नई दिल्ली। वक्‍त बदल चुका है और वक्‍त के साथ लोगों की सोच में भी बदलाव नजर आने लगा है। हालांकि, महिलाओं की आजादी और सशक्तिकरण की बात पर आज भी लोगों की सोच में संशोधन की जरूरत हैं, मगर महिलाओं ने अब इसे अपने अंदाज में नजरअंदाज करना शुरू कर दिया है। शायद यही वजह है कि घर की चौखट के बाहर की दुनिया में भी महिलाएं उन्‍नति की सीढ़ियां चढ़ती दिख रही हैं।

आज हर क्षेत्र में महिलाओं को देखा जा सकता है। मजे की बात तो यह है कि महिलाएं घर और बाहर की दोहरी जिम्‍मेदारियों को एक साथ निभाते हुए भी मजबूत नजर आ रही हैं। मगर महिलाओं के पैरों में पैरों में बेड़ियां डालने वाली सोच आज भी खत्‍म नहीं हुई है। 

कभी उन्‍हें खूबसूरती के पैमाने पर गलत ठहराने की कोशिश की जाती है तो कभी पीरियड्स के नाम पर कमजोर महसूस कराने का षड्यंत्र रचा जाता है।

मगर हमारे समाज में कुछ ऐसी महिलाएं भी है, जिन्‍हें नकारात्‍मकता में सकारात्‍मकता की किरणों को तलाशना आता है। ऐसी ही महिलाओं के साथ हरजिंदगी ने इस महिला दिवस को सेलिब्रेट करने के लिए Shespeaks Dialogues का आयोजन किया और 'Women In Leadership Achieving An Equal Future' थीम के अंतर्गत महिलाओं से जुड़े कुछ ऐसे मुद्दों पर बात की, जो एक महिला के रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्‍सा बन चुके हैं।

Shespeaks Dialogues को पांच अलग-अलग सेशन में बांटा गया और इसमें अलग-अलग मुद्दों पर कई वुमन अचीवर्स न अपने पक्ष को रखा-

 

सेशन- तोड़ेंगे खूबसूरती के गलत पैमाने (Double Beauty Standard )

इस सेशन में हमने बॉडी पॉजिटिविटी और डबल ब्यूटी स्टैंडर्ड्स पर देश की दो सशक्‍त महिलाओं से बातचीत की। जिनमें एक थीं डॉक्टर फाल्गुनी वसावड़ा, जो की एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर, TedX स्पीकर , डबल गोल्डमेडलिस्ट होने के साथ-साथ दो दशकों टीचर भी हैं। वहीं हमारी दूसरी गेस्‍ट 'प्लम्प इज प्रिटी' ब्लॉग की ओनर नीलाक्षी सिंह थी। आपको बता दें कि नीलाक्षी सिंह एक प्‍लस साइज मॉडल भी हैं।

डॉक्टर फाल्गुनी की माने तो खूबसूरती वह है जो आप महसूस करते हैं। वह कहती हैं, ' खुद को पहचानना एक सुपरपावर है। आपको किसी और के जैसा लगने की जरूरत नहीं है।' वहीं नीलाक्षी कहती हैं, ' हर कोई अपने अंदाज में खूबसूरत हो सकता है। आपकी बात करने का ढंग और सोचने का ढंग भी आपको खूबसूरत बना सकता है। '

 

सेशन : पीरियड पाजिटिविटी (I Bleed)

आज भी भारत में पीरियड्स एक ऐसा विषय है, जो टैबू बना हुआ है। भारत में पीरियड्स से जुड़े कई अंधविश्वास हैं, जिन्‍हें सुन कर हंसी और गुस्‍सा दोनों ही आ जाता है। इस सेशन में डॉक्‍टर अरुणा कालरा (फेमस गायनेकोलॉजिस्ट), अनुज किश (UnTaboo, सेक्‍स एजुकेशन कंपनी के फाउंडर) और मीनल खरे (सुखीभावा फाउंडेशन की हेड) ने पीरियड्स से जुड़ी भ्रांतियों पर बात की। डॉक्‍टर अरुणा कालरा ने कहा, 'पीरियड्स आना रिप्रोडक्टिव हेल्‍थ का साइन होता है, जो कि बहुत अच्‍छी बात है।' वहीं अनुज किश ने कहा, 'अगर आपकी बेटी को ठीक से पीरियड्स होते हैं तो आपको खुशी मनानी चाहिए कि आपकी बेटी स्‍वस्‍थ है।'

सेशन- सपनों की अनोखी उड़ान (Disruptors )

मेरी दुनिया, मेरे नियम, मेरी परिभाषा। महिलाएं अगर इस तरह से सोचने लगे तो उम्र, करियर, काम, परिवार आदि कोई भी बंदिश उन्हें वो करने से नहीं रोक सकती है जो वो चाहती हैं। इस सेशन में हमने यही बातें की। हमारे इस सेशन के पैनल में डॉक्टर चिन्ना दुआ (रेडियोलॉजिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर), मिस रिचा महेश्वरी (अवॉर्डविनिंग फैशन फोटोग्राफर जिनका नाम लिमका और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है), सुचेता पाल (महिलाओं की वेलनेस कोच और जुंबा इंडिया की अम्बेसेडर), मिसेज आभा गोडियाल कक्कड़ (इंस्टा आंटी, टीचर और सोशल मीडिया सेंसेशन) और स्नेहिल दीक्षित ( B.C.Aunty, कंटेंट क्रिएटर और इन्फ्लुएंसर) हमसे जुड़ीं।

