करीब 11 हजार स्क्वेयर किमी में फैली चिल्का झील दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी समुद्री झील है। जो उड़ीशा के पुरी जिले में स्थित है। झील में कई सारे छोटे-छोटे द्वीप हैं जो बहुत ही खूबसूरत हैं। सर्दियों में यहां कैस्पियन सागर, ईरान, रूस और साइबेरिया से आए प्रवासी पक्षियों को देखना आसान होता है। इस झील में कई प्रकार के जलीय वनस्पतियां और जीव-जंतु मौजूद हैं। अगर आप भी पक्षियों को देखने का शौक रखते हैं तो चिल्का झील इसके लिए परफेक्ट जगह है।

झील का खासियत
चिल्का झील में 160 से भी ज्यादा प्रकार की मछलियों मौजूद हैं। बोटिंग के साथ-साथ यहां फिशिंग करने की सुविधा भी अवेलेबल है। इनके अलावा सी इगल, ग्रेलैग गीज़, पर्पल मोरहेन, फ्लेमिंगो जकाना की भी प्रजातियां देखी जा सकती हैं। चिल्का लेक सेंचुरी फ्लेमिंगों की ब्रीडिंग के लिए भी अनुकूल जगह है। पक्षियों के साथ-साथ यहां जंगली जानवर जैसे ब्लैकबग, गोल्डेन जैकाल, स्पॉटेड हिरन और हायना भी मौजूद हैं। 

डॉलफिन हैं चिल्का झील का खास आकर्षण
चिल्का झील को 27 फरवरी, 2018 को विश्व स्तर पर इरावदी डॉल्फिन का सबसे बड़ा आवास स्थल घोषित किया गया। यहां 155 इरावदी डॉल्फिन पाए गए हैं। जिनकी संख्या पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है।चिल्का डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा शुरू की गई पहली बार झील की ‘वार्षिक निगरानी’ रिपोर्ट पर के आधार पर झील को यह खिताब दिया गया है। इस रिपोर्ट द्वारा समुद्री स्तनधारियों की संख्या को जानना और साथ ही ‘कलम संस्कृति’ (Pen Culture) को हटाने से उसके जलीय प्रभावों (Hydrological-Impacts) को कम करने के अध्ययन करने के लिए किया गया। 

क्या देखें 

नालंबना

सर्दियों में इस जगह सबसे ज्यादा प्रवासी पक्षी देखने को मिलते हैं।

बर्ड आइलैंड

घरेलू और प्रवासी दोनों ही प्रकार के पक्षियों के लिए यह जगह बेहतरीन है। 

कालीजाई द्वीप

ये आइलैंड देवी काली के मंदिर और आसपास फैली खूबसूरती के लिए मशहूर है। जनवरी में मकर संक्राति के दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती है। 

सतपाड़ा

ये जगह डॉलफिन प्वाइंट के नज़दीक है, जहां इरावडी और बॉटल नोज़ डॉलफिन्स को आसानी से देखा जा सकता है।

ब्रह्मपुत्र

अपनी आसपास फैली खूबसूरती की वजह से ये जगह लोगों को बहुत पसंद आती है। ये एक पिकनिक स्पॉट है।

कब जाएं

वैसे तो यहां का मौसम पूरे साल ही सुहाना होता है तो आप कभी भी यहां आने की प्लानिंग कर सकते हैं लेकिन बेहतर होगा कि जून से सितंबर के बीच यहां आना अवॉयड करें। अक्टूबर से मार्च के बीच आना अच्छा रहेगा। उस दौरान यहां बहुत सारे प्रवासी पक्षी देखने को मिलते हैं।    

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग- भुवनेश्वर यहां का नजदीकी एयरपोर्ट है। जो लेक से लगभग 120 किमी दूर है। लेक तक पहुंचने के लिए यहां से आसानी से टैक्सी और बसें मिल जाएंगी।

रेल मार्ग- बालूगांव यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन है। बालूगांव से लेक पर पहुंचने के लिए बसें अवेलेबल रहती हैं।

सड़क मार्ग- NH5 से चिल्का लेक का एक भाग आसानी से देखा जा सकता है। इसके अलावा भुवनेश्वर और कटक से बालूगांव तक के लिए लगातार बसें चलती रहती हैं। यहां से आप ऑटो या बस अपनी सुविधानुसार लेकर लेक तक पहुंच सकते हैं।

  

Posted By: Priyanka Singh