कितनी सही ऑनलाइन खरीदारी

जीएसटी लागू होने के बाद भी लोग असमंजस में हैं कि खरीदारी करने के लिए कौन से माध्यम को चुना जाए। कुछ लोगों को लगता है कि ऑनलाइन शॉपिंग बेहतर विकल्प है। क्या वाकई ऑनलाइन खरीदारी फायदे का सौदा हो सकता है?  

आजकल क्या खरीदारी करते वक्त आपको बिग बिलियन सेल, 80-90 फीसदी तक डिस्काउंट्स, बाय वन गेट वन, एक्सचेंज ऑफर्स यानी पुराने के बदलें नया पाएं जैसे ऑफर मिल रहे हैं? अगर हां तो ये ऑफर्स कितने सही हैं और कितने गलत, जानने के लिए पढ़ें सखी की एक रिपोर्ट।

 

एक्सपर्ट की सलाह

चार्टर्ड अकांउटेंट, प्रीति खुराना के मुताबिक, गैजेट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, क्लोदिंग, फुटवेयर और दूसरी कई चीज़ें लोग ऑनलाइन ही खरीदना पसंद करते हैं। इसी के साथ, प्रोडक्ट पर वारंटी के साथ पसंद न आने पर रिटर्न करने की सुविधा भी दी जाती है, यानी हर तरफ से यहां यूज़र्स का फायदा होता है। जीएसटी लागू होने के बाद से ही ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने सप्लायर्स को भुगतान करते वक्त 1टीसीएस (टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स) वसूलने की ज़रूरत होगी। इसे देखते हुए ऑनलाइन साइट्स सहित कई ई-कॉमर्स कंपनियां कई ऑफर्स के साथ ऑनलाइन खरीदारी पर ज़बर्दस्त छूट दे रही हैं। कई सामानों की कीमत पर तो 80% तक की छूट दी जा रही है। इन कंपनियों को टीडीएस देने के बाद टैक्स देना पड़ेगा और इसका बोझ बस उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इस कारण ये कंपनियां अपना ज्य़ादा से ज्य़ादा स्टॉक खत्म करना चाहती हैं। जुलाई से दिसंबर के इन छह महीने के अंदर ही विक्रेताओं को रेडी मैन्युफैक्चर ओल्ड स्टॉक (लिक्विडेट) निकालना है, फिर चाहे वे सामान ऑनलाइन हों या ऑफलाइन। यह भी एक बड़ा कारण है कि कंपनियां ग्राहकों को डिस्काउंट और सेल के लुभावने ऑफर्स का लालच दे रही हैं।


इस माह से दिखेगा असर

ऑनलाइन कंपनियों का रिटर्न रेट लगभग 18त्न के आसपास है। सोर्स से टैक्स कलेक्ट करने (एड हॉक टैक्स) के कारण अब कंपनियों को ये सारा टैक्स अमाउंट सहन करना पड़ेगा। अगर रिटर्न किया जाता है तो ये टैक्स ई-कॉमर्स यानी ऑनलाइन कंपनियों को ही सहन करना होगा और बाद में इसे सरकार से रिटर्न लेना होगा। इसका मतलब अभी तक जो कैंसिलेशन और रिफंड आसानी से हो जाते थे, अब वो उतने आसान नहीं रहेंगे। यह असर अक्टूबर या नवंबर से दिखने लगेगा।

 

डिलिवरी में तेज़ी मिलेगी

आजकल आपने गौर किया होगा कि आपको एक्सपैक्टेड डेट से पहले ही सामान उपलब्ध हो जाता है। जीएसटी के बाद से आप तक आपका सामान तय तिथि से पहले या ऑन डेट मिल जाता है यानी इससे ऑनलाइन शॉपिंग में फायदा होगा। इससे सामान की डिलिवरी जल्दी हो जाएगी। उदाहरण के तौर पर इसे ऐसे समझें कि अगर कंपनी बेंगलुरु में स्थित है और डिलिवरी दिल्ली में करनी है तो ऑनलाइन शॉपिंग साइट को अलग से पेपर फाइल करने की ज़रूरत नहीं होगी। इसका मतलब यह हुआ कि पहले एक बिल लॉजिस्टिक्स के लिए तो दूसरा बिल स्टेट बदलने पर देना पड़ता था, अब ऐसी हालत नहीं होगी तो उम्मीद है कि तेज़ी से डिलिवरी की जा सकेगी।

कम होते जाएंगे डिस्काउंट्स 

क्या आपको ऑनलाइन साइट्स से शॉपिंग करने की आदत है? क्या इस पर मिलने वाले डिस्कांउट्स या सेल का आपको बेसब्री से इंतज़ार रहता है? अगर हां तो आपके लिए थोड़ी सी मुश्किल बढऩे वाली है। ये ऑफर्स आपको तभी तक मिलेंगे, जब तक कि कंपनी का पुराना माल यानी स्टॉक खत्म नहीं हो जाता। किसी भी कंपनी को अपना माल जुलाई से दिसंबर के बीच ही बेचना होगा। सीधे शब्दों में कहा जाए तो जब तक पुराना माल नहीं बिकता, तब तक कोई भी कंपनी नया माल नहीं निकाल सकती। क्लीयर टैक्स के एक्सपर्ट अर्चित गुप्ता के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर से आपको ऑनलाइन शॉपिंग महंगी पड़ सकती है। अभी फ‍िलहाल तो सभी अपना पुराना स्टॉक खत्म करने में ही लगे हैं, जिस कारण तेज़ी से बिग बिलियन ऑफर्स मिल रहे हैं। इसका दूसरा कारण यह भी है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को टैक्स कलेक्ट कर विक्रेताओं को टैक्स देना होगा तो ऐसे समय में ऑनलाइन कंपनियों को डिस्काउंट देना महंगा पड़ सकता है।

 

एक रिसर्च

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, जीएसटी से पहले ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स एड हॉक टैक्स नहीं लेती थीं लेकिन अब 1% एड हॉक टैक्स (वो टैक्स जो एक बार की कमाई पर लिया जाता है) हर ट्रेडर से लेंगी। ऐसे में अभी तक जो टैक्स लगता था, उसमें 1% का इज़ाफा होगा। ऐसे में सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा क्योंकि 1% अधिक टैक्स का भुगतान तो उन्हें ही करना होगा। 

प्रस्तुति : गीतांजलि

By Shweta Mishra