यह सेशन काफी दिलचस्‍प रहा, जिसमें डॉक्‍टर चिन्‍ना दुआ ने कहा, 'महिला को एक अद्भुत ताकत मिली है कि वह एक नई जिंदगी को जन्‍म दे सकती हैं।' वहीं स्‍नेहिल मेहरा ने कहा कि लोगों का काम है जज करना और हमारा काम है उन्‍हें नजरअंदाज करना, देखा जाए तो स्‍नेहिल ने मुद्दे की बात की है। महिलाओं को हमेशा ही कभी उनके चरित्र को लेकर तो कभी उनकी काबलियत को लेकर जज किया जाता रहा है। मगर इससे सहम कर और डर कर पीछे हटने की जरूरत नहीं है। इसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सुचेता पाल ने कहा, 'महिलाओं को जिस चीज़ को असल में बदलने की जरूरत है वो उनका खुद का दिमाग और सोच है, आप ही खुद की सबसे बड़ी बंदिश बन सकती हैं।' इस सेशन में मिसेज आभा गोडियाल ने कहा, 'खुद को पहचान कर जब एक महिला खुद के लिए स्‍टैंड लेती है, तब वह पूर्ण हो पाती है।' 

 

सेशन-सिस्टरहुड की बातें (Sisterhood)

ये तो आपने कई बार सुना होगा कि औरत ही औरत की दुश्‍मन होती है। मगर यह बात कितनी सच है यह जानने के लिए हमने अपने इस सेशन में मालिनी अग्रवाल ( डिजिटल इंफ्लूएंसर, टीवी होस्‍ट और missmalini.com की फाउंडर), शायरी चहल (Sheroes.com की फाउंडर), प्रीति राठी (financial website "LXME " की फाउंडर ) से बातचीत की और महिलाओं के बीच होने वाली 'कैट फाइट' की गुत्‍थी को सुलझाने की कोशिश की।

प्रीति राठी गुप्‍ता ने इस सेशन में महिलाओं की फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस पावर पर फोकस किया। उन्‍होंने कहा,' शादी से पहले 34 % सिंगल महिलाएं अपने निर्णय खुद लेती हैं, मगर शादी के बाद 30%  महिलाएं ही अपने निर्णय ले पाती हैं। बच्‍चा होने के बाद तो यह अनुपात और भी कम हो जाता है और केवल 10% महिलाएं ही अपने फैसले खुद लेती हैं। बाकी महिलाएं अपने पति के फैसले के अनुसार ही काम करती हैं। मगर यह स्थिति चिंताजनक है। महिलाओं को अगर जीवन में आगे बढ़ना है तो उन्‍हें अपने फैसले खुद ही लेने चाहिए।' वहीं मिस मालिनी ने कहा, 'कैट फाइट शब्‍द को देने वाले पुरुष ही हैं, क्‍योंकि वह नहीं चाहते कि महिलाओं के बीच यूनिटी 

हो पाए।' वहीं शायरी चहल ने महिलाओं को एक छोटा मगर बेहद प्रभावशाली संदेश दिया। उन्‍होंने कहा, 'डरना नहीं है बल्कि आगे बढ़ना है।' जाहिर है, अकेले आगे नहीं बढ़ा जा सकता है, इसके लिए एकता की जरूरत है इसलिए औरत को औरत का दुश्‍मन नहीं दोस्‍त बनना पड़ेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

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सेशन-स्‍टार टॉक (Heart To Heart )

मां बनना एक महिलाए की जिंदगी का बहुत ही खूबसूरत पल होता है। मगर मां बनने के बाद आज भी बच्‍चे की पूरी जिम्‍मेदारी औरत के कंधे पर डाल दी जाती है। ऐसे में कुछ सेलिब्रिटी कपल्‍स इस बात का बेमिसाल उदाहरण है कि कैसे मिलकर बच्‍चे की परवरिश की जा सकती है। इन्‍हीं में से एक हैं टीवी इंडस्‍ट्री की फेमस एक्‍ट्रेस अनीता हसनंदानी और उनके हसबैंड रोहित रेड्डी। गौरतलब है, अनीता कुछ दिन पहले ही एक बेटे की मां बनी हैं। अनीता हमारे साथ इस सेशन में जुड़ीं और अपने मदरहुड के अद्भुत अनुभव को शेयर किया। जब हमने अनीता से पूछा कि क्‍या वो और उनके हसबैंड बराबर से बच्‍चे का ध्‍यान रखते हैं। तो उनका जवाब था, 'हमारे काम बटें हुए हैं और कोई अपने का के लिए 'न' नहीं कहता है। हम दोनों बराबरी से बच्‍चे का ध्‍यान रखते हैं। '

हरजिंदगी की तरफ से महिला दिवस की आप सभी को ढेरों शुभकामनाएं। वुमन अचीवर्स के इन सेशन को देखने और पढ़ने के लिए हरजिंदगी वेबसाइट के वुमन इंस्पिरेशन सेक्‍शन को जरूर देखें।

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