डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण
लगभग पांच साल पहले की बात है। मेरे पास एक युवती का फोन आया। वह मुझसे बहुत जल्दी मिलना चाहती थी। बातचीत से यह मालूम हुआ कि वह एक अच्छी कंपनी में जॉब करती थी और पिछले तीन महीने से अनिद्रा की समस्या से जूझ रही थी। उसने बताया कि बॉयफ्रेंड के हिंसक व्यवहार की वजह से उसका एक रिश्ता टूट चुका था। इसके कुछ दिनों के बाद मधु (परिवर्तित नाम) किसी दूसरे लड़के के प्रेम में पड़ गई लेकिन कुछ ही महीनों के बाद उसके दूसरे बॉयफ्रेंड ने भी न केवल उसके साथ मारपीट की बल्कि आधी रात को उसे घर से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद वह गहरे सदमे में चली गई। 'मैं बहुत परेशान हूं। समझ नहीं पा रही कि क्या करूं? कहती हुई वह रो पड़ी। उसमें डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण नज़र आ रहे थे। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि अभी उससे और बातचीत करनी होगी। इसलिए मैंने उससे दो दिनों के बाद आने को कहा।    

 

समस्या की जड़ें 

इस बार वह थोड़ी संयत लग रही थी। मैंने उसे समझाया कि कोई भी रिश्ता टूटने के बाद सोचने-समझने के लिए खुद को थोड़ा वक्त देना बहुत ज़रूरी होता है। इसलिए जब तक काउंसलिंग चल रही है, अपना मन शांत रखो और पूर्णत: स्वस्थ होने के बाद ही किसी नए रिश्ते के बारे में सोचना। मुझे उसके पेरेंट्स से भी बातचीत की ज़रूरत महसूस हो रही थी। इसलिए मैंने अगली बार उन्हें भी बुला लिया पर उसकी मम्मी अकेली ही आईं।

 

मोबाइल का मेसेज दिखाया

मैंने थोड़ी देर उसकी मम्मी से अकेले में बात की। जब मैंने उनसे पूछा कि आपकी बेटी बार-बार एक ही गलती क्यों दोहराती है? क्या आपके पति को इन बातों की जानकारी है? यह सवाल सुनते ही वह थोड़ी रुआंसी सी हो गईं, 'दरअसल एक बार मधु ने मुझे अपने पापा के मोबाइल पर एक मेसेज दिखाया था, जिसमें फॉर्म हाउस पर किसी अजनबी लड़की से मिलने की बात थी... तब मैंने उसे समझाया कि पुरुषों की फ‍ितरत ही ऐसी होती है। शायद इसमें मेरी भी गलती है। मैं ही तुम्हारे पापा का अच्छी तरह खयाल नहीं रख पाती। यह बात सुनते ही मुझे समस्या की असली वजह समझ आ गई। 

परिवार का सहयोग

लड़कियों के लिए पिता उनके रोल मॉडल होते हैं। जब उस लड़की की मां, पिता की गलत आदतों को सही ठहरा रही हो है तो इससे उसके मन में लड़कों की यह सहज छवि बन गई थी कि लड़कियों के साथ हिंसक व्यवहार करना उनकी आदत होती है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मैंने मधु की मम्मी से कहा कि उसकी ऐसी दशा सुधारने के लिए पूरे परिवार का सहयोग बहुत ज़रूरी है। अगली बार आप अपने पति और बेटे को भी साथ लेकर आएं। अगली सिटिंग में उनका पूरा परिवार एक साथ मौज़ूद था। मैंने सभी सदस्यों से अलग-अलग बात की। मधु के पिता ने कहा कि वाकई मैं बहुत गलत रास्ते पर था और उस एक मेसेज की वजह से मेरे बच्चे मुझे अब तक ब्लैकमेल कर हैं। वे मेरी कोई बात नहीं मानते। मैं उनके आगे बेबस हो गया हूं। मैंने मधु और उसके भाई को समझाया कि तुम दोनों का यह रवैया पूरे परिवार के लिए नुकसानदेह साबित होगा। 

 

डिप्रेशन दूर हो गया

इसके बाद उसके पिता से कहा कि आप पत्नी और बच्चों के साथ बैठकर बातचीत करने की आदत विकसित करें। हालांकि शुरुआत में बहुत मुश्किल होगी कि क्योंकि परिवार के सदस्यों के बीच दूरियां इस हद तक बढ़ चुकी हैं कि रिश्ते को सहज बनाने के लिए आप सभी को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। इसके बाद मैं पंद्रह दिनों के अंतराल पर मधु को पेरेंट्स के साथ काउंसलिंग के लिए बुलाने लगी। अगली सिटिंग में मधु ने बताया कि अब पापा हम लोगों के साथ ही डिनर करते हैं। मैं रात को जल्दी सो जाती हूं। फिर सुबह उठकर योग और मेडिटेशन करती हूं। इससे मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है। इन प्रयासों से मधु की मनोदशा में सुधार आने लगा। इस तरह काउंसलिंग और परिवार के सहयोग से लगभग आठ महीने में उसका डिप्रेशन पूरी तरह दूर हो गया।

Posted By: Shweta Mishra