जाता है। उदयपुर में वार्षिक रुप से मनाया जाने वाला यह फेस्टिवल तीन दिनों तक चलता है जिसमें कई सारी एक्टिविटीज देखने को मिलती है। उदयपुर में भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा का नेतृत्व के साथ ही राजस्थान में मेवाड़ की सभी जीवित विरासतों की रक्षा करने के लिए मनाया जाता है।

गोदवार फेस्टिवल, उदयपुर

कब – 6-7 अप्रैल 2019

उदयपुर का गोदवार फेस्टिवल यहां का पारंपरिक मेला है। जिसका आयोजन रनकपुर में किया जाता है। कई तरह के एडवेंचरस एक्टिविटीज यहां आकर एन्जॉय कर सकते हैं। राजस्थानी खानपान से लेकर संगीत जैसी कई चीज़ें पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

बिहू, असम

कब – 14 अप्रैल 2019

बिहू असम में मनाया जाने वाला एक पर्व है। असम के सभी लोग भेदभावों को भूलकर बड़े उत्साह से बिहू पर्व को मनाते हैं। इस पर्व में नृत्य संगीत के माध्यम से मानव मन विभोर हो उठता है। विशेषकर युवक और युवतियों के लिए तो बहुत ही खुशी का पर्व होता है। बिहू पर्व असम की प्राकृतिक छटा को तो दर्शाता ही है, साथ ही यह भी संदेश देता है कि जीवन एक कला है, जो इस कला को जानकर जीते हैं, खुशियां उनके क़दम चूमती है। बिहू से नव वर्ष का भी शुभारंभ होता है। ऐसे में पक्षी प्रसन्न होकर चहचहाने लगते हैं। वातावरण में चारों ओर खुशहाली ही खुशहाली छा जाती है। तब मनुष्य का मन भी नाचने गाने को मचल उठता है। यही वैसाख का पावन दिन है, जब असमिया नववर्ष का शुभारम्भ हो जाता है। बिहू को प्रकृति का अनुपम उपहार भी कहा जाता है।

बैशाखी मेला, पंजाब

कब – 14 अप्रैल 2019

वैशाखी के दिन ही सिख गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। और आनंदपुर साहब के गुरुद्वारे में पांच प्यारों से वैशाखी पर्व पर ही बलिदान के लिए आह्वान किया गया था। सिख धर्म में वैशाखी बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। वैसे पंजाब ही नहीं, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी वैशाखी की धूम रहती है। इसके साथ ही जहां-जहां सिख धर्म पल्लवित है वहां वैशाखी जरूर मनाई जाती है। इस दिन तीर्थों में स्नान का महत्व भी है। वैशाखी के दिन रात होते ही आग जलाकर उसके चारों तरफ एकत्र होते हैं और फसल कटने के बाद आए धन की खुशियां मनाते हैं। नए अन्न को अग्नि को समर्पित किया जाता है और पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है।

ईस्टर

कब – 21 अप्रैल 2019

गुड फ्राइडे के तुरंत बाद आने वाले संडे को मनाया जाता है ईस्टर। ऐसा माना जाता है कि इस दिन ईसा मसीह दोबारा धरती पर आए थे। तो इस दिन खुशी मनाते हैं।

संकट मोचन म्यूजिक फेस्टिवल, वाराणसी

कब – 23-29 अप्रैल

स्थानीय लोगों से लेकर पंडित, पुरोहित और विदेशी सैलानी गंगा नदी के तट पर होने वाले इस फेस्टिवल को एन्जॉय करते हुए देखे जा सकते हैं। अप्रैल में हनुमान जयंती के अवसर पर इस फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। बनारस के तट पर होने वाली आरती बहुत ही शानदार होती है।

ट्यूलिप फेस्टिवल

कब – 1-15 अप्रैल

कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन एशिया का सबसे बड़ा गार्डन है। जहां हर साल कश्मीर टूरिज्म बोर्ड द्वारा ट्यूलिप फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। जिसमें आप एक या दो नहीं बल्कि 46 प्रकार के ट्यूलिप देख सकते हैं। दो हफ्तों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में शामिल होकर आप श्रीनगर के सबसे सुंदर नजारे को देख सकते हैं। इसकी पॉप्युरिटी का अंदाजा यहां आने वाले विदेशी सैलानियों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है।

महावीर जयंती

कब – 17 अप्रैल 2019

महावीर जयंती (महावीर स्वामी जन्म कल्याणक) चैत्र शुक्ल को मनाया जाता है। यह पर्व जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के उपलक्ष में मनाया जाता है। यह जैनों का सबसे प्रमुख पर्व है। भगवान महावीर स्वामी का जन्म ईसा से 599 वर्ष पूर्व कुंडग्राम (बिहार), भारत मे हुआ था। इस महोत्सव पर जैन मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है। भारत में कई जगहों पर जैन समुदाय द्वारा अहिंसा रैली निकाली जाती है। इस अवसर पर गरीब एवं जरुरतमंदों को दान दिया जाता है।

गुड फ्राइडे

कब- 19 अप्रैल 2019

गुड फ्राइडे इंडिया के ज्यादातर जगहों पर मनाया जाता है। ईसाई धर्म में इसका विशेष महत्‍व है। इसी दिन ईसाइयों के आराध्‍य प्रभु यीशु ने मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था। इस दिन ईसाई धर्म को मानने वाले चर्च जाकर प्रभु यीशु को याद करते हैं। गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्‍लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है।

 

Posted By: Priyanka Singh

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