मुगल बादशाह अकबर ने अपने पुत्र सलीम को जिस किले में नजरबंद किया था, वह अलवर स्थित बाल किला है। जिसे अलवर किले के नाम से भी जाना जाता है। अरावली की पहाड़ियों पर बने इस किले की दीवार पूरी पहाड़ी पर फैली हुई है, जो हरे-भरे मैदानों से होकर गुजरती है। 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस किले का निर्माण हसन खान मेवाती ने कराया था। ये अलवर की सबसे पुरानी इमारतों में से एक है।

किले का बनावट

यह किला अपनी बनावट के लिए खासतौर से मशहूर है। 5 किलोमीटर लंबे और 1.5 किलोमीटर चौड़े बाल किले में प्रवेश के लिए पांच दरवाजे हैं। दुर्ग में जलमहल, निकुंभ महल, सलीम सागर, सूरज कुंड व कई मंदिरों के भी अवशेष भी देखे जा सकते हैं। किले के अंदर लगभग 340 मीटर की ऊंचाई पर 15 बड़े और 51 छोटे टावर लगे हुए हैं। किले में 8 बड़े बुर्ज के साथ बंदूकें दागने के लिए 446 छिद्र बने हुए हैं। किले में राम मंदिर, सिर वाले हनुमान जी का मंदिर और चक्रधर हनुमान मंदिर प्रचीन काल की भव्यता पेश करते हैं।

बाल किले का इतिहास

सन् 1551 में हसन खान द्वारा बनाए गए इस किले का शान आज भी वैसे ही बरकरार है। जिस पर मुगल, मराठों और जाटों ने भी शासन किया। अंत में 1775 में कच्छवाहा राजपूत प्रताप सिंह ने किले को अपने कब्जे में ले लिया।

किले में घूमने का समय

किले की खूबसूरती का आनंद आप सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक ले सकते हैं। वैसे अलवर घूमने के लिए सबसे अच्छा मौसम अक्टूबर से मार्च महीने में होता है। वैसे मानसून के समय भी अलवर घूमने जा सकते हैं।

कैसे पहुंचे

निकटतम एयरपोर्ट नई दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। जयपुर से अलवर करीब 162 किमी. और दिल्ली से करीब 166 किमी. की दूरी पर है। जयपुर व दिल्ली के अलावा उत्तर भारत और राजस्थान के कई शहरों से अलवर के लिए रेल सेवा उपलब्ध है। अलवर स्टेशन पर टैक्सी मिल जाती है। सड़क मार्ग से भी दिल्ली, जयपुर व भरतपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों से अलवर आसानी से पहुंचा जा सकता है।  

Posted By: Priyanka Singh

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