ताकि खुशियां बनी रहें

नोबल पुरस्कार प्राप्त स्पेनिश कवि पाब्लो नेरूदा की कविता 'यू स्टार्ट डाईंग स्लोली में कवि यह संदेश देने की कोशिश करता है कि कैसे मन के उत्साह का खत्म होना व्यक्ति को जीते-जी मृत्यु की ओर धकेलने लगता है। इस कविता का सारांश है-अगर व्यक्ति पढ़ता नहीं, यात्रा नहीं करता, किसी की तारीफ नहीं करता, अपने स्वाभिमान को खत्म कर देता है, दूसरों की मदद नहीं करता, न किसी की मदद लेता है, अपनी उबाऊ दिनचर्या का गुलाम हो जाता है, अजनबियों से हाथ नहीं मिला पाता, अपनी रुचियों में बदलाव नहीं ला पाता, अगर वह जीवन में जोखिम नहीं लेता और अपने सपनों के लिए सब कुछ दांव पर लगाने का जजबा नहीं रखता....तो वह धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। 

 

हर दिन को बनाएं नया

सुबह जागने पर खुद से वादा करें कि आने वाले दिन को व्यर्थ नहीं करेंगे क्योंकि यह अनमोल है। दिन भर में एक कार्य ऐसा जरूर करें कि रात में चैन की नींद सो सकें और अगली सुबह उठें तो कोई मकसद आपके चेहरे पर मुस्कान ले आए-

1. शरीर की उम्र 20 हो या 70, अगर कुछ नया सीखने-जानने या पढऩे की इच्छा नहीं है तो इसका अर्थ है कि बूढ़े हो रहे हैं। रोज कुछ नया पढ़ें, सीखें या जानें। बच्चों सी जिज्ञासा लेकर जहां और जिससे भी सीखने को मिले, सीखें। मन को उम्र के बंधनों से आजाद रखें। 

 

2. घर और कार्यस्थल को जीवंत रखें। काम करने की जगह साफ-सुथरी हो ताकि विचारों का प्रवाह सुगम रहे। रोजमर्रा के काम को करने के नए तरीके खोजें। काम को बेहतर बनाने के लिए लोगों की मदद लें। किसी से सुझाव या मदद मांगते हुए झिझकें नहीं। एक ही कार्य को करने का दो लोगों का तरीका अलग होता है, जिससे परिणाम पर भी असर पड़ता है।

 

3. मस्ती, छुट्टी और हंसने का कोई मौका न गंवाएं। दोस्तों-प्रियजनों से मिलें, बच्चों के साथ वक्त बिताएं और पेट्स को समय दें। बीच-बीच में यात्राएं करें. कोई नया शौक आजमाते रहें। बड़े-बुजुर्गों से उनके पुराने क‍िस्से सुनें या फिर किचन में जाकर कुछ नया बनाने की कोशिश करें।  

 

4. बचपन के कई शौक जीवन की आपाधापी में धूमिल पड़ जाते हैं। दोबारा समय मिलता है तो उम्र आड़े आ जाती है पर इससे फर्क क्या पड़ता है? कभी छात्र बन कर देखें, चेहरे पर उम्र की नहीं, उत्साह की रेखाएं दिखने लगेंगी।  

 

5. अब तो जिम्मेदारियों से घिर चुके हैं, समय कहां है..., स्थितियां ही ऐसी हैं कि...जैसे वाक्यों से बचें। नकारात्मक विचार मन को कैद कर देते हैं जबकि सकारात्मक विचार आजाद करते हैं। व्यक्ति स्थितियों का कम, मन का गुलाम जयादा होता है।  

 

6. अहं, क्रोध, ईष्र्या, प्रतिस्पर्धा और आत्मकेंद्रित मानसिकता कई दुखों को जन्म देती है। जितना संभव हो, इन मनोभावों से दूर रहें। योग व ध्यान से इसमें मदद मिलेगी। 

 

7. सेहत पर ध्यान दें। जीवन का आनंद उठाने के लिए जरूरी है कि इंद्रियां सही काम करें। कान सुनें, दांत स्वाद लें, हाथ-पैर इतने सक्षम हों कि आत्मनिर्भर रहें...ऐसा तभी संभव होगा, जब अपने शरीर से प्यार करेंगे। मन में उत्साह बनाए रखने के लिए शरीर से प्यार करना जरूरी है। 

इंदिरा

 

Posted By: Shweta Mishra