मकर संक्रांति पर्व को तमिलनाडु एवं केरल प्रांत में पोंगल पर्व, महाराष्ट्र में तीलगूल, पंजाब में लोहड़ी, हरियाणा में सकरात, हिमाचल में माघी, असम में भोमाली बिहू तथा अन्य स्थलों पर मकर संक्रांति या खिचड़ी पर्व के नाम से उत्सव के रूप में मनाते है। इस दिन अलग-अलग जगहों पर खास तरह के व्यंजन बनाए और खाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनके बिना मकर संक्रांति का ये त्योहार अधूरा है। तो आइए जानते हैं इनके बारे में..

दही चिवड़ा

बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चिवड़ा खाने की परंपरा है। चपटा चावल (पोहा) और दही को एक साथ मिक्स करके खाते हैं लोग। चीनी की जगह पकवान को मीठा बनाने और अलग सा स्वाद जोड़ने के लिए गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। 

चूरमा, हलवा और खीर

राजस्थान का मशहूर चूरमा सूखे मेवों के साथ घी और चीनी में भुना हुआ गेहूं का एक स्वादिष्ट व्यंजन है। जिसे बाकी दिनों में तो बनाया खाया जाता ही है लेकिन इस मौके पर तो ये बनना जरूरी है। चूरमे के अलावा सूजी का हलवा और खीर भी बनाने की परंपरा है।

पूरन पोली

यह महाराष्ट्र की बहुत ही मशहूर डिश है। मकर संक्रांति के अवसर पर ज्यादातर घरों में आपको इसका स्वाद चखने को मिल जाएगा। सिर्फ संक्रांति के अवसर पर ही नहीं बल्कि और भी त्योहारों पर मीठे के तौर पर यह बनाई जाती है। यह एक तरह की रोटी है जिसे गुड़, चना दाल, तिल (तिल) और भुने हुए बेसन के साथ बनाया जाता है। घी के साथ इसे परोसा जाता है।

उंधियू

गुजरात में मकर संक्राति का त्योहार दोपहर के भोजन उंधियू और जलेबियों के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा बासुंदी, तिल की चिक्की, खिचड़ो और गुंडर पाक भी इस अवसर पर खाने की परंपरा है। गुजरात में इस पर्व को उत्तरायण के नाम से जाना जाता है।

पथिशपता, पिठे पुली, बंगाल

मकर संक्रांति को पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के रूप में जाना जाता है। असम, ओडिसा और पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति के लिए विभिन्न प्रकार के पथिशपता, पिठे पुली और पायेश खाए और खिलाए जाते हैं।

सक्कराराय पोंगल, दक्षिण भारत

पारंपरिक सक्कराराय को घी में चावल, गुड़, मूंग दाल और काजू के साथ पकाया जाता है। दक्षिण भारतीय में मकर संक्रांति पोंगल के रूप में जाना जाता है।

 

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Edited By: Priyanka Singh