वाशिंगटन, एएनआइ : यह जानकर हैरानी हो सकती है कि महिलाओं और पुरुषों में हृदय रोग के लक्षण अलग-अलग होते हैं। इस कारण कई बार इस गंभीर रोग की सही पहचान नहीं हो पाती है और स्थिति बिगड़ जाती है। लेकिन अब यूनिवर्सिटी आफ फ्लोरिडा के विज्ञानियों ने नए शोध में एक ऐसे जीन की पहचान की है, जो यह जाना जा सकता है कि महिलाओं और पुरुषों में हृदय रोग के लक्षण अलग-अलग क्यों होते हैं और उसके आधार पर रोग का जल्द पता लगाकर उसके समुचित इलाज की व्यवस्था की जा सकती है।

यूनिवर्सिटी आफ फ्लोरिडा कालेज आफ नर्सिग की एसोसिएट प्रोफेसर जेनिफर डंगन ने बताया कि हृदय रोग की जांच के लिए ज्ञात लक्षणों की प्रोफाइल और लैब टेस्ट से महिलाओं में लक्षणों के अलग होने की विशिष्ट और सटीक जानकारी नहीं मिलती है। इससे महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल में अंतर बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि इस असमानता के कारण महिलाएं पुरुषों के मुकाबले हृदय रोग के ज्यादा लक्षणों की रिपोर्ट तो करती हैं, लेकिन वे सामान्य लक्षणों से अलग होते हैं, जिससे उनके इलाज में देरी होती है और कई बार रोग की पहचान नहीं होने से हार्ट अटैक तक की नौबत भी आ जाती है।

उनके मुताबिक, हृदय रोगों के शोधकर्ता बताते हैं कि लक्षणों में यह अंतर महिलाओं और पुरुषों के जीन में भिन्नता की वजह से होते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने एक ऐसे विशिष्ट जीन- आरएपी1जीएपी2 की पहचान की है, जिसके बारे में उनका मानना है कि यही लक्षणों में अंतर के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

डंगन का कहना है कि लिंग आधारित आरएपी1जीएपी2 नामक यह जीन महिलाओं में हृदय रोग के लक्षणों को प्रभावित करता है। इस जीन के कुछ खास डीएनए मार्कर के बारे में माना जाता है कि ये प्लटेलेट्स, रंगहीन ब्लड सेल्स की गतिविधियों को मैनेज करते हैं, जो ब्लड क्लाटिंग (रक्त के थक्का जमने) में मदद करता है। यह भी हार्ट अटैक के जोखिम का एक संकेतक है। एक अतिसक्रिय यह जीन ब्लड क्लाट के लिए बहुत ज्यादा प्लेटलेट्स की प्रतिक्रिया को बढ़ावा दे सकता है, जिससे ब्लड और आक्सीजन का हृदय की मांसपेशियों में प्रवाह ब्लाक हो जाता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। उनका कहना है कि अध्ययन में चूंकि आरएपी1जीएपी2 जीन पुरुषों में हृदय की कमजोरी से जुड़ा नहीं पाया गया, इसलिए यह माना जा सकता है कि यह जीन महिलाओं में अलग तरीके से काम करता है। शोध का यह निष्कर्ष अमेरिकन हार्ट जर्नल प्लस में प्रकाशित हुआ है।

डंगन का कहना है कि अश्वेत और कुछ हिस्पैनिक महिलाएं में हृदय रोग का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा होता है और हो सकता है कि उसका भी कारण जीनेटिक्स हो। लेकिन अभी तक नस्ली और जातीय समूहों को लेकर जो अध्ययन हुए हैं, उसमें कोई सटीक परिणाम नहीं निकले हैं। हमारा मकसद उस जीन मार्कर की पहचान करना था, जो सभी महिलाओं में हृदय रोग से सटीक तौर पर जुड़ा हो। इस दिशा में हमें महिलाओं में जीनेटिक भिन्नताओं पर भी गौर करना था। शोधकर्ताओं ने 17 हजार रजोनिवृत्त महिलाओं के स्वास्थ्य डाटा का जीनेटिक विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या आरएपी1जीएपी2 पर मौजूद कुछ खास डीएनए मार्कर हृदय रोग से जुड़े हैं। आगे के अध्ययनों में भी यदि यह पाया गया कि आरएपी1जीएपी2 के जीन मार्कर महिलाओं में हृदय रोग के सटीक संकेतक हैं तो उसके आधार पर भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक के जोखिम का पता लगाना संभव हो सकेगा।

Edited By: Sanjay Pokhriyal